भीलवाड़ा34 मिनट पहले
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कोटड़ी उपखंड की आकोला पंचायत के लाेग बनास नदी का अस्तित्व बचाने के लिए गुरुवार सुबह धरने पर बैठ गए। सरपंच के नेतृत्व में इन्हाेंने बजरी माफिया से नदी काे बचाने की मांग करते हुए प्रर्दशन किया।
सुप्रीम कोर्ट ने नदी-नालों से बजरी खनन पर 2017 से रोक लगा रखी है। बावजूद बड़े पैमाने पर काेटड़ी तहसील क्षेत्र से निकलती बनास नदी में बजरी का दोहन बेखाैफ हाे रहा है। मशीनें लगाकर दिनरात ट्रेलर, ट्रक, डंपर, ट्रैक्टर आदि से भारी मात्रा में रेत निकाली जा रही है।
नदी का स्वरूप बिगड़ चुका है। कुओं, बोरवेल में पानी सूख गया। जलस्तर गिर गया जिससे पीने के पानी की भी किल्लत हाे गई। खेत भी तरसने लग गए। गुरुवार सुबह आकोला के लाेगाें ने बाजार बंद रखे। गांव में ढोल बजाते हुए लोगों को एकत्र किया गया।
इसके बाद लाेग श्मशान घाट के पास टेंट लगाकर धरने पर बैठ गए। सरपंच शिवलाल जाट ने अाराेप लगाया कि पंचायत क्षेत्र की सैकड़ाें हैक्टेयर सरकारी जमीन पर बजरी के बड़े-बड़े ढेर लगा दिए गए हैं। 30-40 फीट तक गहरे गढ्डे हाेने से चरागाह नष्ट हाे चुके हैं।
सैकड़ाें फीट गहरे कुएं, यहां तक कि बोरवेल तक सूख गए। प्रशासनिक अधिकारियों को बार-बार बताया लेकिन सुनवाई नहीं हाेती। जमनालाल माली ने कहा कि बजरी माफिया ने गांव के चारागाह को बर्बाद कर दिया है। लेकिन प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा, जिससे क्षेत्र के लाेगाें में आक्रोश है। धरने की सूचना देने के बावजूद कोई भी अधिकारी आकोला नहीं पहुंचा। वहीं पटवारी व गिरदावर मोहनसिंह राव ने मौका पर्चा बनाया है।
