Pakistan Elections: पाकिस्तान के युवाओं ने जेल में बंद इमरान खान की पार्टी PTI को क्यों दिया वोट?

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 336 सीटें हैं. इनमें से 265 सीटों पर चुनाव हुए. एक सीट पर चुनाव टाल दिए गए हैं. 60 सीटें महिलाओं के लिए और 10 सीटें अल्पसंख्यकों के लिए रिजर्व हैं. सरकार बनाने के लिए 134 सीटों पर बहुमत होना जरूरी है. न्यूज एजेंसी ‘रॉयटर्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के युवा वोटर्स का वोट इमरान खान की पार्टी के लिए जाता दिख रहा है. ऐसे में युवा वोटर्स में जश्न का माहौल है. सवाल ये है कि युवा वोटर्स आखिर जेल में बंद इमरान खान की पार्टी के लिए वोट क्यों कर रहे हैं?

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इस बीच पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शुक्रवार को जनादेश मिलने का ऐलान किया. उन्होंने कहा, “PML-N सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हम गठबंधन सरकार बनाने के लिए अन्य समूहों से बात करेंगे.”

वोटों की गिनती में हो रही असामान्य देरी के कारण फाइनल नतीजे अभी साफ नहीं हो पाए हैं. 1600 GMT (शाम 4 बजे) की गिनती तक PTI समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों ने 92 सीटों पर जीत हासिल कर ली थी. इमरान खान के जेल में होने, पार्टी का नाम और सिंबल कैंसिल होने के बीच निर्दलीय उम्मीदवारों से उम्मीद से कहीं बेहतर प्रदर्शन किया. इससे PML-N और PPP भी हैरान है.

2022 में सत्ता से बेदखल कर दिए गए थे इमरान खान

इमरान खान को 2022 में सत्ता से बेदखल कर दिया गया था. उनपर भ्रष्टाचार के कई मामले हैं. बीते साल अगस्त में उन्हें जेल में डाल दिया गया. इसके साथ ही इमरान खान के चुनाव लड़ने पर कई साल का बैन लगाया गया है.

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चुनाव के विश्लेषकों के मुताबिक, PTI का मजबूत प्रदर्शन एक संभावित विरोध तत्व और इमरान खान के समर्थन के लचीलेपन का संकेत देता है. दूसरी पार्टियों को डर है कि अगर निर्दलीय अपने दम पर सरकार नहीं बना सके, तो उनकी बड़ी संख्या पाकिस्तान को और अधिक अस्थिर बना सकती है.

मोबाइल इंटरनेट सर्विस सस्पेंड होने से हुआ नुकसान

PTI समर्थकों ने कहा कि चुनाव के दौरान और उसके बाद मोबाइल इंटरनेट सर्विस सस्पेंड होने का कुछ तो नुकसान हुआ है. दरअसल, PTI अपनी सोशल मीडिया मौजूदगी पर बहुत ज्यादा निर्भर करती है, जिसमें ऑटोमेटेड सोशल मीडिया रेस्पॉन्स भी शामिल हैं. ये ऑटोमेटेड सोशल मीडिया रेस्पॉन्स पाकिस्तानी नागरिकों को उनके पोलिंग बूथ और PTI समर्थित उम्मीदवारों को ढूंढने में मदद करती हैं.

विल्सन सेंटर में साउथ एशिया इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर माइकल कुगेलमैन ने कहा, “PTI निश्चित रूप से पाकिस्तान की राजनीति में रहने के लिए है. बेशक इसे खोखला कर दिया गया है और इसके आकार में कटौती की गई है. लेकिन … इसका सपोर्ट बेस बड़ा है और वफादार भी. जेल की कोठरी से भी इमरान खान एक ताकतवर ताकत बने हुए हैं.”

PTI के युवा और स्थायी समर्थक

माइकल कुगेलमैन ने कहा, “वह सपोर्ट बेस युवा वोटर्स हैं, जो शक्तिशाली सेना जनरलों के साथ मतभेदों के बावजूद सैन्य समर्थित कार्रवाई से जूझ रहे हैं.” PTI का आरोप है कि गुरुवार को वोटिंग से पहले कार्रवाई तेज हो गई. हालांकि पाकिस्तानी सेना ने इन आरोपों से इनकार किया है.

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सैन्य भागीदारी ने युवाओं को प्रेरित किया

दूसरी ओर, कुछ विश्लेषकों और मतदाताओं ने कहा है कि राजनीति में सैन्य भागीदारी की सार्वजनिक धारणा ने इमरान खान के समर्थकों को चुनावों में प्रेरित किया है. साथ ही महीनों की बढ़ती महंगाई और इमरान खान को जेल भेजने का आक्रोश भी युवाओं में देखा जा रहा है. 

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के ब्लावाटनिक स्कूल ऑफ गवर्नमेंट में एसोसिएट प्रोफेसर माया ट्यूडर ने कहा, “पाक सेना के चिंतित होने का एक कारण यह है कि कुछ वास्तविक जमीनी समर्थन के संकेत मिल रहे हैं.” उन्होंने चुनाव के दिन मोबाइल सर्विस को सस्पेंड करने के कदम का जिक्र करते हुए कहा, “अधिकारियों ने लोगों को आश्वस्त किया था कि कोई भी कम्युनिकेशन फेल्योर नहीं होगा, लेकिन ऐसा हुआ; जो चिंता का एक संभावित संकेत था.”

युवाओं को उम्मीद- चीजें बदलेंगी

लॉ स्टूडेंट नैला खान मारवत ने कहा, “मैं 2016 में PTI में शामिल हुई. 2018 में इसके लिए अपना पहला वोट डाला.” नैला कहती हैं, “मुझे और मेरे साथियों को इमरान खान के शब्दों ने काफी उत्साहित किया.” उन्होंने कहा, “क्या आपने अन्य महान नेताओं को नहीं देखा है? जैसे नेल्सन मंडेला? … ऐसे कई महान नेता हैं जो जेल में हैं और वे बहुत दर्द झेल रहे हैं…लेकिन चीज़ें बदल जाती हैं.”

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पाकिस्तान के चुनाव लंबे समय से धांधली और राजनीतिक हस्तियों को जेल में डाले जाने के आरोपों से घिरे रहे हैं. विश्लेषकों और समर्थकों का कहना है कि PTI का प्रतिक्रियाशील अभियान डेमोग्राफी (जनसांख्यिकी) से परे है.

अपने सेलिब्रिटी प्लेयर पर्सनैलिटी और सोशल मीडिया प्रेजेंस के साथ PTI पाकिस्तान की विशाल युवा आबादी के बीच लोकप्रिय है, जो हर चुनाव चक्र में बढ़ रही है. पाकिस्तान के अखबार ‘डॉन’ का अनुमान है कि पाकिस्तान में 2018 के चुनाव के बाद से 10 मिलियन युवा वोटर्स जुड़े हैं.

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