उत्तराखंड की शिल्पा चौहान ने रचा इतिहास, जौनसार बावर की पहली महिला IAS अफसर


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UPSC Result 2024: शिल्पा चौहान ने UPSC परीक्षा में सफल होकर त्यूनी तहसील के साथ-साथ पूरे जौनसार बावर का नाम रोशन किया है. सिविल सेवा परीक्षा में उनकी 188वीं रैंक है. शिल्पा ने पहले ही प्रयास में इस परीक्षा में …और पढ़ें

शिल्पा चौहान की सिविल सेवा परीक्षा में 188वीं रैंक है.

देहरादून. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2024 (UPSC Result 2024) का रिजल्ट आ चुका है. upsc.gov.in पर जाकर रिजल्ट देखा जा सकता है. उत्तर प्रदेश के प्रयागराज की शक्ति दुबे ने पहली रैंक हासिल की है. UPSC ने मंगलवार को कुल 1009 चयनित उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. यूपीएससी परीक्षा 2024 के इंटरव्यू 17 अप्रैल तक हुए थे. इंटरव्यू राउंड की शुरुआत 7 जनवरी 2025 से हुई थी. मुख्य परीक्षा में पास होने वाले 2845 उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था. इस परीक्षा में उत्तराखंड के देहरादून के त्यूनी में ग्राम शेडिया निवासी शिल्पा चौहान भी सफल हुई हैं. उन्होंने यूपीएससी परीक्षा में सफलता पाकर इतिहास रच दिया है. दरअसल वह जौनसार बावर की पहली महिला IAS अफसर होंगी.

शिल्पा चौहान ने त्यूनी तहसील के साथ-साथ पूरे जौनसार बावर का नाम रोशन किया है. सिविल सेवा परीक्षा में उनकी 188वीं रैंक है. उन्होंने पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा में सफलता हासिल की है. उनके पिता राजेंद्र सिंह चौहान भारतीय सेना में सेवा दे रहे हैं. वर्तमान में वह दिल्ली में तैनात हैं. उनकी माता संगीता चौहान गृहिणी हैं. शिल्पा की प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही प्राइमरी स्कूल में हुई. इसके बाद उन्होंने जवाहर नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा पास करके ठियोग और बिलासपुर से कक्षा 10 और 12वीं की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने ग्रेजुएशन डीएवी पीजी कॉलेज से किया. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली से एक साल कोचिंग की. शिल्पा चौहान की इस सफलता पर पूरा परिवार गौरवान्वित महसूस कर रहा है. चौहान परिवार को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है.

अंजू भट्ट ने हासिल की 312वीं रैंक
बताते चलें कि देहरादून के विकासनगर के बरोटीवाला की रहने वालीं अंजू भट्ट ने भी सिविल सेवा परीक्षा पास की है. उनकी 312 रैंक है. यह उनका चौथा प्रयास था. अंजू ने कहा कि जब वह 10वीं में थीं, तभी से ही सिविल सेवा परीक्षा में सफलता पाने का मन बना चुकी थीं. अपना सपना पूरा करने के लिए उन्होंने घर पर ही तैयारी शुरू कर दी थी. पढ़ाई के साथ-साथ वह तैयारी में भी जुटी रहीं. वह तीन बार परीक्षा दे चुकी थीं लेकिन असफल रहीं. उन्होंने हार नहीं मानी. चौथे प्रयास में परीक्षा पास कर उन्होंने परिवार और क्षेत्र का नाम रोशन किया है. उनकी सफलता से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है.

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