बागेश्वर के कमल सिंह चौहान ने किया 10वीं टॉप, बनना चाहते हैं सेना में अफसर
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Uttarakhand Board Results: बागेश्वर के विवेकानंद विद्या मंदिर के छात्र कमल सिंह चौहान (14) ने हाईस्कूल परीक्षा में टॉप किया है. वह मूल रूप से रीमा क्षेत्र के किड़ई के रहने वाले हैं. उनके पिता हरीश सिंह चौहान कि…और पढ़ें
कमल सिंह चौहान ने 500 में से 496 अंक हासिल किए हैं.
बागेश्वर. उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद रामनगर (नैनीताल) द्वारा आयोजित हाईस्कूल और इण्टरमीडिएट का परीक्षाफल घोषित हो गया है. हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में बागेश्वर के कमल सिंह चौहान ने 99.20 प्रतिशत (496/500) अंक हासिल कर प्रदेश में टॉप किया. वहीं हल्द्वानी के हरगोविंद सुयाल इंटर कॉलेज के जतिन जोशी ने भी 496/500 अंक हासिल कर संयुक्त रूप से सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है. बात करें कमल सिंह की, तो वह घर से दूर बागेश्वर नगर में किराये पर रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. कमल सेना में अफसर बनना चाहते हैं.
बागेश्वर के विवेकानंद विद्या मंदिर के छात्र कमल सिंह चौहान (14) रीमा क्षेत्र के किड़ई निवासी हैं. उनके पिता हरीश सिंह चौहान किसान हैं. माता पुष्पा देवी गृहिणी हैं. कमल चार भाई बहनों में सबसे छोटे हैं. कमल ने बताया कि उन्होंने किताबों के अलावा यूट्यूब से भी पढ़ाई की. वह बागेश्वर नगर में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं. उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया. भविष्य में वह विज्ञान संकाय में गणित की पढ़ाई करना चाहते हैं. उन्होंने छात्रों को पढ़ाई में शॉर्टकट ढूंढने के बजाय मेहनत करने की सलाह दी. कमल ने कहा कि कोचिंग और ट्यूशन में पैसे लगाने की बजाय घर पर सोशल मीडिया और किताबों से परीक्षा की तैयारी की जा सकती है. अच्छे अंक प्राप्त करने के लिए शिक्षकों, माता-पिता का सहयोग मिला. कमल ने एनडीए में जाने की बात कही है.
देहरादून की अनुष्का राणा 12वीं टॉपर
बताते चलें कि हाईस्कूल बोर्ड परीक्षा में कमल सिंह चौहान और जतिन जोशी ने 99.20 प्रतिशत (496/500) अंक हासिल कर संयुक्त रूप से प्रदेश में टॉप किया. इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में देहरादून की अनुष्का राणा ने 98.60 प्रतिशत (493/500) अंक हासिल कर सर्वोच्च स्थान हासिल किया. इस वर्ष इंटरमीडिएट परीक्षा में कुल परिणाम 83.23 फीसदी रहा, जिसमें लड़कियों का उत्तीर्ण प्रतिशत 86.20 और लड़कों का 80.10 प्रतिशत रहा. हाईस्कूल का परिणाम 90.77 प्रतिशत रहा, जिसमें लड़कियों की सफलता दर 93.25 फीसदी और लड़कों की 88.20 प्रतिशत रही.