जन्माष्टमी में आ रहा ऋषिकेश इस मंदिर में मिलेगा इस्कॉन जैसा वाइब्स


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Janmashtami 2025: प्रधान सेवक प्रेमानंद ने कहा कि जन्माष्टमी से पहले ही पूरे देश में मंदिरों और बाजारों की रौनक बढ़ जाती है. रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और सजावटी सामान से मंदिरों को सुसज्जित किया जाता है. ऋषिकेश …और पढ़ें

देशभर में जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही हर्ष और उल्लास के साथ मनाया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण के जन्मदिन पर भक्तों का उत्साह चरम पर होता है. साल 2025 में यह पर्व 16 अगस्त को मनाया जाएगा. इस पावन अवसर पर मंदिरों और बाजारों में भव्य सजावट की जाती है. उत्तराखंड के ऋषिकेश स्थित मधुबन आश्रम भी इस पर्व के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है, जहां तीन दिनों तक चलने वाले कार्यक्रम भक्तों को आध्यात्मिक आनंद से भर देते हैं.

त्योहार की तैयारियां और सजावट
लोकल 18 के साथ बातचीत के दौरान मधुबन आश्रम के प्रधान सेवक प्रेमानंद ने कहा कि जन्माष्टमी से पहले ही पूरे देश में मंदिरों और बाजारों की रौनक बढ़ जाती है. रंग-बिरंगी लाइटों, फूलों और सजावटी सामान से मंदिरों को सुसज्जित किया जाता है. ऋषिकेश में मधुबन आश्रम का वातावरण भी पूरी तरह से भक्तिमय हो जाता है. यहां की सजावट ऐसी होती है मानो पूरा परिसर स्वर्गिक आभा से भर गया हो. इस भव्य सजावट को देखने के लिए स्थानीय लोग और पर्यटक बड़ी संख्या में आते हैं.

मधुबन आश्रम का महत्व
मधुबन आश्रम, ऋषिकेश का सबसे अद्भुत और प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है, जहां भगवान कृष्ण और राधा की पूजा होती है. इसकी स्थापना 1987 में हुई थी.यह न केवल उत्तराखंड बल्कि पूरे देश में कृष्ण भक्ति का केंद्र बन चुका है. यहां प्रतिदिन सुबह और शाम की भव्य आरती में देश-विदेश से आए भक्त भाग लेते हैं. आश्रम में भागवत गीता और अन्य आध्यात्मिक ग्रंथों का प्रचार-प्रसार भी किया जाता है, जिससे यह स्थान धार्मिक शिक्षा और संस्कृति का केंद्र बन गया है.

कृष्ण जन्मोत्सव के कार्यक्रम
यहां जन्माष्टमी का पर्व तीन दिनों तक चलता है. इस दौरान विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. कई स्कूलों के छात्र-छात्राएं श्रीकृष्ण पर आधारित प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं. इसमें भजन संध्या, नृत्य-नाटिका, मटकी फोड़ और श्रीकृष्ण लीला का मंचन प्रमुख आकर्षण होते हैं. इन कार्यक्रमों में बच्चों और युवाओं का उत्साह देखते ही बनता है.मधुबन आश्रम में जन्माष्टमी देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं. भक्तों का कहना है कि यहां के आयोजन को देखकर ऐसा महसूस होता है जैसे भगवान कृष्ण स्वयं उनके सामने प्रकट हो गए हों. इस दौरान पूरा वातावरण जय श्रीकृष्ण के जयकारों से गूंज उठता है. भक्त पूरी श्रद्धा से उपवास रखते हैं और आधी रात को भगवान का जन्मोत्सव मनाकर प्रसाद ग्रहण करते हैं.

आध्यात्मिक अनुभव
मधुबन आश्रम का जन्माष्टमी उत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन है, बल्कि यह लोगों को आध्यात्मिक ऊर्जा और आनंद प्रदान करता है. यहां आने वाले भक्त भक्ति और प्रेम के ऐसे वातावरण में डूब जाते हैं कि उन्हें सांसारिक चिंताओं से मुक्ति का अनुभव होता है.

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