हिमांशु जोशी
पिथौरागढ़. उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में अभिवावकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने निजी स्कूलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. उनका आरोप है कि प्राइवेट मनमाने तरीके से फीस में इजाफा कर लोगों की जेब पर अनावश्यक भार बढ़ाते हैं. अभिवावकों के अनुसार स्कूल अन्य पब्लिकेशन की कॉपी-किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं. साथ ही, कई स्कूल अब री-एडमिशन के नाम पर फीस मांग रहे हैं जिससे मध्यमवर्गीय परिवारों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं.
पिथौरागढ़ के विभिन्न सामाजिक संगठन निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ सड़क पर उतरने का मन बना चुके हैं. बच्चों के नए सत्र में प्रवेश होते ही अभिवावकों की मुश्किलें बढ़ जाती हैं. हर साल किताबों के दाम और स्कूल की फीस में बढ़ोतरी से अभिवावक काफी परेशान हैं.
अभिवावकों का कहना है कि निचली कक्षाओं की किताबें 5 से 7 हजार रुपये के बीच में मिल रही हैं क्योंकि एनसीईआरटी की किताबों के साथ ही अन्य पब्लिकेशन की किताबें भी उन्हें लेनी पड़ती हैं. लगातार महंगी होती शिक्षा के विरोध में कई सामाजिक संगठन ने निजी स्कूलों के खिलाफ पिथौरागढ़ की जिलाधिकारी (डीएम) रीना जोशी को शिकायती पत्र सौंपा है.
जिले के सामाजिक कार्यकर्ता गोविंद महर ने कहा कि स्कूल हर साल री-एडमिशन के नाम पर फीस वसूल रहे हैं, जो बिल्कुल भी सही नहीं है. उन्होंने प्राइवेट स्कूलों के इस मनमाने रवैये के खिलाफ उग्र आंदोलन करने की चेतावनी दी है.
वहीं, अभिवावकों ने डीएम को अपनी समस्याएं और निजी स्कूलों की मनमानी से अवगत कराते हुए इस पर रोक लगाने की मांग की है. इस पर डीएम ने इस संबंध में जल्द टीम गठित कर ऐसे स्कूलों के खिलाफ जांच करने की बात कही है. जांच में दोषी पाए जाने वाले स्कूलों के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी.
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Tags: Pithoragarh news, Private School, School Fees, Uttarakhand news
FIRST PUBLISHED : April 12, 2023, 18:32 IST
