मां की तकलीफ से मिली प्रेरणा, पहाड़ के बच्चे ने बना दी कमाल की मशीन…अब जाएगा जापान
कमल पिमोली/ श्रीनगर गढ़वाल.कहते हैं प्रतिभा संसाधनों की मोहताज नहीं होती. अगर आपके अंदर ढृढ़ संकल्प व कुछ कर गुजरने की इच्छाशक्ति है, तो कुछ भी कठिन नहीं है. ऐसा ही कुछ कर दिखाया है, आठवीं कक्षा में पढ़ने वाले किशन चंद्र ने. छोटी सी उम्र में किशन द्वारा बनाई गई व्हीट एंड ग्रास कटर मशीन को इंस्पायर अवॉर्ड के तहत राष्ट्रीय स्तर पर चयनित किया गया है. यह मॉडल अब जापान में प्रदर्शित किया जाएगा. उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के श्रीकोट गढ़सारी गांव का किशन एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखता है. उसके पिता मनोज कुमार मजदूरी कर जीवनयापन करते हैं, तो वहीं माता लक्ष्मी देवी गृहिणी हैं. किशन इंटर कॉलेज ढामकेश्वर खिर्सू में कक्षा आठ का छात्र है. उसका सपना है कि वह बड़ा होकर वैज्ञानिक बने. किशन की इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय उनके मार्गदर्शक और शिक्षक आशीष रावत को जाता है.
मां की तकलीफ से मिली प्रेरणा
किशन ने कहा कि वह अपनी मां को खेत में गेहूं काटने के लिए बड़ी मेहनत करते हुए देखता था. उनकी तकलीफसे उसके दिमाग में आइडिया आया कि क्यों न इस तरह की एक मशीन बनाई जाए, जिससे यह काम आसान हो जाए. उसने बताया कि इसमें कटर मशीन के साथ अन्य उपकरण भी इंस्टाल किए गए हैं, जिससे कि गेहूं की बालियों को अलग और घास को अलग रूप में काटा जा सकता है. साथ ही खेत में काम करते वक्त धूप परेशान न करे, इसके लिए इसमें छाता भी माउंट किया गया है. किशन ने कहा कि उनके उपकरण को तैयार करने में शिक्षक आशीष रावत का विशेष योगदान रहा है.
जापान में करेंगे प्रतिभाग
आशीष रावत बताते हैं कि 2023 में इंस्पायर अवॉर्ड प्रतियोगिता में किशन के प्रोजेक्ट को जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर तक स्थान मिला. इसके बाद राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिता में भी उनके मॉडल व्हीट एंड ग्रास कटर मशीन को चयनित किया गया है. अब मई 2024 में जापान में इस प्रोजेक्ट को प्रदर्शित किया जाएगा. उन्होंने कहा कि उनका छात्र जापान जा रहा है, यह उनके लिए बेहद खुशी की बात है.
पेटेंट मिला तो किसानों को होगा फायदा
आशीष रावत बताते हैं कि इस मशीन को बनाने में काफी मेहनत लगी. एक साल में 5 से 6 बार प्रोजेक्ट को मॉडिफाई किया गया. वह कहते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है, अगर यह उपकरण पेटेंट होता है, तो इसका फायदा किसानों को मिल सकेगा. साथ ही यह हाथ से चलने वाली मशीन है, तो इसका खर्च भी ज्यादा नहीं है. वह कहते हैं कि शुरुआती दौर में उपकरण तैयार करने में काफी खर्च आया लेकिन अब यह सिर्फ 4 से 5 हजार रुपये में तैयार हो सकता है.
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FIRST PUBLISHED : February 2, 2024, 16:25 IST