“सपने अभी तक अधूरे…,” उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वालों का छलका दर्द, स्थापना दिवस आज
Last Updated:
Uttrakhand sthapna diwas 2025 : यूपी से अलग होकर उत्तराखंड राज्य को बने लंबा अरसा बीत चुका है. आज उत्तराखंड स्थापना दिवस है, जो हर साल 9 सितंबर को मनाया जाता है. क्या जिस सपनों और उम्मीदों के साथ अलग राज्य बना था, वो पूरा हुआ? अलग राज्य के लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले कई आंदोलनकारी दुनिया छोड़कर जा चुके हैं, जो हैं उनसे लोकल 18 ने बात की.
हरिद्वार. उत्तराखंड देश का 27वां राज्य है, जो 9 नवंबर 2000 को बना था. कई आंदोलन के बाद उत्तर प्रदेश से अलग होकर यह राज्य बना. उत्तराखंड बनने में कई लोगों की जान गई, जिसका प्रमाण इन मामलों की न्यायिक जांच और कोर्ट में चले मुकदमें हैं. राज्य को बनाने में हुए आंदोलन में बच्चों, बड़ों और महिलाओं की शहादत हुई. उत्तराखंड में हर साल 9 नवंबर को राज्य स्थापना दिवस प्रदेश के सभी जिलों में मनाया जाता है. हरिद्वार में भी कई आंदोलनकारी ने राज्य बनाने के लिए आंदोलन किया था. उत्तराखंड राज्य को बने 25 साल पूरे होने वाले हैं. कई आंदोलनकारी दुनिया छोड़कर जा चुके हैं, जो हैं उनसे आंखों देखा जानते हैं.
याद करके सहम जाते हैं
उत्तराखंड बनाने में जिन लोगों का अहम योगदान रहा है उनमें से कुछ लोग आज भी आंदोलन के वह दृश्य सोच कर सहम जाते हैं. हरिद्वार के आंदोलनकारी सतीश जोशी आज भी गोली कांड, लाठी चार्ज, रामपुर तिराहा आदि की घटनाओं को याद करते हैं. उत्तराखंड संयुक्त संघर्ष समिति के हरिद्वार जिला मुख्य संयोजक और उत्तराखंड क्रांति दल के केंद्रीय संगठन मंत्री सतीश जोशी के सामने रामपुर तिराहा, मंसूरी और खटीमा की घटनाएं हुई थीं. इन सभी घटनाओं को लेकर लोकल 18 ने आंदोलनकारी सतीश जोशी से बातचीत की.
सरकार को तभी आती है याद
सतीश जोशी मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा की घटना को लेकर बताते हैं कि वह उत्तराखंड राज्य की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे थे. शांतिपूर्ण आंदोलन के लिए हरिद्वार से 12 बसें लेकर दिल्ली के लिए जा रहे थे. सभी बसों को मुजफ्फरनगर रामपुर तिराहा के पास रोक गया था जहां कई लोगों की शहादत हुई. इस आंदोलन में स्कूल पढ़ने वाले बच्चे, महिलाएं, युवक और लोगों ने भी अपनी शहादत दी, लेकिन जिन सपनों को लेकर उत्तराखंड की स्थापना की गई थी वह आज भी पूरे नहीं हुए. स्थापना दिवस आते ही सरकार को आंदोलनकारियों की याद आती है.
आज भी अधूरे
सतीश जोशी बताते हैं कि इस आंदोलन में खटीमा और मंसूरी में महिलाओं को 3 नॉट 3 की गोली मारी गई. रामपुर तिराहा की घटना में उनकी बगल में एसएस रावत को भी गोली लगी थी जो कमर से होते हुए बेल्ट में फंस गई थी. सतीश के अनुसार, आंदोलनकारियों ने नई राज्य की मांग इसलिए उठाई ताकि यहां के लोगों का विकास हो, लेकिन आज केवल बाहरी लोगों का ही विकास हो रहा है. जिन सपनों को लेकर इस राज्य की स्थापना हुई, वह आज भी अधूरे हैं.
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें
Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu… और पढ़ें