अल्मोड़ा के इस कॉलेज में 17 सालों से ‘प्रिंसिपल की तलाश’ बनी पहेली!
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Almora Latest News: अल्मोड़ा के होटल मैनेजमेंट संस्थान में 17 साल से प्रिंसिपल की कुर्सी खाली है. 2008 से प्रिंसिपल की तैनाती नहीं हुई है. फिलहाल, सीडीओ कार्यभार संभाल रहे हैं. शिक्षक संविदा पर काम कर रहे हैं.
अल्मोड़ा के होटल मैनेजमेंट में प्रिंसिपल की खाली कुर्सी.
हाइलाइट्स
- अल्मोड़ा होटल मैनेजमेंट संस्थान में 17 साल से प्रिंसिपल नहीं है.
- संस्थान का कार्यभार फिलहाल सीडीओ संभाल रहे हैं.
- अधिकांश शिक्षक संविदा पर काम कर रहे हैं.
अल्मोड़ा: उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के होटल मैनेजमेंट संस्थान में पिछले 17 सालों से प्रिंसिपल की कुर्सी खाली है. उत्तराखंड में केवल दो सरकारी होटल मैनेजमेंट संस्थान हैं, जिनमें से एक देहरादून में है और दूसरा अल्मोड़ा में. अल्मोड़ा का यह संस्थान आज भी प्रिंसिपल के इंतजार में है. फिलहाल, इस कॉलेज का कार्यभार जिला विकास अधिकारी (सीडीओ) के पास है, जो इसे चला रहे हैं.
बता दें कि अल्मोड़ा के जगत सिंह बिष्ट राजकीय होटल मैनेजमेंट संस्थान की स्थापना 1991 में हुई थी. इस संस्थान से पढ़ाई करने वाले कई छात्र-छात्राएं भारत के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ दुबई, कतर, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मालदीव जैसे देशों में नौकरी कर अच्छे वेतन पर काम कर रहे हैं.
2008 से नहीं हुई है तैनाती
होटल मैनेजमेंट के शिक्षक धीरेंद्र मत्तोलिया ने बताया कि उनके संस्थान में लंबे समय से प्रिंसिपल की कमी है. यहां 2008 तक प्रिंसिपल कार्यरत थे, उसके बाद से प्रशासनिक अधिकारी कार्यभार संभाल रहे हैं. इससे संस्थान को कुछ फायदे भी हुए हैं और कुछ नुकसान भी. पहले यहां एसडीएम के पास कार्यभार होता था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी सीडीओ के पास है. उन्होंने आगे बताया कि संस्थान में टीचरों की भी कमी है.
संविदा में तैनात है शिक्षक
अधिकांश शिक्षक संविदा पर काम कर रहे हैं, जिनमें से कुछ का अनुभव 10 साल और कुछ का 15 साल से भी ज्यादा है. सभी शिक्षक बच्चों को पूरी मेहनत और लगन से पढ़ा रहे हैं, इसी वजह से संस्थान अब तक संचालित हो रहा है. हालांकि, अभी भी दो शिक्षक पद खाली हैं, जिससे अन्य शिक्षकों पर कार्यभार बढ़ जाता है.
धीरेंद्र मत्तोलिया ने बताया कि वे समय-समय पर सरकार और प्रशासन को पत्र भेजते रहते हैं, जिसमें टीचरों की नियुक्ति के साथ-साथ प्रिंसिपल की जल्द नियुक्ति की भी मांग की जाती है. उनका मानना है कि अगर यहां स्थायी प्रिंसिपल नियुक्त हो जाएं तो संस्थान और बेहतर तरीके से काम करेगा और इससे ज्यादा बच्चे यहां आकर पढ़ाई कर पाएंगे.