पब्लिक फंड से चलती है यह लाइब्रेरी, यहां पढ़कर कई छात्रों ने संवारा भविष्य
कमल किशोर पिमोली/श्रीनगर गढ़वाल. ‘‘बेहतर जिंदगी का रास्ता बेहतर किताबों से होकर गुजरता है‘‘ श्रीनगर पब्लिक लाइब्रेरी के बोर्ड पर लिखी ये पंक्तियां बहुत कुछ बयां करती है. कहते हैं अगर आपके अंदर पढ़ने की ललक है तो आपको पढ़ाई के लिए कोई न कोई रास्ता मिल ही जाता है. शिक्षा का हब कहा जाने वाले श्रीनगर गढ़वाल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लेकर देश के अलग-अलग कोनों से भी छात्र यहॉ बढ़ने के लिए पहुंचते हैं, कई ऐसे छात्र भी होते हैं जो नगर क्षेत्र की कमर्सियल लाइब्रेरी में मोटी फीस नहीं दे पाते हैं, इन छात्रों के लिए श्रीनगर गढ़वाल में कुछ रिटार्यड शिक्षकों, प्रोफेसरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की पहल पर पब्लिक लाइब्रेरी का संचालन किया जा रहा है. यहां छात्र फ्री पढ़ाई कर सकते है.
पब्लिक लाइब्रेरी के संयोजक मुकेश सेमवाल बताते हैं कि 2015 में लाइब्रेरी की जरूरत महसूस करते हुए श्रीनगर गढ़वाल में पब्लिक लाइब्रेरी स्थापित की गई. पब्लिक लाइब्रेरी को स्थापित करने का उद्वेश्य गरीब और निर्धन छात्रों को, जो पढ़ना चाहते हैं उन्हें लाइब्रेरी उपलब्ध कराना था, जहॉ छात्र 24 घंटे बैठकर बिना किसी फीस के पढ़ाई कर सके. इसी उद्देश्य के साथ पब्लिक लाइब्रेरी का निर्माण हुआ. बताया कि जब तक पब्लिक लाइब्रेरी श्रीनगर बाजार में संचालित होती थी तब तक यह 24 घंटे खुली रहती थी, लेकिन अब अन्यत्र स्थान पर शिफ्ट होने के बाद इसे सुबह 7 बजे से रात 10 बजे तक खोला जाता है.
पब्लिक फंडिंग से चलती है लाइब्रेरी
मुकेश सेमवाल बताते हैं कि लाइब्रेरी को संचालित करने के लिए किसी तरह का कोई सरकारी योगदान उन्हें नहीं मिलता है. पब्लिक लाइब्रेरी जिस जगह खोली गई है उसका किराया पांच हजार के करीब है, इसके अलावा पुस्तकालय में किताबें भी लानी होती है, जिसका पूरा खर्चा पब्लिक फंडिंग से होता है. बताया कि कई ऐसे भी लोग है जो किताबों का सब्सक्रिप्शन भरते हैं और वें किताबे मैगजीन श्रीनगर पब्लिक लाइब्रेरी में पहुंचते हैं. श्रीनगर पब्लिक लाइब्रेरी में घंटों समय बिताने वाले कई छात्र आज सरकारी संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. वहीं, कई ऐसे भी छात्र हैं जो विभिन्न विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रोफेसर के पद पर तैनात हो चुके हैं. यहां प्रतिदिन 50 से अधिक छात्र पढ़ने के लिए पहुंचते हैं. लाइब्रेरी खोलने से लेकर बंद करने की पूरी जिम्मेदारी छात्रों की रहती है, वहीं, छात्र अपने सहयोग से यहं के लिए संसाधन भी जुटाते हैं.
इन्फ्रास्टकचर के लिए सरकार से की मांग
पब्लिक लाइब्रेरी का संचालन करने वालों का कहना है कि अगर सरकार उन्हें लाइब्रेरी संचालित करने के लिए जगह उपलब्ध करा दें तो वें और बेहतर तरीके से लाइब्रेरी को संचालित कर सकते हैं. नगर निगम में पहले एक लाइब्रेरी संचालित होती थी, उसके लिए एक हॉल भी है जो अब बंद पड़ा है, यहां पब्लिक लाइब्रेरी शिफ्ट करने को लेकर उनके द्वारा मांग भी की गई थी, लेकिन अभी तक इसपर कुछ भी कार्यवाही नहीं हो पाई है. अगर लाइब्रेरी यहां स्थानांतरित हो जाती है तो उन्हें काफी सहूलियत हो जायेंगी और जितना खर्चा वें लाइब्रेरी का किराया देने में करते हैं उसका वें किताबें खरीद सकते हैं.
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FIRST PUBLISHED : July 25, 2023, 16:30 IST