‘नशे का सेवन करता है अनमोल जीवन का शिकार’
जीवन अनमोल है। नशे के सेवन से यह अनमोल जीवन समय से पहले ही मौत का शिकार हो जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 7 दिसम्बर, 1987 को प्रस्ताव पारित कर हर वर्ष 26 जून को ‘अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस’ मनाने का निर्णय लिया था। इस दिन विश्वभर में नशीली वस्तुओं और पदार्थों के निवारण हेतु चेतना फैलाने के साथ ही नशे के आदी लोगों के उपचार को भी प्रोत्साहित किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय नशा निरोधक दिवस के अवसर पर मादक पदार्थों के उत्पादन, तस्करी एवं सेवन के दुष्परिणामों से लोगों को अवगत कराया जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मादक पदार्थ एवं गैर-कानूनी बढ़ती गतिविधियां चिंता का विषय हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार दक्षिण एशिया में भारत भी हेरोइन का बड़ा उपभोक्ता देश बनता जा रहा है। भारत के कुछ भागों में अफीम की खेती की जाती है और पारंपरिक तौर पर इसके बीज ‘पोस्तो’ से सब्जी भी बनाई जाती है। अफीम से ही हेरोइन बनती है। अपराध मामलों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार भारत में जिस अफीम को हेरोइन में तब्दील नहीं किया जाता, उसका दो तिहाई हिस्सा 5 देशों ईरान में 42 प्रतिशत, अफगानिस्तान में 7 प्रतिशत, पाकिस्तान में 7 प्रतिशत, भारत में 6 प्रतिशत और रूस में 5 प्रतिशत उपभोग किया जाता है। कुल वैश्विक उपभोग का 6 प्रतिशत भारत में होने का मतलब कि भारत में 1500 से 2000 हेक्टेयर में अफीम की अवैध खेती होती है।
युवाओं में मादक पदार्थों के नशे की लत तेजी से फैल रही है। मित्रों के उकसावे पर लिए गए ये मादक पदार्थ अक्सर जानलेवा सिद्ध हो सकते हैं। स्कूल, कॉलेजों या पास-पड़ोस में गलत संगति के दोस्तों के साथ गुटखा, सिगरेट, शराब, गांजा, भांग, अफीम और धूम्रपान सहित चरस, स्मैक, कोकीन, ब्राउन शुगर जैसे घातक मादक दवाओं के सेवन की ओर बच्चों के कदम अपने आप बढ़ जाते हैं। बच्चों को फ्री में मादक पदार्थ उपलब्ध कराकर आदी बनाया जाता है और इसके लिए चोरी से लेकर अपराध तक करने को उन्हें तैयार किया जाता है। नशे के लिए उपयोग में लाई जानी वाली सुइयाँ एड्स का कारण भी बन सकती हैं। कई बार तो बच्चे घर के ही सदस्यों से नशे की आदत सीखते हैं। उन्हें लगता है कि जो बड़े कर रहे हैं, वह ठीक है और फिर वे भी घर में ही चोरी आरंभ कर देते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार अफीम, हेरोइन, चरस, कोकीन, तथा स्मैक जैसे मादक पदार्थों से व्यक्ति वास्तव में अपना मानसिक संतुलन खो बैठता है एवं पागल तथा अचेतन अवस्था में हो जाता है। ये ऐसे उत्तेजना लाने वाले पदार्थ हैं, जिनकी लत के प्रभाव में व्यक्ति अपराध तक कर बैठता है। मामला सिर्फ स्वास्थ्य से नहीं अपितु अपराध से भी जुड़ा हुआ है।
महिलाओं में मद्यपान की प्रवृत्ति निरन्तर बढ़ती जा रही है। वर्ष 2022 में आई रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 15 या उससे अधिक उम्र के करीब 19 प्रतिशत पुरुष नियमित शराब पीते हैं। देशभर में 15 या उससे अधिक उम्र की कुल 1.3 फीसदी महिलाएं नियमित रूप से शराब पीती हैं। ग्रामीण भारत में 19.9 फीसदी और शहरी भाग में 16.5 फीसदी पुरुष शराब पीते हैं। मद्यपान करने वाली महिलाओं की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। महिलाओं में मद्यपान की बढ़ती प्रवृत्ति के संबंध में किए गए सर्वेक्षण दर्शाते हैं कि करीब 40 प्रतिशत महिलाएं इसकी गिरफ्त में आ चुकी हैं। इनमें से कुछ महिलाएं खुलेआम तथा कुछ छिप छिप कर शराब का सेवन करती हैं। महानगरों और बड़े शहरों की कामकाजी महिलाओं के छात्रावासों में यह बहुत ही आम होता जा रहा है। मनोचिकित्सकों के अनुसार समय परिवर्तन के साथ साथ महिलाओं की सामाजिक स्थिति में भी बदलाव हुआ है। घर बाहर की दोहरी जिम्मेदारियों को निभाती आज की नारी अधिक तनाव एवं मानसिक दबाव तले जी रही है। सफलता के मार्ग पर चलने के साथ ही उन पर कार्य का बोझ भी बढ़ता जा रहा है।
रोजमर्रा की अनेक समस्याओं से घिरी कई महिलाएँ इसका हल शराब के नशे के रूप में पाती हैं। महिलाओं में आधुनिक रहन-सहन, पश्चिम का अंधानुकरण, मद्यपन को सामाजिक मान्यता, आसानी से शराब की उपलब्धता, तनाव, अवसाद व पुरुषों से बराबरी की होड़ को बढ़ती मद्यपान की प्रवृत्ति के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों, जन संचार माध्यमों आदि से जुड़ी महिलाओं में यह प्रवृत्ति अधिक दिखाई देती है। कभी-कभी पुरुषों की बराबरी का दावा करती महिलाएँ इस नशे की लत में पड़ जाती हैं। अकेलेपन की शिकार उच्च वर्ग की गृहिणियाँ भी क्लबों और पार्टियों में जाकर शराब का सहारा लेती हैं। मद्यपान करने वाली महिलाओं में अविवाहित प्रौढ़ाओं, तलाकशुदा महिलाओं तथा पति से अलग रहने वाली युवतियों की संख्या अधिक है। कभी-कभी महिलाओं को शराब तक पहुँचाने में पति एक अहम भूमिका निभाते हैं। महानगरों में स्थित शराब मुक्ति केंद्रों के आँकड़ों से ज्ञात होता है कि नशे की गिरफ्त से छुटकारा पाने हेतु आने वाले 10 व्यक्तियों में से 4 महिलाएँ होती हैं। मनोचिकित्सकों, डॉक्टरों व समाजशास्त्रियों का एक ही मत है कि मद्यपान समाज के लिए व व्यक्ति के लिए जहर के समान है।
-गोविन्द पारीक
(ये लेखक के अपने विचार है)