प्रदेश के स्कूल संचालकों-संस्था प्रधानों की ओर से सत्रांक नहीं भेजने का खामियाजा भुगत रहे विद्यार्थी
जयपुर। प्रदेश के संस्था प्रधानों की लापरवाही का खामियाजा राज्य के 13 हजार से अधिक बच्चे भुगत रहे हैं। पांचवीं और आठवीं के इन बच्चों का परिणाम बोर्ड ने रोक दिया है। वजह, स्कूलों के संस्था प्रधानों ने बच्चों के सत्रांक नहीं भेजे थे।
अब पंजीयक कार्यालय ने फिर से विद्यार्थियों के सत्रांक भेजने का आदेश जारी किया है। स्कूलों के प्रधानों से तीन जून तक सत्रांक मांगे गए हैं। पंजीयक ने आदेश में कहा है कि विद्यालय लॉगिन पर सत्रांक प्रविष्टि मॉड्यूल खोल दिया गया है। शाला प्रधान 3 जून तक सत्रांक प्रविष्ट कर सकेंगे। गौरतलब है कि इन सत्रांकों और लिखित परीक्षा में प्राप्त अंक जोड़ कर परिणाम जारी किया जाता है। हुआ यह कि प्रदेश के कई सरकारी एवं गैर सरकारी स्कूलों के संचालकों ने निर्धारित समय तक मॉडयूल में सत्रांक प्रविष्ट नहीं किए।
ये हुए प्रभावित
प्रदेश के 13 हजार 88 विद्यार्थियों का परीक्षा परिणाम रोका गया है। इसमें कक्षा पांच के 9538 तथा कक्षा आठ के 3550 विद्यार्थी शामिल हैं। कक्षा 8 की परीक्षा 28 मार्च से 4 अप्रेल तक एवं कक्षा 5 की परीक्षा 30 अप्रेल 4 मई तक आयोजित हुई थी।
इधर किसी का ध्यान नहीं
इधर, पंजीयक कार्यालय ने पांचवीं कक्षा का परीक्षा परिणाम महज 25 दिनों में जारी तो कर दिया, लेकिन इन 13 हजार बच्चों के मनोभावों को समझने की कोशिश शायद किसी ने नहीं की। नतीजा यह है कि प्रभावित बच्चे और उनके अभिभावक मानसिक तनाव में हैं। इसके चलते पूरी व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं।