हैंडलूम एक्सपो में छाए 'लोहाघाट' के मशहूर लोहे के बर्तन, महिलाएं करती हैं खुद तैयार


हिना आज़मी/ देहरादून. उत्तराखंड की अनेकों जगह अपनी किसी विशेषता के चलते मशहूर हैं. चंपावत जिले का लोहाघाट लोहे के बर्तन के लिए मशहूर है. यहां से देहरादून में आयोजित होने वाले स्टेट हैंडलूम एक्सपो में कैलाश राम अपने लोहे के बर्तन लेकर पहुंचे हैं, जो अपनी मजबूती के लिए जाने जाते हैं. कैलाश राम की अगर बात करें तो वह बचपन से अपने इस पुश्तैनी काम में जुटे थे लेकिन वह अब ग्रोथ सेंटर चलाते हैं, जिसमें करीब 45 महिलाएं काम करती हैं यानी उनके ग्रोथ सेंटर में महिलाएं भी हथौड़े पीटकर इन बर्तनों को तैयार करती हैं. लोहाघाट की कढ़ाई काफी ज्यादा मशहूर है. कैलाश राम अपने ग्रोथ सेंटर के माध्यम से 20 से 25 लाख रुपये सालाना कमा लेते हैं.

लोकल 18 को जानकारी देते हुए कैलाश राम ने बताया कि चंपावत जिले के लोहाघाट में पहले लोहा पाया जाता था, जिससे वहां के रहने वाले लोग लोहे के बर्तन बनाते थे लेकिन धीरे-धीरे वहां का लोहा खत्म हो गया. आज भी वहां ज्यादातर घरों में लोहे के बर्तन तैयार किए जाते हैं. उन्होंने बताया कि बचपन से ही वह स्कूल के बाद अपने पुश्तैनी इस काम में जुट जाते थे. वह अपने पिता के साथ हथौड़े चलाना, घन मारना आदि करते थे.

लोहाघाट की शान लोहे के बर्तन

कैलाश राम ने बताया कि उनके यहां की कढ़ाई बहुत मशहूर है. उनके ग्रोथ सेंटर में कढ़ाई के अलावा तवे, इंडक्शन, करची, चिमटे और इमामदस्ते समेत कई तरह के बर्तन बनाए जाते हैं, जिन्हें लेकर वह अन्य राज्यों की प्रदर्शनी में भी गए हैं. उन्होंने बताया कि उनके यहां इंडक्शन की बहुत डिमांड रहती है. वह तैयार करते हैं फिर भी पूर्ति नहीं हो पाती है. दिल्ली के प्रगति मैदान में भी लोहाघाट की शान को लेकर कैलाश राम गए थे.

45 महिलाओं का ग्रोथ सेंटर चला रहे हैं कैलाश राम

प्रगति महिला ग्राम संगठन के नाम से कैलाश राम ने संस्था शुरू की थी. इसके बाद सरकार की ओर से उन्हें एक ग्रोथ सेंटर मिला, जिसमें आज करीब 45 महिलाएं काम कर रही हैं. यहां महिलाएं भी पुरुषों की तरह ही हथौड़े पीटकर बर्तनों को बनाने का काम करती हैं और उन्हें इनसे रोजगार में मिल रहा है. हर बर्तन का दाम अलग है. अगर आप भी लोहे के बर्तन खरीदना चाहते हैं, तो आपको देहरादून के बन्नू मैदान में स्टेट हैंडलूम एक्सपो में आना होगा.

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