माता-पिता को खोने वाली वनिशा ने हासिल किए 99 फीसदी नंबर, छोटा भाई बना प्रेरणा


कहते हैं जहां चाह, वहां राह. भोपाल की वनिशा पाठक के मांपिता जब कोरोना में नहीं रहे तो लोगों ने उससे सहानुभूति की और सोचा वो क्या दसवीं की परीक्षा दे पाएगी. लेकिन वनिशा ने ना केवल परीक्षा दी बल्कि शहर में सबसे ज्यादा नंबर लाकर टॉप किया.

वनिशा ने सीबीएसई की दसवीं की परीक्षा में 99.8 फीसदी नंबर हासिल किए हैं, दो और बच्चों के साथ वो शहर की टॉपर है. वनिशा ने सीबीएसई की दसवीं कक्षा की अंग्रेजी, संस्कृत, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान की परीक्षा में 100 और गणित में 97 नंबर हासिल किए.

खुशी के पल शेयर करने के लिए माता-पिता साथ नहीं
ये किसी भी छात्र के लिए एक अविश्वसनीय उपलब्धि है, लेकिन शायद 16 साल की उस बिटिया के लिए नहीं, जिसने दो महीने पहले कोरोना में अपने माता-पिता को खो दिया. वनिशा ने अपने माता-पिता से किया हुआ वादा पूरा कर दिया है लेकिन खुशी के इस पल को शेयर करने के लिए वे आज उसके साथ नहीं हैं.

किसे उम्मीद थी कि दो महीने पहले माता-पिता को खोने वाली वनिशा शहर की टॉपर बनेगी. कहती है कि छोटे भाई को देखकर संघर्ष करती रहीं. वनिशा ने कहा, ‘मेरे माता-पिता की याद ने मुझे स्पष्ट रूप से प्रेरित किया और मुझे जीवनभर प्रेरित करेगा. लेकिन वह भाई अभी प्रेरणा का सबसे बड़ा स्रोत है. मेरा छोटा भाई उसे देखकर लगता है कि उसके पास बस मैं हूं. उसके लिए एक उदाहरण देना था कि मुझे देखे और बोले कि दीदी जैसा करना है.

माता-पिता की आखिरी इच्छा पूरा करने की जिद
वनिशा के पिता जीतेंद्र कुमार पाठक एक वित्तीय सलाहकार थे और माता डॉ सीमा पाठक एक सरकारी स्कूल में शिक्षक थीं. वनिशा ने आखिरी बार दोनों को अस्पताल जाते देखा था. अस्पताल में वनिशा की मां का निधन 4 मई और पिता की मौत 15 मई को हुई थी. अब उनकी आखिरी इच्छा को पूरा करने की जिद है. वनिशा के भाई विवान कहते हैं, ‘मुझे 100 ही लाना है दीदी से भी ज्यादा, मुझे क्रिकेट बहुत अच्छा लगता है.’

वनिशा भाई के साथ अपने मामा डॉ अशोक कुमार के साथ रहती है, जो भोपाल के गवर्नमेंट एमवीएम कॉलेज में प्रोफेसर हैं. मामा डॉ अशोक कुमार कहते हैं, वनिशा फाइटर हैं. वनिशा की उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि जब उनके दोस्त परीक्षा की तैयारी कर रहे थे उस वक्त वो अपने माता-पिता को खोने के सदमे और दर्द से गुजर रही थीं.

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