सर्जन ने बेटे संग मिलकर लिखी किताब, बयां करेगी हादसे में घायल मरीजों का दर्द


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Dehradun News: डॉ गौरव संजय ने लोकल 18 से कहा कि उन्होंने अपने पिता ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ बीकेएस संजय के साथ मिलकर ‘फ्रॉम द पेन ऑफ सर्जन्स’ किताब लिखी है. यह हेल्थ एजुकेशन पर आधारित है. यह बुक लोगों में जागरूकता …और पढ़ें

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किताब का नाम ‘फ्रॉम द पेन ऑफ सर्जन्स’ है.

देहरादून. भारत में हर साल लगभग पांच लाख सड़क दुर्घटनाएं हो रही हैं. इनमें लाखों लोगों की जान चली जाती है. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में भी सड़क हादसों के मामले बढ़ते जा रहे हैं. कई लोग भीषण हादसे में अपनी जान गंवा देते हैं लेकिन जो लोग इन हादसों में बच जाते हैं और हड्डी टूटना समेत गंभीर चोटों के चलते वे काफी परेशानी झेलते हैं. उन लोगों की सिर्फ हड्डियां ही नहीं टूटती हैं बल्कि भावनात्मक रूप से भी वे टूट जाते हैं और मानसिक तौर पर कमजोर पड़ जाते हैं. उपचार के दौरान डॉक्टर उनका इलाज करने के साथ-साथ उनका मनोबल बढ़ाने की कोशिश करते हैं. ऐसी ही कुछ कहानियां आपको ‘फ्रॉम द पेन ऑफ सर्जन्स’ किताब में पढ़ने के लिए मिलेंगी, जो देहरादून के पद्मश्री ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ बीकेएस संजय और उनके ऑर्थोपेडिक सर्जन बेटे डॉ गौरव संजय ने लिखी है.

डॉ गौरव संजय ने लोकल 18 से बातचीत में कहा कि उन्होंने अपने पिता के साथ मिलकर ‘फ्रॉम द पेन ऑफ सर्जन्स’ किताब लिखी है, जो हेल्थ एजुकेशन पर बेस्ड है. हेल्थ एजुकेशन न्यूट्रिशंस पर लिखे आर्टिकल लोगों में जागरूकता लाने का काम करेंगे. कुछ टॉपिक रोड एक्सीडेंट से बचने और एक्सीडेंट होने पर क्या करना चाहिए, इसपर आधारित हैं.

सड़क हादसों के मुख्य कारण
डॉ गौरव ने कहा कि किसी भी हादसे से बचने के लिए सुरक्षा सबसे पहले नंबर पर आती है. ओवर स्पीडिंग, ओवर लोडिंग और ड्रिंक एंड ड्राइव सड़क हादसों के मुख्य कारण हैं. सफर के दौरान हमें इन चीजों से बचना चाहिए. आज देहरादून में बहुत सारे पब और बार संचालित किया जा रहे हैं, ऐसे में यहां की युवा पीढ़ी नशे के दलदल में फंसती जा रही है. युवा शराब पीकर रैश ड्राइविंग करते हैं, जिससे वे खुद तो अपनी जान गंवाते ही हैं, इसके साथ ही वे दूसरों को भी घायल कर देते हैं या हादसों में उनकी मौत हो जाती है.

बहुत बुरे दौर से गुजरते हैं मरीज
उन्होंने कहा कि जब हादसे के बाद मरीज हमारे पास आता है, तो सिर्फ टूटी हुई हड्डी के साथ नहीं आता और न ही सिर्फ उसकी शारीरिक रूप से क्षति होती है बल्कि वह अंदर से भी टूट जाता है. कुछ मरीज ऐसे होते हैं, जो वर्षों तक अपना इलाज करवाते हैं और तब भी ठीक नहीं हो पाते हैं. वे बहुत ही बुरे दौर से गुजरते हैं. उनके साथ-साथ उनके परिजनों को भी बहुत संघर्ष करना पड़ता है. मरीजों की कहानी सुनने और उनके जीवन के संघर्ष को देखने के बाद हमने इन्हें किताब में लिखने की कोशिश की है ताकि लोग सड़क दुर्घटनाओं और उसके बाद प्रभावित होने वाले जीवन के दर्द को महसूस कर सकें. लोग रोड सेफ्टी को लेकर जागरूक हो सकें, इस किताब का यही उद्देश्य है.

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