श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय में कला प्रदर्शनी का आयोजन, मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रोफ़ेसर डॉ. गीता रावत की पुस्तक का हुआ विमोचन

डॉ. गीता रावत की पुस्तक 19 वीं सदी में तिब्बत का सर्वेक्षण करने वाले उत्तराखंड एक गुमनाम नायक नैन सिंह रावत की उपलब्धियो पर आधारित है I

श्री गुरु राम राय विश्वविद्यालय के पथरी बाग परिसर में कला प्रदर्शनी का आयोजन किया गया| आधुनिक भारतीय चित्रकला की थीम पर आयोजित इस प्रदर्शनी का उद्घाटन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर यशवीर दीवान ने किया। इस अवसर पर मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की डीन प्रो. (डॉ.) गीता रावत की पुस्तक का विमोचन भी किया गया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री महंत देवेंद्र दास जी महाराज ने आयोजकों को शुभकामनाएं प्रेषित की| वहीं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर यशवीर दीवान ने छात्रों को कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए बधाई दी|

मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय की  डीन एवं भूगोल विभाग की विभागाध्यक्ष प्रोफ़ेसर गीता रावत की पुस्तक ‘एक्सप्लोरिंग द रूफ आफ द वर्ल्ड , नैन सिंह रावत एंड द एक्सप्लोरेशन आफ द हिमालयन‌ रिजन’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया|उन्होंने अपनी पुस्तक के बारे में बताया कि आज से लगभग डेढ़ सौ वर्ष पूर्व जब दूरी नापने के आधुनिक यंत्र मौजूद नहीं थे, उस समय पंडित नैन सिंह रावत ने मापने का अपना ही एक तरीका खोजा। उन्होंने अंग्रेजों के साथ भारतीय सीमाओं का सर्वे का कार्य किया। उन्होंने नेपाल से होते हुए तिब्बत तक के व्यापारिक मार्ग का मानचित्रण भी किया और अपने जीवन का अधिकतर समय खोज और मानचित्र तैयार करने में बिताया। नैन सिंह रावत को उनके इन अद्भुत कार्यों के लिए देश और विदेश में कई पुरस्कार भी मिले जो की भूगोल के दृष्टिकोण से बहुत ही महत्वपूर्ण है।

पंडित नैन सिंह रावत ने 19वीं शताब्दी में बिना किसी आधुनिक उपकरण की मदद के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार कर लिया था. उनके इस काम के लिए अंग्रेजी हुकुमत से उन्हें बहुत सम्मान मिला. पंडित नैन सिंह रावत ने 19वीं शताब्दी में बिना किसी आधुनिक उपकरण की मदद के पूरे तिब्बत का नक्शा तैयार कर लिया था. उनके इस काम के लिए अंग्रेजी हुकुमत से उन्हें बहुत सम्मान मिला. सर्वेक्षण के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे ऊंचा सम्मान ‘पेट्रोन गोल्ड मैडल’ पाने वाले नैन सिंह इकलौते भारतीय हैं.

डॉ गीता रावत ने बताया यह उनकी पुस्तक पंडित नैन सिंह रावत की अदम्य भावना को श्रद्धांजलि है जो एक गरीब गांव के स्कूल शिक्षक से एक महान नायक बन गया।  Royal Geographical Society द्वारा सर्वेक्षण के क्षेत्र में दिया जाने वाले सबसे ऊंचा सम्मान ‘पेट्रोन गोल्ड मैडल’ पाने वाले नैन सिंह इकलौते भारतीय हैं.

पुस्तक के सह लेखक भूगोल विभाग के शिक्षक शार्दुल सेमवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने भारतीय सर्वेक्षण विभाग और रॉयल ज्योग्राफिकल समिति लंदन से आंकड़े जुटाए|  पंडित नैन सिंह रावत विश्व ने यह भी बताया सांगपो नदी के किनारे 800 किलोमीटर चलते हुए उन्होंने पता लगाया कि सांगपो और ब्रहमपुत्र एक ही हैं

साल 2004 में भारत सरकार ने पंडित नैन सिंह रावत नाम से एक डाक टिकट जारी किया और 2017 में गूगल ने उनके जन्मदिन पर अपना डूडल उनको समर्पित किया था.

राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर अपने विचार रखते हुए मानविकी एवं सामाजिक विज्ञान संकाय के इतिहास विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ सुनील किश्टवाल ने उत्तराखंड में चलाई जाने वाली वर्तमान योजनाओं पर प्रकाश डाला| इस मौके पर विश्वविद्यालय के कुलपति, सलाहकार रिटायर्ड मेजर जनरल राम, डीन एकेडमिक प्रोफेसर कुमुद सकलानी, आईक्यूएसी निदेशक प्रोफेसर सुमन विज, मुख्य परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर संजय शर्मा, डीन रिसर्च प्रोफेसर लोकेश गंभीर सहित विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों के डीन, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण समेत सैकड़ो छात्र मौजूद रहे।