नैनीताल की खूबसूरत जगहों में से एक है टिफिन टॉप, अंग्रेज महिला के नाम पर पड़ा इसका ‘डोरोथी सीट’ नाम


रिपोर्ट- हिमांशु जोशी

नैनीताल. उत्तराखंड के नैनीताल की हसीन वादियों में घूमने के लिए बहुत कुछ है. यहां पहाड़ों की ऊंची चढ़ाई चढ़ने के बाद अलग-अलग सुंदर नजारे देखने को मिलते हैं. ऐसी ही नैनीताल के अयारपाटा पहाड़ की एक ऊंची जगह है टिफिन टॉप. इसके नाम में ही इसकी खासियत है. लंबी सी चढ़ाई चढ़ने के बाद यहां से दिखाई देने वाला नजारा सुकून देने वाला है. इसे डोरोथी सीट नाम से भी जाना जाता है.

टिफिन टॉप नैनीताल शहर से करीब पांच किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है. यहां पहुंचने के लिए बारापत्थर से होकर गुजरना होता है. इस पहाड़ी तक पहुंचने के लिए घोड़े की सवारी की जा सकती है. हालांकि यह रास्ता ट्रैकिंग करते हुए भी पार किया जा सकता है. यह करीब 7520 फीट की ऊंचाई पर स्थित है.

जानें क्‍यों पड़ा टिफिन टॉप नाम?
टिफिन टॉप की ओर जाते समय रास्ते में जंगलों के बीच में एक छोटा मैदान पड़ता है. स्थानीय निवासी बताते हैं कि यहां कभी स्कूल के बच्चे आते थे और खेलने के बाद अपने टिफिन में रखा खाना खाते थे, जिस वजह से इस जगह का नाम ‘टिफिन टॉप’ पड़ गया.

डोरोथी सीट की भी है पहचान
बताया जाता है कि ब्रिटिशकाल में केलेट डोरोथी नाम की एक महिला इस जगह पर बैठकर पेंटिंग किया करती थी. हवाई दुर्घटना में उसकी मौत हो गई थी. जिसके बाद केलेट के पति ने इस जगह को डोरोथी सीट नाम दिया था.

घोड़ा चालक सेवा समिति के अध्यक्ष मोहम्मद उमर ने बताया कि टिफिन टॉप की पहाड़ी ब्रिटिश काल से ही काफी मशहूर रही है. काफी संख्या में नैनीताल आने वाले पर्यटक इस पहाड़ी से शहर का दीदार करना नहीं भूलते. टिफिन टॉप के नजदीक ही डोरोथी सीट भी स्थित है. उमर ने आगे बताया कि यहां आने वाले पर्यटक घोड़े की सवारी का मजा लेते हुए इस पहाड़ी की ओर जाते हैं. घोड़े के एक चक्कर का किराया 760 रुपये है.

टिफिन टॉप से राजभवन, नैनीताल का मशहूर सेंट जोसेफ स्कूल और हिमालय पर्वत का सुंदर नजारा भी दिखाई देता है. यहां के स्थानीय निवासी अब्दुल ने कहा कि कहने को तो यह एक पर्यटन स्थल है लेकिन यहां शौचालय और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं. इसके अलावा डोरोथी सीट के पास दरारें भी पड़ने लगी हैं, जिसका ठीक किया जाना बेहद जरूरी है.

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