पिथौरागढ़ के इन इलाकों में गुलदार का आतंक, 4 साल की मासूम को बनाया निशाना


हिमांशु जोशी/पिथौरागढ़.पिथौरागढ़ जिले में जंगली जानवरों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है. इन दिनों गुलदार के आतंक से पहाड़ के लोग दहशत में हैं.आए दिन गुलदार लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं. पिथौरागढ़ मुख्यालय सहित डीडीहाट, बेरीनाग में भी इन दिनों गुलदार का आतंक छाया हुआ है. कुछ समय पहले ही बेरीनाग के चचरेती गांव में गुलदार 4 साल की बच्ची को उठा ले गया. यहां रहने वाले शंकर दत्त की 4 साल की बेटी राखी घर के आंगन में खेल रही थी. रात करीब साढ़े आठ बजे घर के पास ही झाड़ियों में छिपे गुलदार ने घात लगाकर बच्ची पर हमला कर दिया. गुलदार बच्ची को जबड़े में दबाकर जंगल की तरफ भाग गया. बच्ची की चीख सुनकर परिजन भागे-भागे बाहर आए और गुलदार के पीछे दौड़ लगाई, लेकिन तब तक गुलदार जंगल में ओझल हो चुका था.

इस घटना के कुछ समय बाद ही इसी क्षेत्र में एक अन्य महिला पर गुलदार ने हमला किया जिनका इलाज हल्द्वानी में चल रहा है. यहां के लोग शाम होने के बाद घरों से बाहर निकलने में डर रहे हैं. इस क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य दिवाकर सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि गुलदार लगातार राईआगर क्षेत्र के लोगों पर हमला कर रहा है. जिससे बच्चों को स्कूल भेजने से भी यहां के लोग डरे हुए हैं. उन्होंने वन विभाग से गुलदार को आदमखोर घोषित कर इस समस्या से निजात दिलाने की मांग की है.

गुलदार की सक्रियता से दहशत
पिथौरागढ़ में इन दिनों गुलदार की सक्रियता हर इलाकों में बड़ी है. गुलदार दिखने की घटना आये दिन हर क्षेत्र से सुनने को मिलती है. सूचना के बाद कई इलाकों में मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम गुलदार की तलाश में जुटी हुई है. शहर के कुसौली, डीडीहाट और बेरीनाग क्षेत्र में गुलदार की दशहत है. वन विभाग के अधिकारी जीवन मोहन दगाड़े ने बताया कि इन दिनों घास उग जाने के कारण गुलदार को छिपने की जगह मिल जाती है और वह कमजोर शिकार की तलाश में रहता है.

वन विभाग का प्रयास जारी
वन विभाग के अधिकारी जीवन मोहन दगाड़े ने कहा कि उनकी टीम गुलदार को पकड़ने के हर संभव प्रयास कर रही है. उन्होंने लोगों से अपने आसपास झाड़ियों को काटकर उचित लाईट का प्रबंध करके की सलाह दी है. और ग्रामीणों को हर संभव मदद करने का आश्वासन भी उन्होंने दिया है. जंगलों में भोजन कि कमी हो गयी है जिसके वजह से गुलदार आबादी के निकट आ रहे हैं. पहाड़ों में बढ़ते मानव-वन्यजीव संघर्ष एक चिंता का विषय बन गया है.

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FIRST PUBLISHED : September 16, 2023, 16:18 IST