उत्तराखंड के इस सरकारी स्कूल में एडमिशन के लिए मची हाय तौबा, एंट्रेंस टेस्ट के बाद मिलता है दाखिला


रिपोर्ट- सुष्मिता थापा
बागेश्वर.
सरकारी स्कूलों से बच्चों को निकालकर कॉन्वेंट स्कूलों में भर्ती कराना अमूमन आम बात है. लेकिन यदि हम आपसे कहें कि उत्तराखंड में एक सरकारी स्कूल ऐसा भी है, जहां निजी स्कूल छोड़कर बच्चे पढ़ रहे हैं तो आपको शायद यकीन नहीं होगा. जी हां, बागेश्वर जिले के कपकोट में राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय आज अपनी एक अलग मिसाल पेश कर रहा है. कई सरकारी स्कूल स्टूडेंट्स के अभाव में बंद होने की कगार पर हैं, लेकिन इस प्राथमिक विद्यालय में एडमिशन के लिए हाय-तौबा मची हुई है.

40 सीटों के लिए अब तक 300 आवेदन आ चुके हैं. इस स्कूल के 22 बच्चे सैनिक स्कूल के लिए चयनित हुए हैं. स्टूडेंट्स प्राइवेट स्कूल छोड़ यहां एडमिशन ले रहे हैं. यहां आवेदन करने के बाद बच्चों को प्रवेश परीक्षा में भाग लेना होता है. रिजल्ट के बाद चयनित बच्चों का एडमिशन होता है.

कक्षा पांच के स्टूडेंट गौरव जोशी बताते हैं कि उनके स्कूल में काफी अच्छी पढ़ाई होती है, इसी कारण प्राइवेट स्कूल छोड़कर उन्होंने यहां एडमिशन लिया था. खेल-खेल में सारे सब्जेक्ट समझाए जाते हैं. इसी प्राइमरी स्कूल में पढ़ने वाली गरिमा वाछमी कहती हैं कि अच्छी पढ़ाई के कारण उनके पैरेंट्स ने कक्षा चार में यहां दाखिला दिलवाया था. इस बार मेरा चयन घोड़ाखाल के सैनिक स्कूल के लिए हुआ है.

7 साल में बदल गई तस्वीर
आज यह सरकारी स्कूल रोज नई बुलंदियां छू रहा है.इन बुलंदियों के पीछे हैं प्राचार्य केडी शर्मा. प्राचार्य केडी शर्मा बताते हैं कि वर्ष 2016 में जिन दिनों उनकी नियुक्ति हुई थी, तब स्कूल मात्र टिन शेड में चलता था. अभिभावक अपने बच्चों को पढ़ने के लिए दूसरे स्कूलों में भेजते थे. शिक्षा को लेकर बहुत ही निराशा भरा माहौल था. परिस्थितियां बिल्कुल विपरीत थीं. 2016 में बच्चों की संख्या भी 30 हुआ करती थी. शिक्षकों की कड़ी मेहनत से आज यह स्कूल किसी भी आधुनिक स्कूल से कमतर नहीं है. यहां पर बच्चों की एक्स्ट्रा क्लास ली जाती है और उनके सारे कन्फ्यूजन दूर करने का पूरा प्रयास किया जाता है.

हर जगह है चर्चा
उन्होंने आगे कहा कि आज पहाड़ के दूरस्थ क्षेत्र का यह प्राइमरी स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से बदहाल व्यवस्था को नई उम्मीद दे रहा है. क्वालिटी एजुकेशन और शानदार व्यवस्था के चलते यह प्राइमरी स्कूल प्रदेश में ही नहीं पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है.

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