भारत में सिर्फ गुणगान, फीजी का तो हिंदी में ही संविधान
जयपुर। भारत में ऐसे लोगों की तादाद 52 करोड़ से कहीं अधिक है, जिनकी पहली भाषा हिन्दी है। लेकिन अंग्रेजी महज दो से तीन लाख लोगों की भाषा है, जो सिर्फ अंग्रेजी बोलते और समझते हैं। भारत में हिन्दी का गुणगान तो बहुत होता है, लेकिन हिन्दी अब भी राष्ट्रभाषा नहीं, राजभाषा है। लेकिन फीजी में 10 लाख लोगों में से महज तीन लाख 70 हजार के आस-पास आबादी होने के बावजूद वहां का संविधान हिन्दी में है।
फीजी में हिंदी का संवैधानिक महत्व
2013 में फीजी ने हिंदी को अपनी संविधानिक भाषा के रूप में अपनाया। यह न केवल फीजी में हिंदी भाषियों के अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी मान्यता प्रदान करता है। फीजी में हिंदी भाषा की शिक्षा और प्रशासनिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। फीजी के संविधान में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता देने का कदम हिंदी की वैश्विक स्थिति और प्रभाव को दशार्ता है।
– फीजी के संविधान में हिंदी को एक आधिकारिक भाषा के रूप में शामिल किया गया है, जिससे हिंदी भाषी नागरिकों को अपनी भाषा में कानूनी और सरकारी दस्तावेजों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार मिला है।
– हिंदी का उपयोग फीजी के स्कूलों में शिक्षा के एक माध्यम के रूप में किया जाता है, और सरकारी कार्यालयों में भी हिंदी में सेवाएं प्रदान की जाती हैं।
– हिंदी का उपयोग फीजी में सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रमों में किया जाता है, जिससे वहां की हिंदी भाषी संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित किया जा रहा है।
हिन्दी बोलने वाले 52 करोड़
भारत की 22 आधिकारिक भाषाओं में से एक है और इसे लगभग 44% लोग अपनी मातृभाषा के रूप में बोलते हैं। भारतीय जनगणना 2011 के अनुसार, भारत में हिंदी बोलने वाले लोगों की संख्या लगभग 52 करोड़ (520 मिलियन) है। इसमें हिंदी भाषी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, और हरियाणा के लोग शामिल हैं।
हिन्दी को फीजी जैसे कई देश अपनी भाषा मान रहे हैं तो हमें भी इस तरफ और गंभीरता से ध्यान देना चाहिए। यह पूरे भारत को जोड़ने वाली जीवंत और समृद्ध भाषा है।
– प्रो. नन्द किशोर पाण्डे, विभागाध्यक्ष, राजस्थान विश्वविद्यालय
भा षा के रूप में आज विदेशों में हिंदी इतनी अहम बन रही है, तो यह देशवासियों में भी राष्ट्रीयता के सशक्त भावों और जज्बों का पोषण करती है। हिंदी हमारी मातृभाषा और राजभाषा ही नहीं, यह ज्ञान, विज्ञान और आधुनिकता भी भाषा है। यह हमारी पहचान और हमारा गौरव है।
– शक्ति कुमार, अध्यापिका