शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय तो साफ कर चुके है कि तीसरी लहर में बच्चों के लिए खतरा है. ऐसे में सरकार स्कूल खोलने से पहले अभी और मंथन कर रही है. 30 साल की दीपमाला बताती हैं कि उनके 2 बच्चे हैं और उन्हें ऑफिस भी जाना होता है. ऐसे में बच्चों को अकेले घर पर छोड़ने में दिक्कत आ रही है. यही हालात इन दिनों अधिकांश पेरेंट्स के सामने है कि डेढ़ साल से बच्चों में घर में रहकर आलस पन ज्यादा महसूस किया जा रहा है. उन्हें समझ नहीं आ रहा कि कैसे बच्चों को घर पर कैसे व्यस्त रखे.
स्पोर्टस एक्टिविटी के बिना बच्चे समझ नहीं पा रहे की कैसे फिजिकली फिट रहें. स्कूूल खुले रहते हैं तो शेड्यूल्ड पर सारेेे काम हो जाते हैं. समय पर उठना और स्कूल जाकर एक्टिविटी में भाग लेकर भी बच्चों का कॉन्फिडेंस बढ़़ जाता मगर पिछलेे डेढ़ साल से ऐसा नहीं हो पा रहा है. अब बच्चों को बिना फिजिकल एक्टिविटी के घर पर टैकल करना पेरेंट्स को मुश्किल हो रहा है. ऐसे में सब यही चाह रहे हैं कि कोरोना का खतरा टले और स्कूल जल्द खुल जाएं.
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