मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी छोड़ी, पहाड़ों के युवाओं को बना रहे इंजीनियर और डॉक्टर


कमल किशोर पिमोली/श्रीनगर गढ़वाल. पहाड़ के ढलानों से होते हुए पानी की तरह बहने से बेहतर है पहाड़ चढ़ना. कुछ कर गुजरने की उम्मीदें जिंदा है, संभावनाएं मरी नहीं है बेशक जहां पहाड़ का युवा महानगरों और मेट्रो सीटी को ओर रूख कर रहे हैं वहीं, कुछ ऐसे भी युवा हैं जिन्होंने मेट्रो सीटी की आरमदायक जिंदगी छोड़ वापस पहाड़ों पर लौटने की सोची और आज वे यहां बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहे हैं. अब ये युवा श्रीनगर गढ़वाल में छात्रों को इंजिनिएर और डॉक्टर बनने के लिए तैयार कर रहे हैं
2018 में मात्र कुछ युवाओं के समूह से शुरू हुआ ऐम स्कालर एकेडमी ने आज बहुत बड़ा आकार ले लिया है. ऐम स्कालर एकेडमी के फाउंडर हिमांशु थपलियाल बताते हैं कि उनके साथ चार-पांच अन्य युवा भी है, वे सभी मिलकर छात्रों को पढ़ाते हैं. बताया कि ऐम स्कालर एकेडमी की शुरूआत करने का उद्वेश्य पहाड़ के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करना है, एकेडमी लगातार अपने उद्वेश्यों में खरी उतर रही है. हिमांशु ने बताया कि 2014 में बीटेक करने के बाद वें जॉब के लिए बेंगलूरू चले गये थे, यहां वह एक मल्टीनेशनल कंपनी में नॉक इंजिनयर के पद पर कार्यरत थे, करीब 1 साल नौकरी करने के बाद भी जब उन्हें आत्म संतुष्टी नहीं हुई तो वह वापस श्रीनगर लौट आये ओर अपनी रूची के अनुसार बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया.

पहाड़ के छात्रों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने में जुटे
पहाड़ के छात्रों को इजीनयरिंग, या मेडिकल की तैयारी के लिए पहले महानगरों की ओर रूख करना पड़ता था, और इसके लिए छात्रों को एक दो साल का गैप भी लेना पड़ता था, लेकिन अब इन युवाओं के प्रयास से श्रीनगर गढ़वाल में छात्र 11वीं 12 वीं के साथ ही नीट, जेईई की तैयारी कर रहे हैं. जिससे उनका साल भी बच रहा है और छात्रों का इंजिनियर और डॉक्टर बनने का सपना भी पूरा होने की ओर बढ़ रहा है. हिमांशु बताते हैं कि अभी तक कई ऐसे छात्र भी है जो देश के जाने-माने संस्थानों से इंजीरिंग और मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं. कहा कि उनका उद्देश्य है कि छात्रों द्वारा चुने गये लक्ष्य को हासिल करने में उनकी मदद करना.

मुफ्त में भी कराते हैं तैयारी
ऐम स्कॉलर एकेडमी में स्कॉलरशिप प्रोग्राम चलाया जाता है जिसमें उन छात्रों को मुफ्त में शिक्षा दी जाती है जो वाकई कुछ करना चाहते हैं और अपना करियर बनाना चाहते हैं, ऐसे छात्रों के लिए एक टेस्ट आयोजित कराया जाता है और जो भी वह परीक्षा उत्तीर्ण करता है उसे फ्री में कोचिंग दी जाती है. साथ ही कई गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को भी उनके द्वारा मुफ्त में कोचिंग दी जाती है. हिमांशु का कहना है कि उनका एक ही उद्वेश्य है कि उनके द्वारा पढ़ाया गया छात्र बेस्ट से बेस्ट कॉलेज व संस्थानों में जाये. अक्सर देखने को मिलता है कि पहाड़ के छात्र अपने करियर को लेकर संजिदा नहीं दिखते हैं, 12वीं या ग्रेजुएशेन के बाद ही युवा सोचता है कि उसे आखिर करना क्या है. लेकिन तब तक बहुत देर हो जाती है. ऐम स्कालर के आशीष बताते हैं कि वह छात्रों को अपने विजन को लेकर क्लियर रखने की कोशिश करते है. कहा कि उनके पास जो भी छात्र आता हैं तो उनसे पहले उनका गोल (ऐम) क्लियर किया जाता है, बताते हैं कि 10वीं 12वीं के छात्रों में स्कूल में बेहतर प्रदर्शन करने का उत्साह तो रहता ही था, लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर किसी तरह की तैयारी नहीं करते थे, इसलिए सबसे पहले छात्रों को उनकी रूची के अनुसार उनका गोल क्लियर किया जाता है, उसके बाद छात्र को उसके अनुसार तैयारी कराई जाती है ताकी वह बेहतर प्रदर्शन कर सके.

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