अब यूपी में भी होगी मेडिकल, इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में
नई दिल्ली:
U.P Latest News: मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh government) द्वारा मेडिकल की पढ़ाई हिंदी में शुरू करने के बाद उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Chief Minister Yogi Adityanath) ने कहा कि अब प्रदेश में भी मेडिकल और इंजीनियरिंग की पढ़ाई हिंदी में होगी. हाल ही में उन्होंने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राज्य में कुछ मेडिकल (medical) और इंजीनियरिंग (engineering) की पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद किया गया है और आने वाले वर्ष से इन विषयों के पाठ्यक्रम राज्य के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में हिंदी में भी अध्ययन के लिए उपलब्ध होंगे. मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, “उत्तर प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कुछ पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद कर दिया गया है. आगामी वर्ष से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में इन विषयों के पाठ्यक्रम हिंदी में भी पढ़ने के लिए मिलेंगे.”
उत्तर प्रदेश में मेडिकल और इंजीनियरिंग की कुछ पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद कर दिया गया है।
आगामी वर्ष से प्रदेश के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में इन विषयों के पाठ्यक्रम हिंदी में भी पढ़ने के लिए मिलेंगे।
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) October 15, 2022
जेएनयू के ये हैं टॉप यूजी कोर्स, स्टूडेंट की हैं पहली पसंद
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Union Home Minister ) ने अभी दो दिन पहले ही मध्य प्रदेश सरकार की हिंदी भाषा में मेडिकल एजुकेशन की महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत एमबीबीएस छात्रों के लिए तीन विषयों की हिंदी में पाठ्यपुस्तकों का विमोचन किया. शाह (Amit Shah) ने इसे इतिहास का एक महत्वपूर्ण दिन बताते हुए कहा कि मध्य प्रदेश देश का पहला ऐसा राज्य बन गया है जिसने हिंदी में एमबीबीएस (बैचलर ऑफ मेडिसिन एंड बैचलर ऑफ सर्जरी) कोर्स शुरू किया है.
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आयोजित एक समारोह में गृहमंत्री ने एमबीबीएस छात्रों के लिए मेडिकल बायोकेमिस्ट्री, एनाटॉमी और मेडिकल फिजियोलॉजी विषयों की हिंदी में पाठ्यपुस्तकों का अनावरण किया. इस मौके पर उन्होंने कहा, “यह दिन इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा.”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की आठ अन्य भाषाओं में तकनीकी और चिकित्सा शिक्षा शुरू करने का काम जारी है. उन्होंने कहा कि हिंदी में एमबीबीएस पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत शुरू किया गया था और जल्द ही इसे अन्य भाषाओं में भी शुरू किया जाएगा.