कोटा। हाड़ौती के राजकीय महाविद्यालयों में शारीरिक शिक्षा का बुरा हाल है। यहां न तो गेम्स सिखाने के लिए पीटीआई है और न ही किताबों की देखरेख के लिए लाइब्रेरियन है। जबकि, राजकीय महाविद्यालयों में इन दिनों स्पोर्ट्स वीक मनाया जा रहा है। ऐसे में विद्यार्थियों को बिना नियम कायदे सिखाए खेल खिलाकर औपचारिकता पूरी की जा रही है। हालात यह हैं, कोटा संभाग के 44 राजकीय महाविद्यालयों में से 2 ही कॉलेज ऐसे हैं जहां मात्र 1 पीटीआई और 1 लाइब्रेरियन नियुक्त हैं, जो आरपीएससी से चयनित हुए हैं। अधिकांश कॉलेजों में संविदा पर पीटीआई नियुक्त किए हैं तो कई महाविद्यालयों में तो वो भी नहीं है।
1992 के बाद नहीं हुई भर्ती
सरकारी कॉलेजों में वर्ष 1992 के बाद से ही पीटीआई व लाइब्रेरियन की भर्ती नहीं निकाली। हर साल भर्ती की आस में बड़ी संख्या में युवा लाइब्रेरी साइंस व बीपीएड की डिग्री ले रहे हैं। लेकिन, भर्ती के अभाव में उनके सपने चकनाचूर हो रहे हैं। अधिकतर कॉलेजों में पीटीआई का चार्ज भी प्रोफेसरों को सौंप रखा है। गत वर्ष आयुक्तालय ने विकास समिति के माध्यम से कॉलेजों में पीटीआई नियुक्त करने के आदेश दिए थे। जिनका वेतन महाविद्यालय की विकास समिति के फंड से देना होता है। लेकिन, समिति के फंड में इतना बजट नहीं होता है कि शारीरिक शिक्षक व लाइब्रेरियन को तनख्वाह दे सके। ऐसे में कई महाविद्यालयों में संविदा पर पीटीआई लगा रखे तो कई में है ही नहीं।
एक पीटीआई और एक लाइब्रेरियन
कोटा संभाग में मात्र दो ही ऐसे कॉलेज हैं, जिनमें लाइब्रेरियन व पीटीआई हैं। जबकि, राजसेस सोसायटी से संचालित कॉलेजों में तो यह दोनों ही पद स्वीकृत नहीं है। बारां के बॉयज कॉलेज में शारीरिक शिक्षक तो बूंदी के राजकीय महाविद्यालय में लाइब्रेरियन हैं, जो आरपीएससी से चयनित हुए हैं। ऐसे में कॉलेजों में विद्यार्थियों की न तो स्पोर्ट्स की तैयारी हो पाती है और न ही समय पर पढ़ने को किताबें मिल पाती है। अधिकतर महाविद्यालयों में लाइब्रेरियन व पीटीआई का चार्ज व्याख्याताओं को ही सौंप रखे हैं। जिससे बच्चों की पढ़ाई तो प्रभावित होती है साथ ही खेलकूद गतिविधियां भी ठीक से संचालित नहीं हो पाती।
एक पीटीआई और 3 कॉलेजों का चार्ज
बारां के बॉयज कॉलेज में चतुर्भुज शर्मा एकमात्र शारीरिक शिक्षक हैं। उन्हें 15-15 दिन बॉयज व गर्ल्स कॉलेज में सेवाएं देनी पड़ती है। इसके अलावा जरूरत पढ़ने पर उन्हें छबड़ा कॉलेज में भी जाना पड़ता है। जिसकी वजह से विद्यार्थियों की प्रेक्टिस प्रभावित होती है। शर्मा बताते हैं, प्रदेश के करीब 400 कॉलेजों में 30 से 40 शारीरिक शिक्षक है। 1992 के बाद से ही भर्ती पीटीआई की नहीं निकली।
हाड़ौती में मात्र 1 ही लाइब्रेरियन
बूंदी बॉयज कॉलेज में ही एकमात्र आरपीएससी से चयनित लाइब्रेरियन हैं। यहां 31 साल से सेवाएं दे रहे रामस्वरूप मीणा बताते हैं, 1991 के बाद से ही प्रदेश में पुस्तकालयाध्यक्ष की भर्ती नहीं की गई। ऐसे में जो पहले थे वो भी रिटायर्ड हो गए। मांग के अनुरूप किताबों की खरीद, लाइब्रेरी की देखरेख, किताबों का डेटा कम्प्यूटर पर मेंटेन करना, विद्यार्थियों व स्टाफ की किताबें ईश्यू करवाना व अन्य काम लाइब्रेरियन के जिम्मे होते हैं।
बिना सीखे खेल रहे गेम्स
राजकीय महाविद्यालयों के प्रोफेसर्स का कहना है, लाइब्रेरियन व पीटीआई नहीं होने से उन्हें ही अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। जिससे मूल कार्य प्रभावित हो रहे हैं। स्पोट्स में जानकारी न होने के बावजूद विद्यार्थियों को गेम्स खिला रहे हैं, प्रेक्टिस के नाम पर कुछ नहीं हो रहा। वहीं, नई किताबों तक की खरीद नहीं हो पा रही।
क्या कहते हैं विद्यार्थी
कॉलेजों में स्पोर्ट्स वीक के नाम पर औपचारिकता पूरी की जा रही है। कॉलेज में पीटीआई तो छोड़ो पढ़ाने को शिक्षक तक नहीं है। ऐसे में बिना सीखे ही समान्य गेम्स खिलाए जा रहे हैं।
– कपिल, प्रथम वर्ष, राजकीय महाविद्यालय कोटा
इटावा कॉलेज में मात्र एक ही शिक्षक हैं, उनके अलावा कोई भी फेकल्टी नहीं है। ह्में गेम्स खिलाए तो जा रहे लेकिन गेम्स के नियम कायदे सीखाए ही नहीं।
– आशू मेघवाल, प्रथम वर्ष, राजकीय विद्यालय इटावा
कॉलेज में पीटीआई नहीं है। मैं राज्य स्तरीय खिलाड़ी हूं, इसलिए 7 तरह के गेम्स संचालित करवा रहे हैं। हालांकि, कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्राचार्य होने के बावजूद वित्तीय पावर नहीं मिलने से हर कार्य के लिए नोडल कॉलेजों पर निर्भर रहना पड़ता है। जब यूनिवर्सिटी की ओर से खेलकूद प्रतियोगिताएं करवाई जाती है तो स्कूलों से पीटीआई बुलाने पड़ते हैं।
– राजेश कुमार चौहान, प्राचार्य, रामपुरा गर्ल्स कॉलेज
हमारे कॉलेज में प्लेसमेंट एजेंसी के माध्यम से संविदा पर शारीरिक शिक्षक लगाया हुआ है। जिनका मानदेय महाविद्यालय की विकास समिति से दिया जाता है। स्पोर्ट्स एक्टिविटी में विद्यार्थियों में जबरदस्त रुझान नजर आ रहा है।
– प्रो. फातिमा सुल्ताना, प्राचार्य, जेडीबी साइंस कॉलेज
विभिन्न कॉलेजों ने अपने स्तर पर संविदा पर पीटीआई लगाकर व्यवस्था सुचारु चला रहे हैं। सरकार ने आरपीएससी के माध्यम से पीटीआई व लाइब्रेरियन की भर्ती निकाली है, जिसका कॉमन पेपर भी हो चुका है, शेष दो पेपर पूरे होने के बाद आगामी समय में कॉलेजों को पीटीआई व लाइब्रेरियन मिल सकेंगे।
– डॉ. रघुराज सिंह परिहार, सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा
