Most important investment lesson for girl who just satrted working: पहली सैलरी मुबारक हो! हाथ में पहली सैलरी आने का अपना अलग ही गर्व और आनंद है. वर्षों की तपस्या के बाद आप पढ़ाई पूरी करके अपने सपनों और जरूरतों को पूरा करने के सफर पर चल पड़ेंगी. निश्चित तौर पर खुशी का पल है और साथ ही लाता है जिम्मेदारी का अहसास भी. आप अपनी पहली नौकरी से मिलने वाले वेतन को कैसे हैंडल करती हैं, वह आपके भविष्य की नींव बनता है. इसलिए पहली सैलरी के आने के साथ ही मंहगे जूतों या लग्जरी जैसी किसी वस्तु या सेवा (एक्सपेंसिव वोकेशन, दावत) पर खर्चने से पहले ये लेख आपको जरूर पढ़ लेना चाहिए.
डियर गर्ल, आपके उत्साह पर पानी डालना मकसद नहीं है लेकिन जॉब लग जाने का अर्थ जिन्दगी भर नौकरी बने रहने की गारंटी नहीं है. यह हर दिन की कड़ी मेहनत व अन्य कारकों का ऐसा कॉकटेल है जिसके लिए आप साल दर साल, दिन प्रतिदिन अथक परिश्रम करती हैं. इस बीच जीवन अपनी रफ्तार से चलता है और वक्त जरूरत पर आपातकालीन घटनाएं आती रहती हैं. ऐसे में अपनी जरूरतों और अपनी इच्छाओं के बीच उस वक्त की भी तैयारी करनी शुरू कर देनी चाहिए जिसके तहत आपको मोटी रकम की जरूरत अचानक पड़ सकती है.
अपने वेतन के एक हिस्से को आपको हर हाल में बचाना चाहिए. यह बचाना (सेविग) रेंडम नहीं है बल्कि सोच समझकर खास मकसद से करनी होगी. आम मामलों की बात करें तो पहली नौकरी लगते ही किसी भी पोंजी स्कीम, तुरंत अमीर बनाने वाली योजना, या शेयर बाजार में निवेश नहीं करना है बल्कि एक ऐसा रणनीतिक फैसला लेना है जो आपको वित्तीय सुरक्षा और स्वतंत्रता प्रदान करे. (ये जरूर पढ़ें- लड़कियां झिझकें नहीं, निवेश शुरू करें, पैसा डूबेगा नहीं, हाई रिटर्न देंगे ये 3 विकल्प)
अच्छी या बुरी, किसी भी प्रकार की, आपात कंडिशन को झेलने के लिए आपके पास अतिरिक्त धनराशि होना जरूरी है. इसमें तीन से छह महीने के खर्चों को कवर करने के लिए पर्याप्त नकदी होनी चाहिए. यह तीन से छह महीने कम से कम अवधि का पैरामीटर है, अपनी सिचुएशन व पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए आप इसे बढ़ा भी सकती हैं. इस तयशुदा अतिरिक्त राशि को वित्तीय भाषा में इमर्जेंसी फंड कहते हैं. इसे बनाने के लिए सबसे पहले अपने मासिक खर्चों का मोटामोटी बजट बनाएं, इसमें नियमित ईएमआई से लेकर नियमित मेडिकल खर्चें और स्कूल फीस जैसे वे खर्चे शामिल हैं जो आप हर महीने या क्वर्टली करती ही हैं. इन जरूरी खर्चों को 3 या 6 महीने से मल्टिप्लाई करके जो सम आता है, यह वह रकम होती है जिसे आपने अपने आपातकालीन निधि में रखना ही है.(ये जरूर पढ़ें- लड़कियां झिझकें नहीं, निवेश शुरू करें, पैसा डूबेगा नहीं, हाई रिटर्न देंगे ये 3 विकल्प)
कम से कम तीन से छह महीने के जीवन-यापन के खर्च के बराबर एक आपातकालीन निधि बनाने के लिए आपको तब तक सैलरी से सेविंग करनी है जब तक यह लक्ष्य प्राप्त न हो जाए. पहली ही सैलरी से बचत करें. हो सकता है शुरू में बहुत मामूली रकम बचा पाएं, लेकिन इससे हतोत्साहित होने की जरूरत नहीं. आप यह सेविंग प्रक्रिया जारी रखिए.
इस रकम को आप अपने किसी ऐसे सेविंग खाते में रख सकती हैं जिससे आप पैसा निकालेंगी नहीं. क्योंकि यह एक फंड है इसलिए इसे केवल इमर्जेंसी के लिए ही रखें तब तक रकम की निकासी न करें जब तक कि जरूरत न हो. यह जरूरत नौकरी का जाना, दुर्घटना, रोग बीमारी, तलाक, मृत्यु, घर की मरम्मत जैसा कोई भी खर्च हो सकती है. सेविंग खाते के अतिरिक्त, आप ये पैसा स्मॉल सेविंग स्कीमों (जहां तरलता बनी रहती हो, और जरूरत पड़ने पर पैसा निकालना सरल हो) वहां भी सेव करके रख सकती हैं. यह फंड आपको जरूरत के वक्त में मोटे ब्याज पर लोन लेने से बचाएगा. आप जहां तक संभव हो कर्ज से बची रहेंगी तो अपने खर्च व पैसे को अच्छे से मैनेज कर पाएंगी. ये भी पढ़ें- डेबिट-क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल से हिचकती हैं, बात- बात पर नकद खर्च करती हैं तो हो जाएं सावधान!
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FIRST PUBLISHED : April 4, 2024, 13:00 IST
