ऋषिकेश की दुर्गा पूजा में दिखती है बंगाल की झलक, 35 सालों से लगता है पंडाल


ऋषिकेश: हिंदू धर्म में सभी अलग-अलग विधि से मां दुर्गा की पूजा करते हैं. जहां भारत के अधिकतर हिस्सों में नवरात्रि की शुरुआत 3 अक्टूबर से हो गई है, वहीं बंगाल में छठे नवरात्र से दुर्गा उत्सव की शुरुआत होती है. वैसे ही ऋषिकेश में भी पांचवे नवरात्र से मां दुर्गा का पंडाल लगाया जाता है और सभी लोग इन 6 दिनों तक दिन-रात देवी की पूजा में लगे रहते हैं. 07 अक्टूबर से 12 अक्टूबर को दशहरे के दिन तक ये उत्सव बड़ी धूम धाम से मनाया जाता है. 6 दिन चलने वाले इस उत्त्सव का अपना धार्मिक महत्व है.

5 वीं नवरात्री से लगता है माता का पंडाल

लोकल 18 के साथ हुई बातचीत के दौरान श्री दुर्गा पूजा समिति के सचिव शंकर कुमार राय ने बताया कि पूरे ऋषिकेश में नवरात्री के ये 9 दिन बड़े धूम धाम से मनाए जाते हैं. सभी भक्त मां का दरबार लगाना, भंडारा करवाना, जागरण इत्यादि का आयोजन करवाते हैं. वहीं तपोवन ऋषिकेश में 1989 से श्री दुर्गा पूजा समिति द्वारा मां दुर्गा का ये पंडाल लगाया जाता है. 5वीं नवरात्री से लेकर आखरी नवरात्रि तक यहां रंगारंग कार्यक्रम, भंडारे, भोग इत्यादि का आयोजन करवाया जाता है. इसके साथ ही पूरे नियम अनुसार मां दुर्गा की पूजा की जाती है और दशमी के दिन विसर्जन किया जाता है.

मूर्ति बनाने के लिए बंगाल से बुलाया जाता है खास कारीगर

शंकर कुमार बताते हैं कि इस पंडाल को लगते हुए करीब 35 साल हो गए हैं. नवरात्र के पांचवें दिन से यहां मां दुर्गा की मूर्ती की स्थापना की जाती है. बंगाल से इन मूर्तियों को बनाने के लिए खास कारीगर बुलाए जाते हैं, जो इन मूर्तियों को बनाते हैं. वहीं सुबह शाम भव्य तरह से मां दुर्गा की पूजा की जाती है. जैसी बंगाल में होती आई है. वहीं शाम के समय रंगारंग कार्यक्रम का आयोजन करवाया जाता है, जिसमें अलग अलग स्कूलों के बच्चे भाग लेते हैं. साथ ही इन 6 दिनों में 2 दिन भंडारे का आयोजन करवाया जाता है. आस पास रह रहें सभी लोगों के सहयोग से ये सभी आयोजन करवाया जाता है. जिसके बाद दशमी के दिन मूर्तियों का विसर्जन किया जाता है, ये मूर्तियां ईको फ्रेंडली बनाई जाती हैं इसीलिए किसी भी तरह का नुकसान नहीं करती.

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