बाजरे की रोटी-काचरे की सब्जी…उत्तराखंड के अधिकारियों को भाया राजस्थान का लजीज खाना


रिपोर्ट-मनमोहन सेजू

बाड़मेर. जिला मुख्यालय के डाइट में शनिवार को बाड़मेरी बाजरे की रोटी, काचरे की सब्जी, लहसुन की चटनी और चूरमे का स्वाद उत्तराखण्ड के शिक्षा विभाग के अधिकारियों के ऐसे जुबां चढ़ा कि हर कोई अंगुलियां चाटते रह गए. 31 सदस्यों के दल ने यहां की शिक्षा व्यवस्था को भी बखूबी जाना और यहां के देशी जीमण का आनंद लिया.

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राजस्थानी व्यंजनों का आनन्द लेते उत्तराखण्ड शिक्षा विभाग के अधिकारी.

सरहदी बाड़मेर की शिक्षा व्यवस्थाओं और प्राकृतिक चुनौतियों के बाद भी हर बच्चे तक पहुंच रही शिक्षा की व्यवस्थाओं को जानने के लिए उत्तराखंड से शिक्षा विभाग का दल बाड़मेर पहुंचा था. 31 सदस्यों के दल में उत्तराखंड राज्य के शिक्षा निदेशक और एनसीईआरटी के निदेशक, विभिन्न संस्थानों के उप निदेशक, खंड शिक्षा अधिकारी व उपखंड शिक्षा अधिकारी शामिल रहे. इनके भ्रमण के आखिरी दिन इनका राजस्थानी व्यंजनों से आवभगत किया गया.

डाइट परिसर में बनाए गए खास दफ़्तरखाने के मेज़बान अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के कार्यकर्ता रहे. देशी जीमण के आयोजन को लेकर उत्तराखंड के अधिकारियों में उत्साह देखने को मिला. खंड शिक्षा अधिकारी कमलेश्वरी मेहता का कहना है कि यहां का देशी जीमण खाकर बहुत ही अच्छा लगा है. यहां के बाजरे की रोटी, राबड़ी, चूरमा काचरे की सब्जी बहुत ही लजीज है.

शिक्षा को लेकर बाड़मेर में बदलाव और नवाचारों को लेकर जिले में हो रहे कार्यों से रूबरू होने के बाद विदाई के रूप में मिली राजस्थानी भोज को लेकर हर कोई रोमांचित नजर आया. उत्तराखंड उप शिक्षा अधिकारी कैना चौहान का कहना है कि बाड़मेर के देशी जीमण की कायल हो गई है. यहां के खाने के साथ साथ यहां के लोगों द्वारा की गई आवभगत से दिल गदगद हो गया है. उन्होंने बताया कि यहां के देशी जीमण को लेकर जो व्यंजन बनाए गए थे, वह बहुत ही स्वादिष्ट थे.

एक तरफ जहां हर किसी को राजस्थानी व्यंजनों की खासियत रास आई. वहीं दूसरी तरफ कईयों को अपनी जमीन से राजस्थानी व्यंजन मिलते जुलते नजर आए. एनसीईआरटी उत्तराखंड के उपनिदेशक शैलेन्द्र अमोली का कहना है कि देवभूमि और मरु भूमि में कई समानताएं हैं, यही वजह है कि यहां के खाने में अपनापन और लजीज स्वाद आज भी कायम है.

बाड़मेर में आए उत्तराखंड के अधिकारियों के दल में उत्तराखंड शिक्षा प्रारंभिक निदेशक वंदना गब्यली, संयुक्त निदेशक एसआईईआरटी कंचन देवराड़ी कुमार गुसाईं ,नरवीरसिंह बिष्ट उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा, मदन मोहन जोशी उपनिदेशक समग्र शिक्षा उत्तराखंड, डॉ. मोहनसिंह बिष्ट सीमेट उत्तराखंड, अंबरीश बिष्ट अजीम प्रेमजी फाउंडेशन उत्तराखंड, पुष्कर लाल, योगेंद्र नेगी, विनोद ध्यानी, विनय कुमार आर्य, भानु प्रताप भास्कर, आनंद पांडे, रणजीत सिंह नेगी, वंदना रौतेला, डॉ. गुंजन अमरोही, सुषमा गौरव, प्रेमा बिष्ट, कैना चौहान, कमलेश्वर मेहता, संजीव कुमार, डॉ. रवि मेहता, हरेंद्र शाह, दिगंबर लाल आर्य, डॉ. मोहन सिंह बिष्ट, दीपा रानी, तरुण कुमार पंत शामिल रहे.

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