किताबों के इनसाइक्लोपीडिया हैं “मामू कबाड़ी”! यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्र भी लेते हैं राय
तनुज पाण्डे/ नैनीताल.उत्तराखंड में ऐसे कई लोग हैं, जो शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए अपनी जिम्मेदारियां बखूबी निभा रहे हैं. आज हम आपको नैनीताल के एक ऐसे इंसान से मिलाने जा रहे हैं, जिनकी स्कूली शिक्षा सिर्फ छठी क्लास तक हुई, लेकिन उन्हें किताबों का सटीक ज्ञान है. कौन सी किताब किस विषय और किस परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है, वह इससे अच्छी तरह वाकिफ हैं. हम बात कर रहे हैं नैनीताल में ‘मामू कबाड़ी’ के नाम से मशहूर राशिद अहमद की. दूसरे शब्दों मे कहा जाए तो मामू कबाड़ी छात्रों के लिए किताबों के इनसाइक्लोपीडिया हैं.
राशिद अहमद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के धामपुर के रहने वाले हैं. 40 साल पहले राशिद धामपुर से नैनीताल आ गए थे और यहां रहकर कबाड़ का काम करने लगे. राशिद बताते हैं कि कबाड़ का काम करते हुए जब भी वह किताबों को कबाड़ में देखते थे, तो उन्हें बुरा लगता था. इसी वजह से उन्होंने किताबों को रद्दी में बेचने के बजाय जरूरतमंद बच्चों को देना उचित समझा और धीरे-धीरे वो रद्दी में आने वाली किताबें अपने पास जमा करने लगे और बच्चों को देने लगे.
इन छात्रों से नहीं लेते कोई पैसा
Local 18 से खास बातचीत के दौरान मामू ने कहा कि वह नैनीताल में अपने भांजों के साथ रहते हैं. भांजों के द्वारा मामू पुकारने के कारण राशिद लोगों के बीच मामू नाम से लोकप्रिय हो गए. नैनीताल के तल्लीताल बाजार में उनकी किताबों की दुकान है, जहां आधे दामों में छात्रों को स्कूल, कॉलेज और प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें आसानी से मिल जाती हैं. उनकी दुकान में अनाथ बच्चों और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों से किताबों का कोई मूल्य नहीं लिया जाता.
कहां है “मामू कबाड़ी” की दुकान?
मामू बताते हैं कि उनकी दुकान में उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, अल्मोड़ा के कुलपति प्रो. सतपाल सिंह बिष्ट भी आ चुके हैं. इसके अलावा उनकी दुकान की किताबों से पढ़ाई कर चुके कई आईएएस, पीसीएस वर्तमान में देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. मामू बताते हैं कि वो रोजाना सुबह किताबों की फेरी के लिए घरों और स्कूलों में जाते हैं और वहां से किताबें लेकर आते हैं. उसके बाद दोपहर करीब 12 बजे के आसपास अपनी दुकान खोलते हैं. उनकी दुकान तल्लीताल बाजार में है.
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FIRST PUBLISHED : March 18, 2024, 13:12 IST