Hariyali Teej 2021 Date: हरियाली तीज व्रत कब है ? जानें शुभ मुहूर्त और हरे रंग का महत्‍व


जानें हरियाली तीज का महत्‍व

 

हरियाली तीज का पावन व्रत करवा चौथ के व्रत से भी ज्यादा मुश्किल होता है। इस व्रत में पत्नियां अपने पति की लंबी उम्र के लिए उपवास रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव व माता पार्वती की पूजा करने एवं व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वर मिलता है। घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। पति के निरोगी रहने का आशीर्वाद भी प्राप्त होने की मान्यता है.

ये है हरियाली तीज की पूजन सामग्री.


बेल पत्र,

केले के पत्ते,

धतूरा,

अंकव पेड़ के पत्ते,

तुलसी,

शमी के पत्ते,

काले रंग की गीली मिट्टी,

जनैऊ,

धागा और नए वस्त्र।

यह है पार्वती जी के श्रृंगार की जरूरी सामग्री

चूडियां, महौर, खोल, सिंदूर, बिछुआ, मेहंदी, सुहाग चूड़ा, कुमकुम, कंघी, सुहागिन के श्रृंगार की चीज़ें। इसके अलावा श्रीफल, कलश, अबीर, चंदन, तेल और घी, कपूर, दही, चीनी, शहद ,दूध और पंचामृत आदि।

हरियाली तीज पूजन विधि

  •  तीज के दिन महिलाएं सुबह से रात तक व्रत रखती हैं। इस व्रत में पूजन रात भर किया जाता है
  • इस उपलक्ष्य में बालू के भगवान शंकर व माता पार्वती की मूर्ति बनाकर पूजन किया जाता है. 
  •  एक चौकी पर शुद्ध मिट्टी में गंगाजल मिलाकर शिवलिंग, रिद्धि-सिद्धि सहित गणेश, पार्वती एवं उनकी सहेली की प्रतिमा बनाई जाती है.
  •  प्रतिमा बनाते समय भगवान का स्मरण करते रहें और पूजा करते रहें.
  • पूजन-पाठ के बाद महिलाएं रात भर भजन-कीर्तन करती है.
  • हर प्रहर को इनकी पूजा करते हुए बिल्व-पत्र, आम के पत्ते, चंपक के पत्ते एवं केवड़ा अर्पण करने चाहिए और आरती करनी चाहिए.

अगर साथ में इन मंत्रों को बोलना चाहिए. बनी रहे मां पार्वती का आशीर्वाद.

ॐ उमायै नम:,

ॐ पार्वत्यै नम:,

ॐ जगद्धात्र्यै नम:,

ॐ जगत्प्रतिष्ठायै नम:,

ॐ शांतिरूपिण्यै नम:,

ॐ शिवायै नम:

भगवान शिव की आराधना इन मंत्रों से करनी चाहिए.

ॐ हराय नम:,

ॐ महेश्वराय नम:,

ॐ शंभवे नम:,

ॐ शूलपाणये नम:,

ॐ पिनाकवृषे नम:,

ॐ शिवाय नम:,

ॐ पशुपतये नम:,

ॐ महादेवाय नम:

हरियाली तीज 2021 पूजन के शुभ मुहूर्त

हरियाली तीज व्रत रखने की तारीख- बुधवार, 11 अगस्त 2021

राहुकाल- बुधवार- दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक। (राहुकाल में पूजा नहीं करनी चाहिए)

श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि मंगलवार, 10 अगस्त को शाम 06.11 मिनट से शुरू होगी और 11 अगस्त 2021, बुधवार को शाम 04.56 मिनट पर समाप्त होगी।

अमृत काल- सुबह 01:52 से 03:26 तक

ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:29 से 17 तक

विजय मुहूर्त- दोपहर 14 से 03.07 तक

गोधूलि बेला- शाम 23 से 06.47 तक

निशिता काल- रात 14 से 12 अगस्त सुबह 12:25 तक

रवि योग- 12 अगस्त सुबह 09:32 से 05:30 तक।

हरियाली तीज महत्व

मान्यता है कि इस दिन माता शिव और माता पार्वती की पूजा करने व व्रत रखने से अखंड सौभाग्य का वर मिलता है घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है. पति के निरोगी रहने का आशीर्वाद भी प्राप्त होने की मान्यता है.

हरे रंग का महत्व


हरियाली तीज में हरी चूड़ियां, हरे वस्त्र पहनने, सोलह शृंगार करने और मेहंदी रचाने का विशेष महत्व है। इस त्यौहार पर विवाह के पश्चात पहला सावन आने पर नवविवाहित लड़कियों को ससुराल से मायके बुला लिया जाता है. लोकमान्य परंपरा के अनुसार नव विवाहिता लड़की के ससुराल से इस त्यौहार पर सिंजारा भेजा जाता है जिसमें वस्त्र,आभूषण, श्रृंगार का सामान, मेहंदी, घेवर-फैनी और मिठाई इत्यादि सामान भेजा जाता है. इस दिन महिलाएं मिट्टी या बालू से मां पार्वती और शिवलिंग बनाकर उनकी पूजा करती हैं. पूजन में सुहाग की सभी सामिग्री को एकत्रित कर थाली में सजाकर माता पार्वती को चढ़ाना चाहिए.

 



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