सुप्रीम कोर्ट ने SSC के रिजल्ट से हटाई रोक, छात्रों को मिली राहत

सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थानों में एडमिशन के लिए आयोजित किये जाने वाली प्रतियोगिता परीक्षाओं की प्रक्रिया को फूलप्रूफ बनाने के लिए उपाय सुझाने के सुप्रीम कोर्ट ने एक हाई पावर कमिटी का गठन किया है. सात सदस्यीय कमिटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस जी एस सिंघवी करेंगे.

अदालत ने यह फैसला साल 2017 के SSC मामले की सुनवाई करते हुए दिया. अदालत की ओर से गठित की गई कमिटी में इंफोसिस के पूर्व चीफ नंदन नीलकेणी और कंप्यूटर साइंटिस्ट विजय भटकर भी शामिल हैं. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को परिणाम घोषित करने और भर्ती करने के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है लेकिन कोई भी भर्ती मामले के अंतिम परिणाम के अधीन होगी.

SSC, CGL और CHSL के परिणाम जल्द ही घोषित किए जाएंगे. Supreme Court ने 31 अगस्त, 2018 को दिया अपना आदेश रद्द कर दिया.

गौरतलब है कि फरवरी 2017 में आयोजित हुई कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल एग्‍जामिनेशन टेस्‍ट के दौरान कई तरह की अनियमितताएं पाई गईं थीं. परीक्षा के बाद छात्रों ने पेपर लीक और परीक्षा के दौरान नकल की शिकायत करते हुए बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किया था. छात्रों ने मांग की थी कि सुप्रीम केार्ट की निगरानी में मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए.

छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई की और केंद्र सरकार ने पूरा मामला सीबीआई को सौंप दिया था. सीबीआई ने मामले की जांच के बाद पेपर लीक ममले में 17 लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. गिरफ्तार लोगों में कई एसएससी के कर्मचारी भी थे. मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अगस्त में  सुनवाई के दौरान कंबाइंड ग्रैजुएट लेवल एग्‍जामिनेशन 2017 और कंबाइंड सीनियर सेकेंड्री लेवल एग्‍जाम 2017 के परिणाम पर रोक लगा दी थी.

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