दीया में सैन्य अनुशासन, स्कूल में चित्रकारी से प्रेम था हमेशा दूसरों की मदद के लिए रहती हैं तैयार : पद्मिनी

जयपुर। राजस्थान की डिप्टी सीएम दिया कुमारी की माता और जयपुर के पूर्व राजघराने की राजमाता पद्मिनी देवी दिया के बचपन के अनुभव सुनाते हुए कहती हैं कि वह हमेशा से ही बहुत सहज और सरल स्वभाव की है, लेकिन एक बार जब लक्ष्य तय कर लेती है तो पूरी दृढ़ता से उसे प्राप्त करने के लिए मेहनत करती है। वो एक सैनिक की बेटी है और सैन्य अनुशासन उनमें कूट-कूट कर भरा है। जब वे छोटी थी तब उनके पिता ब्रिगेडियर महाराजा सवाई भवानी सिंह एक सैनिक के रूप में देश सेवा में समर्पित थे और जहां उनकी पोस्टिंग होती थी, हम लोग भी उनके साथ सैन्य आवासों में निवास करते थे। सैन्य आवासों के अपने नियम होते हैं और उस अनुशासित दायरे में रह कर, उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। देश सेवा में नि:स्वार्थ भाव से तत्पर रहना उन्होंने अपने पिता से सीखा है, जो उनके आदर्श भी है।

चित्रकारी उनकी विशेष पसंद
पद्मिनी देवी ने बताया कि समाज सेवा, प्रकृति प्रेम और वैदिक परंपराओं के प्रति उनका लगाव बचपन से ही रहा है। स्कूल के दिनों में पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने अनेक प्रकार की कलाओं को सीखने का भी प्रयास किया, इनमें चित्रकारी उनकी विशेष पसंद थी। वे अपने स्कूल के दिनों में प्रकृति चित्रण किया करती थी, मेरे विचार में एक कुशल चित्रकार थी। अपने साथियों और मित्रों की मदद करना उनका स्वभाव है। बचपन में कई बार मुझे जानकारी दिए बिना ही अपने मित्रों की उनकी जरुरत में मदद कर दिया करती थी।  

बचपन में ही राजघराने की परंपराओं, प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं से रूबरू
दीयाकुमारी बचपन से ही राज घराने की परंपराओं, प्रोटोकॉल और व्यवस्थाओं से रूबरू कराया गया। वर्ष भर आने वाले तीज-त्योहारों के मौकों पर राजपरिवार के अपने प्रोटोकॉल होते है। किस त्योहार पर क्या पहनना है, किस तरह से पूजन किया जाए, किन परंपराओं का पालन किया जाएगा, ये सब पुरातन काल से ही वैदिक परंपराओं के आधार पर तय होता है। मुझे गर्व है कि राजपरिवार के सदस्य के रूप में आज वे सभी पंरपराओं का भलीभांति निर्वहन कर रहीं है। 

महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित
एक महिला होने के नाते दीया कुमार महिला सशक्तिकरण के लिए समर्पित है। उनमें यह जज्बा है कि महिलाएं जीवन के सभी क्षेत्रों में तरक्की करे। आज जब मैं उन्हें इस मुकाम पर देखती हूं तो मुझे बहुत ख़ुशी होती है। मेरा आशीर्वाद उनके साथ है कि वो सदा तरक्की करें। वे राष्टÑहित और धार्मिक मूल्यों का केन्द्र में रखते हुए जनप्रतिनिधि के रूप में भी अपने सार्वजनिक जीवन में जनकल्याण के कार्य करे यही मेरी कामना है।