कवाई। स्टेट हाईवे पर स्थित अंधेरी नदी की पुलिया अब आमजन के लिए सुविधा नहीं, बल्कि डर का दूसरा नाम बन चुकी है। वर्षों पुरानी यह पुलिया इतनी जर्जर अवस्था में पहुंच गई है कि गुजरना हर वाहन चालक और पैदल यात्री के लिए जान जोखिम डालने जैसा हो गया है। करीबन 200 फीट लंबी सीसी पुलिया की ऊपरी सतह पूरी तरह जवाब दे चुकी है। सड़क की परत उखड़ चुकी है, जगह-जगह गहरे गड्ढे बन चुके हैं और कई हिस्सों में लोहे की सरिया बाहर निकल आई है। इससे दोपहिया और चारपहिया वाहनों के फिसलने का खतरा बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुलिया निर्माण के बाद कई बार केवल डामर डालकर अस्थायी मरम्मत की गई, लेकिन कुछ ही समय में हालात फिर से वही हो जाते है। बरसात में मौसम में स्थिति और भी जानलेवा हो जाती है।
हजारों वाहन, बच्चों की बसें और मवेशियों का खतरा
यह पुलिया कवाई सहित आसपास के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग है। प्रतिदिन यहां से भारी वाहन, ट्रैक्टर-ट्रॉली, स्कूल बसें, यात्री वाहन और मवेशी गुजरते हैं। रात में रोशनी की कमी, सर्दी में कोहरा और बरसात में फिसलन के कारण खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
बरसात में हादसा, लेकिन सबक नहीं
कुछ दिन पहले बारिश के दौरान एक व्यक्ति बाइक सहित पुलिया से फिसलकर नदी में जा गिरा। सौभाग्य से व्यक्ति तैरना जानता था और ग्रामीणों की तत्तपरता से उसकी जान बच गई। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है।
टूटी रेलिंग, गायब डिवाइडर, सुरक्षा पूरी खत्म
पुलिया के दोनों ओर लगी सुरक्षा रेलिंग और डिवाइडर अब सिर्फ नाम मात्र के रह गए हैं। कई हिस्से टूट कर नदी में गिर चुके हैं। जहा सुरक्षा अवरोधक होना चाहिए, वहां खुला किनारा है। जरा-सी चूक वाहन की सीधे 30-40 फीट गहरी अंधेरी नदी में गिरा सकती है। बरसात में तेज बहाव हालात को और भयावह बना देता है। इसके बावजूद पुलिया पर न पुख्ता सुरक्षा इंतजाम हैं और न ही पर्याप्त चेतावनी संकेत।
अब लोगों की एक ही मांग
स्थानीय लोग स्पष्ट मांग है कि अब अस्थायी मरम्मत नहीं, बल्कि पूरी पुलिया का मजबूत निर्माण किया जाए। दोनों ओर नई सुरक्षा रेलिंग, डिवाइडर, सड़क सुधार और चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं। समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो अगली खबर किसी बड़े हादसे की हो सकती है।
इनका कहना है
रोज इस पुलिया से गुजरना जैसे मौत को दावत देना जैसा है। बच्चे, बुजुर्ग सभी खतरे में हैं। प्रशासन अब तक केवल पैचवर्क कर अपनी जिम्मेदारी से बचाता रहा है, जबकि अब स्थायी समाधान जरूरी है।
– हरिओम सुमन,ग्रामीण
पुुलिया टूट-फूट से भरी है, रेलिंग और डिवाइडर नाम मात्र के हैं। बरसात में यह किसी भी समय बड़े हादसा का कारण बन सकती है।
-धनराज सुमन, पूर्व जिला संयोजक बजरंगदल
रोज सैंकड़ों छोटे-बड़े वाहन, स्कूल बसें और मवेशी इसी पुलिया से निकलेते है। न चेतावनी बोर्ड नहीं। समय रहते सुधार नहीं हुआ,तो बड़ा हादसा तय है।
देवकीनंदन सुमन, गो भक्त
बारिश में फिसलन और टूटी रेलिंग के कारण पुलिया से गुजरना बेहद डरावना हो गया है। प्रशासन को अब तत्काल स्थायी समाधान करना चाहिए।
-हंसराज गुर्जर,निवासी फुलबड़ौदा
निर्माण कंपनी के संवेदक हंसराज नागर ने बताया कि उक्त कार्य का टेंडर उनकी फर्म को मिल चुका है और शीघ्र ही मौके पर कार्य प्रारंभ किया जाएगा।,,
-हंसराज नागर,संवेदक,निर्माण कंपनी
नदी की पुलिया के निर्माण का आॅर्डर जारी हो चुका है,सभी प्रक्रियाएं पूर्ण कर ली गई है,और जल्द ही कार्य प्रारंभ कराया जाएगा।
-नरेंद्र चौधरी,अधिशासी अभियंता,स्टेट हाईवे छबड़ा
