मन की बात : गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोडना जरूरी, मोदी ने कहा- जल संरक्षण में हो सबकी भागीदारी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण में सामूहिक योगदान की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इसके लिए गांव में परंपरागत तालाबों और जल केंद्रों का संरक्षण कर वर्षा के पानी को बेकार होने से बचाने के लिए सामूहिक अभियान चलाने का सबको प्रयास करना चाहिए। मोदी ने रविवार को आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 120वीं कड़ी के प्रसारण के दौरान देश की जनता से यह अपील करते हुए कहा कि जो संसाधन प्रकृति ने हमें दिए हैं उन्हें हम अपनी अगली पीढ़ी तक पहुंचाएं और यह हम सबका नैतिक दायित्व भी होना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि ”गर्मी का मौसम शुरू होते ही शहर-शहर, गांव-गांव, पानी बचाने की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। अनेक राज्यों में जल संरक्षण से जुड़े कामों ने नई तेजी पकड़ी है। जलशक्ति मंत्रालय और अलग-अलग स्वयंसेवी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। देश में हजारों कृत्रिम तालाब, चेकडैम, बोरवेल रिचार्ज, सामुदायिक सोकपिट का निर्माण हो रहा है। हर साल की तरह इस बार भी ‘कैच द रेन’ अभियान के लिए कमर कस ली गई है। ये अभियान भी सरकार का नहीं बल्कि समाज का है, जनता-जनार्दन का है। जल संरक्षण से ज्यादा-से-ज्यादा लोगों को जोडऩे के लिए जल संचय जन-भागीदारी अभियान भी चलाया जा रहा है। प्रयास यही है कि जो प्राकृतिक संसाधन हमें मिले हैं, उसे हमें अगली पीढ़ी तक सही सलामत पहुंचाना है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि ”बारिश की बूंदों को संरक्षित करके हम बहुत सारा पानी बर्बाद होने से बचा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में इस अभियान के तहत देश के कई हिस्सों में जल संरक्षण के अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। मैं आपको एक दिलचस्प आंकड़ा देता हूँ। पिछले 7-8 साल में नए बने टैंक, तालाब और अन्य जल भराव के के ढांचे से 11 अरब क्यूबिक मीटर से भी ज्यादा पानी का संरक्षण हुआ है। अब आप सोचेंगे कि 11 अरब क्यूबिक मीटर कितना पानी होता है। भाखड़ा नांगल बांध में जो पानी जमा होता है, उसकी तस्वीरें तो आपने जरूर देखी होगी। ये पानी गोविंद सागर झील का निर्माण करता है। इस झील की लंबाई ही 90 किलोमीटर से ज्यादा है। इस झील में भी 9-10 अरब क्यूबिक मीटर से ज्यादा पानी संरक्षित नहीं हो सकता है। सिर्फ 9-10 क्यूबिक मीटर पानी और देशवासियों ने अपने छोटे-छोटे प्रयास से, देश के अलग-अलग हिस्सों में 11 क्यूबिक मीटर पानी के संरक्षण का इंतजाम कर दिया है ना ये शानदार प्रयास।

इस संदर्भ में उन्होंने कर्नाटक का एक उदाहरण देते हुए कहा कि ”इस दिशा में कर्नाटका के गडग जिले के लोगों ने भी मिसाल कायम की है। कुछ साल पहले यहाँ के दो गाँव की झीलें पूरी तरह सूख गईं। एक समय ऐसा भी आया जब वहाँ पशुओं के पीने के लिए भी पानी नहीं बचा। धीरे-धीरे झील घास-फूस और झाडिय़ों से भर गई। लेकिन गाँव के कुछ लोगों ने झील को पुनर्जीवित करने का फैसला किया और काम में जुट गए। और कहते हैं ना, ‘जहां चाह-वहाँ राह। गाँव के लोगों के प्रयास देखकर आसपास की सामाजिक संस्थाएं भी उनसे जुड़ गईं। सब लोगों ने मिलकर कचरा और कीचड़ साफ किया और कुछ समय बाद झील वाली जगह बिल्कुल साफ हो गई। अब लोगों को इंतजार है बारिश के मौसम का। वाकई, ये ‘कैच द रेन’ अभियान का शानदार उदाहरण है। साथियो, आप भी सामुदायिक स्तर पर ऐसे प्रयासों से जुड़ सकते हैं। इस जन-आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए आप अभी से योजना जरूर बनाइए और आपको एक और बात याद रखनी है – हो सके तो गर्मियों में अपने घर के आगे मटके में ठंडा जल जरूर रखिए7 घर की छत पर या बरामदे में भी पक्षियों के लिए पानी रखिए। देखिएगा ये पुण्य कार्य करके आपको कितना अच्छा लगेगा।

गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों से जोडऩा जरूरी : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गर्मियों की छुट्टियां में बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों जोडऩे का आग्रह करते हुए कहा है कि इससे उनके हुनर और प्रतिभा को पाठ्य पुस्तकों से बाहर की गतिविधियों में अपनी प्रतिभा को अभिव्यक्त करने का अवसर मिलेगा जो उन्हें बहुआयामी नागरिक बनाने में मदद करेगा। मोदी ने आकाशवाणी से प्रसारित अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 120वीं कड़ी के प्रसारण में आज कहा कि जब परीक्षाएं आती हैं, तो युवा साथियों के साथ वह ‘परीक्षा पे चर्चा’ करते हैं। अब परीक्षाएं हो चुकी हैं। बहुत सारे स्कूलों में तो दोबारा कक्षाएं शुरू होने की तैयारी हो रही है। इसके बाद गर्मी की छुट्टियों का समय भी आने वाला है। साल के इस समय का बच्चों को बहुत इंतजार रहता है। उन्हें भी बचपन के दिन याद आ गए जब वह  दोस्तों के साथ दिनभर कुछ-ना-कुछ उत्पात मचाते रहते थे, लेकिन साथ ही वे कुछ रचनात्मक काम भी करते थे उनसे सीखते भी थे। 

उन्होंने कहा कि ”गर्मियों के दिन बड़े होते हैं, इसमें बच्चों के पास करने को बहुत कुछ होता है। यह समय किसी नई हॉबी को अपनाने के साथ ही अपने हुनर को और तराशने का भी है। आज बच्चों के लिए ऐसे प्लेटफॉर्म की कमी नहीं, जहां वे काफी कुछ सीख सकते हैं। जैसे कोई संस्था तकनीकी शिविर चला रही हो, तो बच्चे वहाँ एप बनाने के साथ ही ओपन सोर्स सोफ्ट के बारे में जान सकते हैं। अगर कहीं पर्यावरण की बात हो, थियेटर  की बात हो या लीडरशिप की बात हो, ऐसे भिन्न-भिन्न विषय के कोर्स होते रहते हैं, तो, उससे भी जुड़ सकते हैं। ऐसे कई स्कूल हैं जो भाषण या तो ड्रामा सिखाते हैं, ये बच्चों को बहुत काम आते हैं। इन सबके अलावा आपके पास इन छुट्टियों में कई जगह चल रहे वोलेंटिर एक्टिविटीज, सेवा कार्यों से भी जुडऩे का अवसर है। ऐसे कार्यक्रमों को लेकर मेरा एक विशेष आग्रह है। अगर कोई संगठन, कोई स्कूल या सामाजिक संस्थाएं या तो फिर साईंस सेंटर ऐसी समर एक्टिविटीज करवा रहे हों, तो इसे मुझसे साझा करें। इससे देश-भर के बच्चे और उनके माता-पिता को इनके बारे में आसानी से जानकारी मिल सकेगी।

प्रधानमंत्री ने बच्चों को संबोधित करते हुये कहा कि ”मेरे युवा साथियो, मैं आज आपसे भारत के उस खास कैलेंडर की भी चर्चा करना चाहूंगा, जिसे इस समर वेकेशन के लिए तैयार किया गया है। इस कैलेंडर की एक प्रति अभी मेरे सामने है। मैं इससे कुछ अनूठे प्रयासों को साझा करना चाहता हूं । अभियान का हिस्सा बनकर सीमावर्ती गाँवों में एक अनोखा अनुभव ले सकते हैं। इसके साथ ही वहाँ संस्कृति और खेल गतिविधियों का हिस्सा जरूर बन सकते हैं। वहीं अंबेडकर जयंती पर पदयात्रा में भागीदारी कर आप संविधान के मूल्यों को लेकर जागरूकता भी फैला सकते हैं। बच्चों और उनके माता-पिता से भी मेरा विशेष आग्रह है कि वे छुट्टियों के अनुभवों को’ हॉलिडे मेमोरीज के साथ जरूर साझा करें। मैं आपके अनुभवों को आगे आने वाली ‘मन की बात’ में शामिल करने का प्रयास करूंगा।

अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस विराट महोत्सव बना : मोदी
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को कहा कि दस साल पहले 21 जून 2015 को शुरू हुआ पहला अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस ने अब एक विराट महोत्सव का रूप ले लिया है। मोदी ने रेडियो पर अपने मासिक प्रसारण ‘मन की बात’ की 120वीं कड़ी के सम्बोधन में रविवार को कहा कि मानवता भारत की ओर से यह एक ऐसा अनमोल उपहार है, जो भविष्य की पीढ़ी के बहुत काम आने वाला है। मोदी ने कहा कि साल 2025 के योग दिवस की थीम रखी गई है, ‘ योगा फॉर वन अर्थ वन हेल्थ यानि हम योग के जरिए पूरे विश्व को स्वस्थ बनाने की कामना करते हैं।

उन्होंने कहा कि ”मेरे प्यारे देशवासियो, आज फिटनेस  के साथ-साथ गिनती की बड़ी भूमिका हो गई। एक दिन में कितने कदम चले इसकी गिनती, एक दिन में कितनी कैलोरीज  खायी और कितनी कैलोरीज इस्तेमाल हुई इनका हिसाब, इतने सारे हिसाब के बीच, एक और उल्टी गिनती शुरू होने वाला है। विश्व योग दिवस की उल्टी गिनती। योग दिवस में अब 100 दिन से भी कम समय रह गया है। अगर आपने अपने जीवन में अब तक योग को शामिल नहीं किया है तो अब जरूर कर लीजिए अभी देर नहीं हुई है।

उन्होंने कहा कि यह हम सबके लिए गर्व करने वाली बात है कि आज हमारे योग और परंपरागत दवाओं को लेकर पूरी दुनिया में जिज्ञासा बढ़ रही है। बड़ी संख्या में युवा योग और आयुर्वेद को स्वस्थ होने के एक बेहतरीन माध्यम मानकर इसे अपना रहे हैं। अब जैसे दक्षिण अफ्रीका का देश चीली है। वहां आयुर्वेद तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। पिछले साल मैं ब्राजील की यात्रा के दौरान चीली के राष्ट्रपति से मिला था। आयुर्वेद की इस प्रसिद्धि को लेकर हमारे बीच काफी चर्चा हुई थी। मुझे’सोमोस इंडिया नाम की टीम के बारे में पता चला है। (स्पेनिश में इसका अर्थ है- हम भारत हैं। यह टीम करीब एक दशक से योग और आयुर्वेद को बढ़ावा देने में जुटी है।) उनका ध्यान उपचार के साथ-साथ शैक्षिक कार्यक्रमों पर भी है। वे आयुर्वेद और योग से संबंधित जानकारियों को स्पेनिश भाषा में अनुवाद भी करवा रहे हैं। सिर्फ पिछले वर्ष की बात करें तो उनके अलग-अलग कार्यक्रम और पाठ्यक्रम में करीब नौ हजार लोगों ने हिस्सा लिया था।