देहरादून में विरासत महोत्सव का आगाज, इस दिन वडाली ब्रदर्स की LIVE परफॉर्मेंस


देहरादून. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 15 अक्टूबर से विरासत महोत्सव का आगाज हो गया है. देहरादून वासियों को इस फेस्टिवल का इंतजार सालभर रहता है. उत्तराखंड की पारंपरिक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों के साथ-साथ यहां देशभर की विरासत देखने के लिए मिलने वाली है क्योंकि देशभर से यहां हैंडीक्राफ्ट आर्टिस्ट अपने हुनर के साथ आ रहे हैं. इसी के साथ ही संगीत प्रेमियों के लिए विरासत फेस्टिवल में भारतीय शास्त्रीय संगीत के साथ-साथ कई संगीतकार समां बांधते हैं.

रूरल एंटरप्रेन्योरशिप फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज के संस्थापक आरके सिंह ने लोकल 18 को बताया कि विरासत महोत्सव को 30 साल पूरे होने वाले हैं. इसकी शुरुआत छोटे से स्तर से की गई थी लेकिन आज यह राज्य के बड़े महोत्सव के रूप में आयोजित किया जाता है. उन्होंने कहा कि विरासत एक ऐसा वार्षिक सांस्कृतिक महोत्सव है, जिसमें शास्त्रीय नृत्य, संगीत, हस्तकला, शिल्प और भारत की व्यापक विरासत का जश्न मनाया जाता है. राजधानी देहरादून के कौलागढ़ रोड स्थित ओएनजीसी डॉ बीआर अंबेडकर स्टेडियम में विरासत महोत्सव का 15 अक्टूबर 2024 से आगाज हो चुका है, 29 अक्टूबर तक आयोजित होगा. विरासत महोत्सव में मशहूर वडाली ब्रदर्स भी परफॉर्म करेंगे.

विंटेज कार और बाइक रैली भी
उन्होंने कहा कि विरासत आर्ट और हेरिटेज फेस्टिवल में देशभर के एक से एक कारीगर अपने अनोखे उत्पादों को लेकर पहुंचेंगे. विरासत सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे देशभर की संस्कृति का संगम होगा, जहां राजस्थानी कठपुतलियां, महाराष्ट्रियन फूड और कश्मीरी परिधानों से लेकर तमाम तरह की चीजें देखने को मिलेंगी. उन्होंने कहा कि राजधानी के स्कूलों और कॉलेजों के युवा और उभरते कलाकारों को भी यहां मंच दिया जाएगा. इसके अलावा महोत्सव में मास्टर कारीगर वर्कशॉप लेकर लोगों को अपना हुनर सिखाएंगे. विंटेज कार और बाइक रैली, विरासत क्विज कंपटीशन, फोटोग्राफी कंपटीशन जैसे कार्यक्रम भी आयोजित होंगे. इस महोत्सव में उत्तराखंड के छोलिया नृत्य, चक्रव्यूह, गोवा के लोक नृत्य, उत्तर प्रदेश और बिहार के लोक संगीत, ओडिसी नृत्य के साथ-साथ कव्वाली, योग, नेवी बैंड जैसे कार्यक्रम भी इसमें शामिल होंगे.

सूफी म्यूजिक से बनेगी शाम सुरीली
आरके सिंह ने बताया कि सूफी म्यूजिक लवर्स के लिए विरासत बहुत खास होता है क्योंकि यहां शाम संगीतमय होती है. महोत्सव में सूफी संगीत, गजल, कर्नाटक का शास्त्रीय संगीत सुनने के लिए मिलेगा. इस बार 25 अक्टूबर को विश्व प्रसिद्ध सूफी गायक वडाली ब्रदर्स का लाइफ परफॉर्मेंस होगा, जिसमें पूरणचंद अपने बेटे लखविंदर वडाली के साथ पहुंचेंगे. इसके साथ ही आपको यहां भरतनाट्यम और कथक जैसे नृत्य रूप और सरोद, तबला, बांसुरी समेत कई तरह के म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट्स और संगीत की विधाएं देखने को मिलेंगी.

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