उत्तराखंड पेपर लीकः कैसे एक बावर्ची बन गया SSC घोटाले का मास्टरमाइंड?


हाइलाइट्स

उत्तराखंड SSC भर्ती परीक्षा में पेपर लीक कर जुटाए करोड़ों रुपए
एसटीएफ ने मामले की जांच के दौरान 22 लोगों पर लगाए आरोप
सीएम पुष्कर धामी का निर्देश- किसी भी दोषी को बख्शा न जाए

देहरादून. उत्तराखंड में इन दिनों एसएससी पेपर लीक मामले ने शिक्षा जगत से लेकर सियासी हलकों तक हलचल मचा रखी है. वजह है इस पहाड़ी राज्य के अस्तित्व में आने के 22 साल के भीतर सबसे बड़ा भर्ती घोटाला. सरकारी नौकरी के नाम पर फर्जीवाड़े की जांच शुरू हुई तो लिस्ट में एक के बाद एक कई नाम सामने आए. स्पेशल टास्क फोर्स ने जब एक साथ 22 लोगों को इस भर्ती घोटाले में आरोपी बनाया, तो सबके कान खड़े हो गए. पैसे लेकर सरकारी नौकरी दिलाने का इतना बड़ा ‘खेल’ राज्य में चल रहा था, इसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. बीते मंगलवार को एसटीएफ ने इस घोटाले के किंगपिन हाकम सिंह समेत दो आरोपियों को हिरासत में लेने की मांग की.

एसटीएफ ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश पर पिछले महीने यानी 22 जुलाई को ही इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी. शुरुआती जांच के आधार पर 6 लोगों को गिरफ्तार किया गया. पड़ताल थोड़ी और बढ़ी तो मामले के तार उत्तराखंड के बाहर उत्तर प्रदेश तक से जुड़ते चले गए. फिर देहरादून, रामनगर, सहारनपुर और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ तक से गिरफ्तारियां होने लगीं. पता चला कि भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड हाकम सिंह पहले बावर्ची रहा है. रसोइया के पेशे से ही उसका संपर्क एक बड़े नेता के साथ हुआ और फिर उसके दिन बहुरने लगे. एसटीएफ की जांच में पता चला कि बावर्ची से भर्ती घोटाले का मास्टरमाइंड बनकर हाकम सिंह ने करोड़ों रुपए की अवैध कमाई की. एसटीएफ के सूत्र बताते हैं कि एक-एक उम्मीदवार से प्रश्नपत्र के लिए 15 से 20 लाख रुपए तक लिए गए. आरोप है कि पेपर लीक करने के आरोपियों ने 10 करोड़ तक की रकम जुटाई.

पेपर लीक का यह पूरा खेल चेन मार्केटिंग या पिरामिड स्टाइल से खरीद-बिक्री की प्रक्रिया के तहत चल रहा था. यानी एक अभ्यर्थी प्रश्नपत्र खरीदता और वह उसे दूसरे अभ्यर्थी को बेच देता था. एसएससी की भर्ती परीक्षा में लगभग 1.60 बेरोजगार युवाओं ने अपनी किस्मत आजमाई थी. मगर जब फाइनल सेलेक्शन की बारी आई, तो पता चला कि पैसों के दम पर पूरी चयन प्रक्रिया में ही गड़बड़ घोटाला किया गया है. एसटीएफ के एसएसपी अजय सिंह ने न्यूज 18 से बातचीत में कहा कि जब तक इस मामले के अहम सबूत और इससे जुड़े लोगों तक हम नहीं पहुंच जाते, यह जांच चलती रहेगी. बहरहाल, एसटीएफ की जांच के बीच आइए एक नजर डालते हैं कि उत्तराखंड में आखिर इस घोटाले को अंजाम कैसे दिया गया.

शिक्षक हो या कर्मचारी, सब शामिल हैं खेल में
भर्ती घोटाले का यह खेल आनन-फानन में नहीं खेला गया, बल्कि इसके पीछे सोची-समझी योजना बनाकर इसे अंजाम तक पहुंचाया गया. साल 2021 के अंत में जब पूरा राज्य आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर रहा था, उसी समय घोटाले की योजना बनाई गई. सरकारी स्कूलों के शिक्षक, जिला अदालतों के निचले स्तर के कर्मचारी, सचिवालय का स्टाफ, एक इंजीनियर, कोचिंग इंस्टीट्यूट संचालक और कई अन्य लोग इस गंदे खेल में शामिल हुए. इन सबका मकसद एक था, भर्ती घोटाला. उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग यानी UKSSSC ने विभिन्न सरकारी विभागों के लिए 916 पदों की वैकेंसी निकाली. आरोप है कि इन लोगों ने इस परीक्षा के प्रश्नपत्रों को लीक कर घोटाले को अंजाम दिया.

कौन है हाकम सिंह और कैसे हुई लीक?
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के बाद से अब तक के सबसे बड़े इस घोटाले का किंगपिन हाकम सिंह नाम का शख्स है. एक रसोइए के तौर पर आजीविका शुरू करने वाले हाकम सिंह के मंसूबे हमेशा से ऊंची उड़ान भरने वाले थे. इसलिए उसने जल्द ही बड़े नेताओं और शासन-प्रशासन के गलियारों से संपर्क बनाना शुरू कर दिया. आरोप है कि हाकम सिंह ने एसएससी भर्ती परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक करने के लिए लखनऊ के प्रिंटिंग प्रेस के अपने सूत्र का इस्तेमाल किया. इसके बाद जब भर्ती परीक्षा का ऐलान हुआ, तो अभ्यर्थियों को अलग-अलग लोकेशन पर बुलाया गया. जिन अभ्यर्थियों से पैसे लिए गए उन्हें देहरादून, धामपुर और जिम कॉर्बेट पार्क के पास स्थित रिसॉर्ट में बुलाया गया. अभ्यर्थियों को आंसर-की देकर उसे क्रमवार याद करने का निर्देश दिया गया. इसके बाद सबको उनके परीक्षा केंद्रों तक पहुंचा दिया गया.

सरकारी इंजीनियर बना ब्रोकर
गौर करने वाली बात यह है कि आंसर-की तैयार करने के लिए इस गिरोह ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की मदद ली. वहीं इस पूरे खेल में ‘ब्रोकर‘ की भूमिका सहारनपुर से गिरफ्तार एक सरकारी इंजीनियर निभा रहा था. उसे ‘क्लाइंट’ को फंसा-फंसाकर लाने का काम दिया गया था. एसटीएफ के मुताबिक, पुलिस का एक गनर, सचिवालय के दो स्टाफ, यूनिवर्सिटी के कर्मचारी और जिलास्तरीय निचली अदालतों के कुछ कर्मी भी इस गंदे खेल में शामिल हैं. घोटाले के सामने आने के बाद सीएम धामी ने दोटूक लहजे में कहा है कि इस मामले से जुड़े किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा. हालांकि प्रदेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस मांग कर रही है कि पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के सिटिंग जज से कराई जाए.

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