पहाड़ों में आज भी खेती ही आमदनी का जरिया! उगाने से लेकर बेचने तक की मेहनत, फिर मिलते हैं चंद रुपये
रोहित भट्ट/ अल्मोड़ा. उत्तराखंड के पर्वतीय जिलों में जहां एक ओर पलायन बड़ी समस्या बना हुआ है, तो वहीं कुछ गांव ऐसे भी हैं, जो कठिन हालातों का भी डटकर सामना कर रहे हैं और सीमित संसाधनों में अपने पारंपरिक पेशे से ही जुड़े हुए हैं. अल्मोड़ा जिले के माल गांव के लोग आज भी खेतीबाड़ी पर ही निर्भर हैं. गांव के लोग आमदनी के लिए खेतों में हरी सब्जियां उगाते हैं. पिछले कई साल से यहां के लोग सब्जियों से अपना रोजगार कर रहे हैं. गांव में उगाई गई हरी सब्जियों को बेचने के लिए यहां के लोग कई किलोमीटर का सफर तय कर बाजार में बेचने के लिए जाते हैं. दरअसल, इस मौसम में अपने-अपने खेतों में किसान लाई, पालक, मेथी और मूली उगाते हैं. इसके बाद वह खेत से सब्जियों को तोड़कर गड्डी के रूप में तैयार करते हैं और डाले में रखकर इन्हें बेचने के लिए चले जाते हैं. घरों की महिलाएं, पुरुष और बच्चे सभी किसी न किसी तरह एक दूसरे का सहयोग करते हैं.
माल गांव के लोग नवंबर से लेकर मार्च तक हरी सब्जियां उगाते हैं. ग्रामीणों ने कहा कि हरी सब्जी का एक डाला ₹500 से लेकर 1000 रुपये तक बिक जाता है, जिससे उनके घर का खर्चा पानी चलता है. इसके अलावा अन्य महीने में यहां पर चौलाई, लौकी के अलावा दूसरी सब्जियां लगाई जाती हैं. खेतीबाड़ी से जुड़ी हेमा बिष्ट ने कहा कि वह पिछले कई साल से सब्जी उत्पादन का काम कर रही हैं. पहली बार की सब्जियों में 1000 रुपये से भी ज्यादा रकम बन जाती है. सब्जियों को उगाने के साथ-साथ बेचने के लिए भी जाना पड़ता है. खेतीबाड़ी से ही वह घर का खर्च उठा रही हैं. अभी हरी सब्जियों का काम चल रहा है. उसके बाद अन्य सब्जियों को भी वह खेतों में उगाती हैं. खेती से उनका घर-परिवार पल जाता है. उनके बच्चे सरकारी स्कूल में पढ़ते हैं.
घर-घर जाकर भी बेचती हैं सब्जी
किसान गीता बिष्ट ने कहा कि जबसे उनकी शादी इस गांव में हुई है, तब से वह यहां सब्जियों का उत्पादन कर रही हैं. सब्जियों को उगाने के साथ-साथ वह बाजार में बेचने के लिए भी जाती हैं. घर से बाजार जाने में तकरीबन एक घंटा लग जाता है और बेचने में करीब दो घंटे लगते हैं. लोगों के घर-घर जाकर भी सब्जी बेचनी पड़ती है, तब जाकर उन्हें पैसे मिलते हैं. शुरुआती दौर में ₹1000 तक सब्जियों में बन जाते थे, पर अब ₹500 तक ही रकम निकल पाती है.
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FIRST PUBLISHED : January 31, 2024, 11:42 IST