अब कॉलेजों में दो बार होंगे एडमिशन, दो बार प्लेसमेंट

कोटा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-यूजीसी ने सर्कुलर जारी कर उच्च शिक्षण संस्थानों को साल में दो बार एडमिशन किए जाने की इजाजत दे दी है। इस नई व्यवस्था के तहत अब कॉलेजों व यूनिवर्सिटीज में दो बार एडमिशन  हो सकेंगे। पहला सत्र जुलाई-अगस्त में तो दूसरा, जनवरी-फरवरी में शुरू होगा। दोनों सत्र 12-12 महीने के होंगे। दोनों में दो बार प्रवेश और दो बार फाइनल परीक्षा होगी। वहीं, विद्यार्थियों को प्लेसमेंट के भी दो बार मौके मिलेंगे। यह व्यवस्था जनवरी-2025 के सत्र से लागू होगी। यूजीसी के इस फैसले से विश्वविद्यालय व उच्च शिक्षण संस्थानों में रेगुलर मोड में ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन और पीएचडी के सभी पाठ्यक्रमों में जनवरी 2025 से दाखिले होंगे।  यूजीसी के इस प्रावधान को लेकर कोटा यूनिवर्सिटी में मंथन शुरू हो चुका है। हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन कॉलेजों में साधन-संसाधनों की उपलब्धता, चुनौतियां सहित कई पहलुओं पर विचार कर रही है।

दो बार एडमिशन सभी के लिए अनिवार्य नहीं
यूजीसी द्वारा 19 जून को जारी किए पत्र में स्पष्ट किया है कि  साल में दो बार एडमिशन देने या दो अलग-अलग सत्र चलाने का प्रावधान सभी विश्वविद्यालयों के लिए अनिवार्य नहीं है, लेकिन, जिनके पास तय मानकों के हिसाब से पर्याप्त बुनियादी सुविधाएं व साधन-संसाधन उपलब्ध हैं, ऐसे विवि जनवरी, 2025 से ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन व पीएचडी सभी कोर्सेज के लिए अपना दूसरा सेशन शुरू कर सकते हैं। इन संस्थानों के पास जनवरी सत्र (दूसरी बार प्रवेश प्रक्रिया) शुरू करने की तैयारी के लिए अभी 6 माह का वक्त है। 

इसलिए पड़ी नई व्यवस्था की जरूरत  
 पिछले वर्ष यूजीसी ने देशभर में ओपन एंड डिस्टेंस लर्निंग (पत्राचार) और आॅनलाइन माध्यम में उच्च शिक्षा संस्थानों को साल में दो बार दाखिला देने की अनुमति दी थी। जिसके तहत जुलाई 2022 के सत्र में 19,73,056 छात्रों ने दाखिला लिया था, लेकिन इस अनुमति के बाद दूसरे सत्र यानी जनवरी, 2023 सत्र में 4 लाख 28 हजार 854 अतिरिक्त छात्रों ने दाखिला ले लिया। इस आंकड़े से पता चला कि दूसरे अकादमिक सत्र की इजाजत से करीब सवा चार लाख से ज्यादा छात्रों को डिग्री कोर्स में दाखिला पाने के लिए पूरे साल का इंतजार नहीं करना पड़ा।

पहली बार चूके तो दूसरी बार मिल सकेगा मौका
कोटा यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ महासचिव रोहिताष मीणा ने बताया कि विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में दो बार प्रवेश दिए जाने से विद्यार्थियों के लिए दाखिले के अवसर बढ़ जाएंगे।  ऐसे छात्र जो बोर्ड परीक्षा परिणाम में देरी, अस्वास्थ्य या अन्य किसी कारणों से जुलाई-अगस्त के पहले सत्र में दाखिला नहीं ले पाते, उन्हें जनवरी के दूसरे सत्र में एडमिशन का मौका मिल सकेगा। वहीं, साल में दो बार कैंपस प्लेसमेंट हो सकेंगे इससे छात्रों के पास रोजगार पाने के मौके भी बढ़ेंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 2035 तक उच्च शिक्षा में एडमिशन 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। 

कहां जरूरत और कहां नहीं
शिक्षाविद् अनुज विलियम कहते हैं, दो अलग-अलग सत्र चलाने का यह प्रावधान सभी विवि के लिए अनिवार्य नहीं है। देश में अच्छा प्रदर्शन करने वाली यूनिवर्सिटीज ही इसे अपना सकेंगी, क्योंकि जहां पहले से ही सीटें खाली रह जाती हैं, वहां दूसरे सत्र की जरूरत नहीं। जहां एडमिशन के लिए भीड़ रहती है, ऐसे विवि इसे लागू कर सकते हैं ताकि ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को रेगुलर पढ़ाई करने का मौका मिल सके।  

कॉलेजों के सामने यह है चुनौतियां 
यूजीसी ने 2035 तक देशभर के कॉलेजों में एडमिशन 50 प्रतिशत तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इस व्यवस्था से मदद जरूर मिलेगी, लेकिन विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में सीटें बढ़ने से फैकल्टी और संसाधन कम पड़ सकते हैं। वर्तमान में कोटा संभाग के राजकीय महाविद्यालयों में साधन-संसाधन की भारी कमी है। हाड़ौती में करीब 44 गवर्नमेंट कॉलेज हैं, जहां कुल स्वीकृत शिक्षकों के पदों के मुकाबले आधे पद खाली पड़े हैं। वहीं, कई जगहों पर तो एक-एक शिक्षक के भरोसे कॉलेज संचालित हो रहे हैं। 

महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक ही नहीं
एक तरह यूजीसी एजुकेशन सिस्टम को ग्लोबल लेवल पर ले जाने की तैयारी कर रही है, लेकिन संभाग के राजकीय महाविद्यालयों में इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य रिसोर्सेस की कमी है। जिसके चलते यह मंशा फिलहाल पूरी होती प्रतीत नहीं होती है। हालात यह हैं, ग्रामीण क्षेत्रों के कॉलेजों में अंगे्रजी, इतिहास, राजनेतिक विज्ञान, संस्कृत व ज्योग्राफी सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। जिसके कारण क्लासें ही नहीं लग पाती। 

सेमेस्टर सिस्टम के चलते शैक्षणिक सत्र थोड़ा प्रभावित हुआ है, जिसे रेगुलाइज करने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। धरातल पर साधन-संसाधनों की उपलब्धता व व्यवहारिकता देखते हुए इस पर विचार किया जाएगा।  
-प्रो. रीना दाधीच, कुल सचिव कोटा यूनिवर्सिटी

यूजीसी का सर्कुलर आया है। अभी रुल्स एंड रेगुलेशन व गाइड लाइन की स्टडी कर रहे हैं। इंफ्रास्ट्रक्चर और संसाधनों  की उपलब्धता देखते हुए नियमानुसार निर्णय किया जाएगा। 
-डॉ. घनश्याम शर्मा, डीन पीजी कोटा विश्वविद्यालय

उच्च शिक्षण संस्थानों में साल में दो बार प्रवेश का प्रावधान अनिवार्य नहीं है। यूजीसी ने संस्थानों को अपने संसाधनों के अनुरूप नई व्यवस्था को लागू करने में छूट दी है। अधिकतर विश्वविद्यालयों के लिए अभी सेमेस्टर सिस्टम ही समय पर संचालित करना चुनौती बना हुआ है। ऐसे में बेहतर होगा की विश्वविद्यालय वर्तमान सिस्टम को दुरुस्त कर विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करें, इसके बाद ही इस बारे में सोचे।
-डॉ. अनुज विलियम, शिक्षाविद्

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