उत्तराखंड के युवा सीख रहे स्वरोजगार के गुर, अब नहीं होगा पलायन


देहरादून: उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में युवाओं के भीतर स्वरोजगार की भावना पैदा करने की तैयारी की जा रही है. इसका बीड़ा प्रदेश सरकार के उच्च शिक्षा विभाग और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) ने मिलकर उठाया है. ‘देवभूमि उद्यमिता योजना’ के जरिए राज्य में युवाओं को उद्यमशीलता कौशल विकास और स्वरोजगार के गुर सिखाना है. योजना का उद्देश्य युवाओं की क्षमता और कौशल में सुधार करना और उन्हें सफल उद्यमी बनाने के लिए सहायता प्रदान करना है. इसके लिए राज्य भर के सरकारी कॉलेजों में देवभूमि उद्यमिता केंद्र खोले गए हैं. लोकल18 ने देवभूमि उद्यमिता योजना के बारे में और उससे होने वाले लाभों के बारे में जानने की कोशिश की.

क्या है देवभूमि उद्यमिता योजना?
उत्तराखंड सरकार और भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान(ईडीआईआई) ने मिलकर राज्य के युवाओं को स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया है. जिसके लिए प्रदेशभर में 124 केंद्र खोले गए हैं, जिनमें से 10 उत्कृष्ट केंद्र हैं. पंजीकृत युवाओं को बूथ कैंप के जरिए बिजनेस की बारीकियों के गुर सिखाएं जा रहे हैं. जहां 185 फैकल्टी मेंटर प्रशिक्षित किए गए हैं.

गौरतलब है कि 18,126 छात्रों ने इस योजना में अपना पंजीकरण करवाया हुआ है. खास बात यह है कि अभी तक 243 पंजीकृत छात्रों ने स्वरोजगार पर काम करना शुरू कर दिया है. गौरतलब है कि यह कार्यक्रम पूरी तरह से नि:शुल्क करवाया जाता है.

पलायन को रोकना ही सबसे पड़ा चैलेंज
प्रोजेक्ट ऑफिसर अवनीश राय ने लोकल18 को बताया कि पहाड़ी क्षेत्रों के बच्चों के भीतर बिजनेस यानि स्वरोजगार की भावना उत्पन्न करने के लिए पिछले एक साल से देवभूमि उद्यमिता योजना चलाई जा रही है. सबसे ख़ास बात है कि शुरूआत में बच्चों को इसके बारे में इतनी जानकारी नहीं थी, लेकिन वर्तमान समय में हमें सकारात्मक परिणाम देखने को मिल रहे हैं.

उत्तराखंड में रोजगार के लिए पलायन बहुत तेजी से हो रहा है. ऐसे में यह हमारे लिए चैलेंज है कि हम कैसे इस योजना के माध्यम से युवाओं को उन्हीं के क्षेत्र में स्वरोजगार के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित करें. हमारा लक्ष्य है कि यहां से सीखा हुआ बच्चा स्वरोजगार तो करें ही साथ ही अन्य लोगों को भी रोजगार दे.

हजारों छात्रों ने लिया बूट कैंप में हिस्सा
उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत राज्य विश्वविद्यालयों, विश्वविद्यालय परिसरों और संबद्ध महाविद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुपालन में उद्यमिता, स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए उद्देश्य से यह योजना शुरू की गई थी. इस योजना की तरह बिजनेस आइडिया का पेटेंटिंग, कॉपीराइट और भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) के लिए काम किया जा रहा है.

लोकल18 से प्रोजेक्ट ऑफिसर अवनीश राय ने बताया कि पिछले एक साल में हमारे पोर्टल पर 18 हज़ार से अधिक छात्र रजिस्टर्ड हैं. उसमें से तकरीबन 8000 छात्रों ने बूट कैंप में प्रतिभाग किया. इसके अलावा 5000 छात्र ऐसे हैं कि उद्यमिता विकास कार्यक्रम(ईडीपी) में भाग लिया. वर्तमान समय में 240 बच्चे ऐसे हैं या तो उन्होंने खुद का बिजनेस शुरु किया है या फिर पहले से चले आ रहे अपने काम को ओर बेहतर किया है.

कैसे जुड़े देवभूमि उद्यमिता कार्यक्रम से?
‘देवभूमि उद्यमिता कार्यक्रम’ से जुड़ने के लिए छात्र क्या करे, इस सवाल का जवाब देते हुए लोकल18 को प्रोजेक्ट ऑफिसर अवनीश राय ने बताया कि हम उच्च शिक्षा संस्थानों में यह प्रोग्राम कर रहे हैं. कोई भी युवक-युवती 45 साल से कम का है और उत्तराखंड का मूल निवासी है. वो इस कार्यक्रम में प्रतिभाग कर सकता है. हमारी वेबसाइट www.duy-heduk.org में जाकर रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं. जहां आपको प्रोग्राम से जुड़ी अन्य जानकारी भी मिल जायेगी. वेबसाइट में अपने जिले और जहां आप हैं. वहां आस-पास कौन सा केंद्र मौजूद है, इसकी पूरी जानकारी मिल जाएगी.

राज्य के युवाओं में ईमानदारी और मेहनत के गुण
राज्य में उद्यमिता की अपार संभावनाओं पर चर्चा करते हुए प्रोजेक्ट ऑफिसर अवनीश राय ने कहा कि उत्तराखंड को ईमानदार और मेहनती राज्य के तौर पर जाना जाता है. उद्यमिता के ज़रुरी गुण’ईमानदारी और मेहनत’, जो पहले से यहां के लोगों में मौजूद है. सबसे अच्छी बात है कि जो गुण विशेष रुप से हमें विकसित करने पड़ते हैं वो पहले से ही राज्य के छात्र- छात्राओं में विद्यमान हैं. अब हमारा काम सिर्फ उन्हें एक छोटी सी राह दिखाना है. जिससे वह अपने स्वरोजगार के मुकाम को हासिल कर अन्यों को भी रोजगार दें.

गौरतलब है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा स्वरोजगार की ओर बढ़ते कदमों को नई उड़ान देते हुए 20 बच्चों के लिए सीड फंड जारी किया है. जिसके तहत एकमुश्त 75 हजार की धनराशि दी गई है. जिसकी बदौलत वे अपने स्वरोजगार के बेहतरीन आइडिया को धरातल पर उतार सकें.

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