यह आश्रम नहीं है स्वर्ग से कम, यहां पीएम मोदी भी करने वाले थे दौरा


हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़: उत्तराखंड की खूबसूरत वादियां लोगों को बहुत भाती है. पहाड़ों पर जाने के बाद हर कोई यहां बसने का प्लान बनाने लगता है. लोगों की सेवा के लिए 1936 में यहां एक आश्रम की भी शुरुआत हुई, जिसका नाम है नारायण आश्रम. यह पिथौरागढ़ जिले से 125 किलोमीटर दूर चौंदास वैली में है. इस खूबसूरत आश्रम की स्थापना नारायण स्वामी ने 1936 में की थी. यह उस समय का दौर है, जब यहां दूर-दूर तक न सड़क थी और ना ही अन्य मूलभूत सुविधाएं. ऐसी कठिन परिस्थितियों में बना यह आश्रम एक अद्भुत आर्किटेक्ट का उदाहरण है. पीएम मोदी (PM Modi) भी यहां जाने वाले थे, लेकिन बाद में प्लान रद्द हो गया था.

उत्तराखंड का नारायण आश्रम
नारायण स्वामी राजघराने से ताल्लुक रखते थे. आश्रम के केयर टेकर प्रदीप राणा ने जानकारी देते हुए बताया की अपनी कैलाश यात्रा के दौरान नारायण स्वामी ने पहाड़ के लोगों की दुर्दशा सुधारने के लिए यहां आश्रम की स्थापना की. उन्होंने बताया कि नारायण स्वामी राजघराने से ताल्लुक रखते थे और पेशे से सिविल इंजीनियर थे. समाज सेवा में दिया विशेष योगदान समाजसेवा की भावना से उन्होंने यहां स्थानीय लोगों के सहयोग से आश्रम खोला. यहां के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य लाभ और रोजगार देने को पहल शुरू हुई.

आध्यात्मिक और सामाजिक शैक्षिक केंद्र
नारायण आश्रम की स्थापना वर्ष 1936 में नारायण स्वामी ने पिथौरागढ़ से लगभग 136 किलोमीटर और तवाघाट से 14 किलोमीटर दूर की थी. यह आध्यात्मिक और सामाजिक शैक्षिक केंद्र 2734 मीटर की ऊंचाई पर प्राकृतिक परिवेश के बीच स्थापित है. इसमें स्थानीय बच्चों के लिए एक स्कूल है और स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान कराया जाता है. यहां एक पुस्तकालय, ध्यान कक्ष और समाधि स्थान भी है.

होता है स्वर्ग का एहसास
नारायण आश्रम कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश के यात्रियों के लिए एक अहम पड़ाव भी है. नारायण आश्रम का वातावरण और प्रकृति की सुंदरता एक अनूठा संगम है, जो यहां ध्यान, योग, साधना के लिए सबसे उपयुक्त स्थल है. यह पंचाचूली पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा हुआ है, आश्रम के हर कोने में फूलों का संसार और सेब के बगीचे यहां स्वर्ग जैसा एहसास कराते हैं. किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए आप 7454912340 नंबर पर संपर्क कर सकते हैं.

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