अल्मोड़ा के दिव्यांग बच्चे हैं हुनरमंद, देखिए किन-किन चीजों में है एक्सपर्ट


रोहित भट्ट/अल्मोड़ा. कहा जाता है बच्चों में भगवान का रूप होता है पर कुछ बच्चे ऐसे भी होते हैं जो किसी परिस्थिति के कारण से दिव्यांग होते हैं पर इन बच्चों में कुछ न कुछ कला देखने को मिलती है. अल्मोड़ा के खत्याड़ी में दिव्यांग बच्चों के लिए एक ऐसा ही स्कूल है जिसमें बच्चों को उनसे संबंधित पढ़ाई के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक कार्य भी सिखाया जाता है. इन बच्चों को देखकर आप यह नहीं कह सकते कि ये इन बच्चों के द्वारा बनाया गया है.

अल्मोड़ा के मंगलदीप विद्या मंदिर की स्थापना मनोरमा जोशी के द्वारा की गई थी साल 1988 में उन्होंने दिव्यांग बच्चों के लिए यहां पर स्कूल खुला हुआ है. वर्तमान में 33 बच्चे यहां पर है उनके अनुसार उन्हें पढ़ाई और व्यावसायिक कार्य सिखाए जाते हैं जिसमें हैंडलूम, कैंडल, मसले, हर्बल कलर, शगुन के लिफाफे, कैरी बैग, सिलाई, चॉकलेट और आदि क्राफ्ट वर्क यहां पर कराया जाता है और बच्चे अलग-अलग कार्यों में बेहतर कार्य करते हैं. यहां के बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ म्यूजिक और खेलकूद में आगे हैं. इसके अलावा मंगलदीप विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य और टीचर इन दिव्यांग बच्चों के साथ रहकर उन्हें कुछ न कुछ नया सीखने रहते हैं.

यहां सिखाया जाता है व्यावसायिक कार्य
मंगलदीप विद्या मंदिर में पढ़ने वाले सौमित्र कुमार ने कहा कि वह यहां पर तबला बजाना सीखते हैं और टीचर के द्वारा काफी कुछ उन्हें नया सिखाया जाता है. उन्हें यहां पर बहुत अच्छा लगता है और उनके काफी दोस्त भी हैं.टीचर भूपेंद्र सिंह बिष्ट ने कहा कि यहां पर बच्चों विभिन्न तरह के व्यावसायिक कार्य सिखाए जाते हैं बच्चों के द्वारा हैंडलूम, मोमबत्ती बनाना, हर्बल कलर, चॉकलेट, शगुन के लिफाफे और क्राफ्ट वर्क आदि उन्हें सिखाया जाता है. काफी बच्चे एक्टिव हैं जो इन सभी चीजों में एक्सपर्ट हो गए हैं. यहां पर बनने वाले प्रोडक्ट को लोग काफी पसंद भी करते हैं और जो भी यहां पर आता है वह इनको लेकर जाते हैं. म्यूजिक टीचर माया ने कहा कि यहां पर पढ़ने वाले बच्चे काफी एक्टिव हैं बच्चे यहां पर अन्य एक्टिविटीज के साथ-साथ गाने और डांस में रुचि रखते हैं. बच्चे यहां पर आते हैं तो सभी टीचर को अच्छा लगता है और उन्हें हर दिन कुछ न कुछ नया सिखाया जाता है.

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