अब ‘नी हाओ’ बोलेगा उत्तराखंड! सरकारी स्कूलों में मंदारिन की पढ़ाई कर रहे छात्र


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Mandarin In Uttarakhand Govt Schools: उत्तराखंड के 15 सरकारी स्कूलों में 290 से अधिक छात्र अब मंदारिन भाषा सीख रहे हैं. यह पहल दून विश्वविद्यालय ने 2021 में शुरू की थी, जिसका उद्देश्य युवाओं को वैश्विक करियर अव…और पढ़ें

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पौड़ी के 15 पीएम श्री सरकारी स्कूलों में मंदारिन की पढ़ाई

हाइलाइट्स

  • उत्तराखंड के 15 सरकारी स्कूलों में मंदारिन पढ़ाई जा रही है.
  • मंदारिन सीखने से छात्रों को वैश्विक करियर अवसर मिल सकते हैं.
  • मंदारिन जानने वाले विशेषज्ञों की राष्ट्रीय सुरक्षा में भारी मांग है.

देहरादून : क्या आप सोच सकते हैं कि उत्तराखंड के सरकारी स्कूलों में छात्र अब ‘नी हाओ’ कहकर एक-दूसरे का अभिवादन कर रहे हैं! जी हां, 15 सरकारी स्कूलों के 290 से अधिक छात्र अब चीन की आधिकारिक भाषा मंदारिन (mandarin) सीख रहे हैं. यह सब मुमकिन हुआ है दून विश्वविद्यालय की पहल से, जिसका मकसद युवाओं को वैश्विक करियर अवसरों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से तैयार करना है.

इस ऐतिहासिक पहल की नींव 2021 में पड़ी, जब तत्कालीन सीडीएस जनरल बिपिन रावत और दून विश्वविद्यालय की उप कुलपति सुरेखा डंगवाल के बीच इस विषय पर चर्चा हुई. इसके बाद, 2023 में पौड़ी गढ़वाल के डीएम आशीष चौहान ने इसे साकार किया और मंदारिन को उत्तराखंड के स्कूलों में पढ़ाने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ. जिसके बाद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (DIET), चारिगांव पौड़ी, समन्वयक नारायण प्रसाद उनियाल और विश्वविद्यालय की कुलपति सुरेखा डंगवाल ने काम को आगे बढ़ाया.

पौड़ी गढ़वाल में शुरू हुआ पायलट प्रोजेक्ट
दून विश्वविद्यालय के चीनी अध्ययन विभाग के प्रमुख शंकी चंद्रा का कहना है कि यह पहली बार है जब भारत के किसी सरकारी स्कूल में मंदारिन को औपचारिक रूप से पढ़ाया जा रहा है. यह कोर्स फिलहाल 2024 से पौड़ी जिले के 15 प्रधानमंत्री श्री (PM SHRI) स्कूलों में कक्षा 11वीं के छात्रों के लिए ऑनलाइन संचालित की जा रही है, क्योंकि अभी भौतिक कक्षाओं के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध नहीं हैं.

मंदारिन भाषा से खुलेंगे करियर के नए दरवाजे
मंदारिन सीखना आसान नहीं है. इसमें 50,000 से ज्यादा कैरेक्टर्स होते हैं और सामान्य बातचीत के लिए 3,000 से 5,000 कैरेक्टर्स सीखने की जरूरत होती है. लेकिन इस चुनौती को पार करने पर छात्रों को बड़े रोजगार अवसर मिल सकते हैं. शंकी चंद्रा ने बताया कि पिछले साल इस प्रोग्राम से जुड़े तीन छात्रों को सिर्फ मंदारिन के दम पर चीन में शानदार नौकरियां मिलीं. इसके अलावा, छात्रों के लिए विदेश मंत्रालय, रक्षा संगठनों और निजी कंपनियों में दुभाषिए और अनुवादक के रूप में नौकरी के बेहतरीन मौके हैं.

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी वरदान
दून विश्वविद्यालय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर के अनुसार, भारत-चीन सीमा विवादों के बीच मंदारिन जानने वाले विशेषज्ञों की भारी मांग है. ये छात्र भविष्य में इस जरूरत को पूरा कर सकते हैं. दून विश्वविद्यालय की उप कुलपति सुरेखा डंगवाल ने कहा, हम छात्रों को विदेशी भाषाओं में दक्ष बनाने के लिए पूरी मेहनत कर रहे हैं. यह पहल और बड़े स्तर पर लागू की जा सकती है. मंदारिन सिर्फ एक भाषा नहीं, बल्कि करियर का नया दरवाजा है. उत्तराखंड के छात्रों के लिए यह पहल नौकरी और राष्ट्रीय सुरक्षा, दोनों में मजबूत भूमिका निभाने का अवसर लेकर आई है.

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