देहरादून में 76 साल से दशहरा मना रही बन्नू बिरादरी, पाकिस्तान से हुई थी शुरुआत
देहरादून. दशहरा (Dussehra 2024) का पर्व असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है. हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाया जाता है. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बन्नू बिरादरी कई दशकों से इस त्योहार पर भव्य आयोजन करवाती आ रही है. आज (शनिवार) दशहरे को खास तरीके से मनाने की तैयारियां चल रही हैं. बन्नू बिरादरी के अध्यक्ष हरीश विरमानी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि बिरादरी 76 साल से दशहरे को खासतौर पर मनाती है. यह हमारा 77वां दशहरा उत्सव है. बन्नू यानी बनवाल जाति के लोग पाकिस्तान की एक जगह है बन्नू, वहां रहते थे, तो हम दशहरा पर बहुत खुशियां मनाते थे.
उन्होंने कहा कि उनके पिता बन्नू बिरादरी के संरक्षक लक्ष्मण दास विरमानी भी पाकिस्तान के बन्नू के रहने वाले थे और वहां बन्नू में भी दशहरे का आयोजन करते थे. जब भारत-पाकिस्तान का विभाजन हुआ, तो वह देहरादून आकर बस गए और 1950 में उन्होंने ‘ऑल इंडिया बन्नू बिरादरी’ का गठन किया. देशभर के बनवालों को उन्होंने जोड़ा. हर साल विजयादशमी पर बन्नू बिरादरी देहरादून के परेड ग्राउंड में दशहरा उत्सव का आयोजन करवाती आ रही है लेकिन इस बार बन्नू मैदान में इसका आयोजन किया गया है. बन्नू मैदान में ही सारा कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जहां अलग ही तरह से लंका को तैयार किया गया है. इस बार किसी भी वीआईपी को नहीं बुलाया गया है ताकि त्योहार में पूरी तरह से आम नागरिक ही शामिल हो सकें.
रामायण के पात्रों में नजर आएंगे बन्नू स्कूल के बच्चे
हरीश विरमानी ने जानकारी दी कि किसी भी त्योहार को मनाने से पहले उसके मनाए जाने के पीछे की वजह जाननी जरूरी है. भगवान श्रीराम ने लंका के राजा रावण का वध किया था, इसलिए विजयादशमी मनाई जाती है. आज पूरी रामायण को नाटक के जरिए दर्शाया जाएगा. इस बार खास बात यह है कि बन्नू स्कूल के बच्चे ही इसमें महाभारत और रामायण के पात्रों में नजर आएंगे. उन्होंने कहा कि त्योहार बच्चों के लिए विशेष होते हैं, इसलिए उन्हें इसमें शामिल करना बहुत जरूरी है.
लक्ष्मण दास विरमानी की वजह से ही प्रिंस चौक को मिला था नाम
लक्ष्मण दास विरमानी की गिनती देहरादून के सेठों में होती थी. आजादी के बाद जब देहरादून शहरीकरण की ओर कदम बढ़ा रहा था, तब देहरादून में साल 1964 में लक्ष्मण दास विरमानी ने सुविधाओं से लैस एक होटल बनवाया, जिसका नाम प्रिंस होटल रखा. इसी होटल के नाम से चौक का नाम प्रिंस चौक पड़ गया. हालांकि साल 1990 में इस चौक का नाम बदलकर महाराजा अग्रसेन चौक रखा गया लेकिन आज भी लोगों की जुबान पर प्रिंस चौक ही रहता है. लक्ष्मण दास देहरादून नगरपालिका के 25 साल तक सभासद भी रहे थे.
Tags: Dehradun news, Dussehra Festival, Local18, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : October 12, 2024, 12:33 IST