ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करती हैं ये दो बहनें, एक हादसे ने बदल दी जिंदगी


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Dehradun: देहरादून की दो बहनें यातायात नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करती हैं ताकि उनकी तरह कोई और सड़क हादसे में अपने परिवार के सदस्य को न खो दे. हिट एंड रन केस में उन्होंने अपने चाचा को खोया था.

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 हादसे में अंकल को खोने के बाद लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ा रही भतीजियां

देहरादून. उत्तराखंड में नवम्बर 2024 तक सड़क हादसों का आंकड़ा 5 फीसद और हादसों में मरने वालों की संख्या में फीसद तक इजाफा हुआ. एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2023 में राज्य में 1520 सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 946 लोगों ने अपनी जान गंवा दी. वहीं नवंबर 2024 तक 1594 सड़क हादसे हुए, जिनमें 983 लोगों की सड़क हादसे में जान गई.

उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बढ़ती हुई जनसंख्या और भागती-दौड़ती जिंदगी के बीच लोगों की रफ्तार भी बढ़ गई है लेकिन सड़क हादसे जिंदगी की रफ्तार को थाम देते हैं. सड़क हादसों में जान गंवाने वाले लोग दुनिया छोड़ जाते हैं लेकिन उनके परिवार वाले उस दुख से उबर नहीं पाते.

सड़क हादसे में खोयी जान
ऐसी ही कहानी है स्वर्गीय सुशील मैखुरी की. सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले 27 साल की उम्र के सुशील मैखुरी का अचानक सड़क हादसे में निधन हो गया था, जिसके बाद उनका परिवार टूट गया. सड़क सुरक्षा एवं जागरूकता पर काम करने वाली संस्था श्रद्धांजलि की संस्थापिका इशिता ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए कहा कि उन्होंने बचपन में अपने अंकल को एक सड़क हादसे में खो दिया था.ड्रिंक एंड ड्राइव और हिट एंड रन के चलते उनके अंकल सड़क हादसे में परिवार को छोड़ गए थे.

सालों पहले की प्लानिंग
इसके बाद उन्होंने सोचा कि वे ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद अपनी कजिन सिस्टर अजंलि के साथ मिलकर ऐसा काम करेंगी जिससे ऐसे हादसे में कोई परिवार अपने फैमिली मेम्बर को न खोए. उन्होंने सोचा एक ऐसी संस्था बनाई जाए जिससे लोगों को यातायात नियमों की जानकारी मिलने के साथ-साथ नियमों के उल्लंघन होने पर होने वाले नुकसानों के बारे में बताया जाए. इसके लिए वे मशाल रैली, मैराथन और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से लोगों के बीच जागरूकता अभियान चलाती रहती हैं.

इशिता ने बताया कि उनके चाचा बेहद होशियार थे, उन्होंने पीसीएस जे का एग्जाम क्लियर किया था और उनकी मौत के बाद इंटरव्यू के लिए लेटर आया था. इन दोनों बहनों ने श्रद्धांजलि नाम से एक संस्था शुरू की. अब वह बच्चों और युवाओं के साथ मिलकर क़ई अभियान चला रही हैं. फरवरी में वे मेराथन का आयोजन करने जा रहें हैं जिसमें युवाओं की भागीदारी होगी.

मेरेथन में शामिल होंगे हेलमेट मैन ऑफ़ इंडिया राघवेंद्र कुमार
अजंलि का कहना है कि इस संस्था के माध्यम से स्कूलों में जाकर बच्चों को यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने की सीख दी जाती है. वे बच्चों को अपने अभिभावकों को हेलमेट पहनने के लिए जागरूक करते हैं. इसके अलावा वे समय-समय पर सड़कों और चौराहों पर नुक्कड़ नाटक, पोस्टरों के साथ- साथ बच्चों को जेब्रा क्रॉसिंग और यमराज की कॉस्ट्यूम पहनाकर अवेयरनेस प्रोग्राम करते हैं.

कई जगह किए कार्यक्रम
उन्होंने अब तक देहरादून शहर के रिस्पना पुल, बहल चौक और बल्लीवाला चौक समेत कई चौकों पर रोड शो किए हैं. आगामी 9 फरवरी को वे देहरादून में विशाल मैराथन का आयोजन करने जा रहे हैं जिसकी थीम सड़क सुरक्षा पर आधारित होगा. इसमें हेलमेट मैन ऑफ़ इंडिया राघवेंद्र कुमार भी शामिल होंगे.

अंजलि का कहना है कि ट्रैफिक रूल्स का पालन करवाना सिर्फ यातायात पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है बल्कि आम नागरिकों की जिम्मेदारी भी है. हमें ट्रैफिक रूल्स चालान के डर से नहीं बल्कि हादसों के डर से फॉलो करने चाहिए. उनकी संस्था श्रद्धांजलि के वालंटियर्स में छोटे बच्चों से लेकर बड़े बुजुर्ग तक शामिल हैं. उनकी संस्था से 10 से 12 बच्चे जुड़कर लोगों को यातायात नियमों का पाठ पढ़ा रहे हैं.

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ट्रैफिक नियमों के प्रति लोगों को जागरूक करती हैं ये बहनें, हादसे ने बदली जिदगी