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Uttarakhand News : यह फैसला नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत लिया गया है. इसमें कहा गया है कि राज्य सेलेबस में 30% हिस्सा अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परंपराओं के आधार पर शामिल कर सकते हैं.
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
सप्ताह का श्लोक
नए नियम के तहत प्रत्येक सप्ताह एक श्लोक को “सप्ताह का श्लोक” के रूप में चुना जाएगा, जिसका उच्चारण, अर्थ और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से विश्लेषण किया जाएगा. यह सुनिश्चित किया जाएगा कि गीता के श्लोक केवल पाठ्य सामग्री के रूप में न पढ़ाए जाएं, बल्कि छात्रों के जीवन और व्यवहार में भी इनका प्रभाव दिखे. शिक्षा विभाग ने यह भी सुनिश्चित किया है कि गीता के पाठ को पढ़ाने की जिम्मेदारी मुख्य रूप से संस्कृत शिक्षकों को दी जाएगी. स्कूलों में शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी ताकि वे श्लोकों के अर्थ को सरल और प्रभावी ढंग से समझा सकें.
इनके लिए जरूरी
माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. मुकुल कुमार सती ने कहा कि सभी जिलों में इसकी शुरुआत हो गई है. अब से यह सभी सरकारी और सहायताप्राप्त स्कूलों में नियमित रूप से जारी रहेगा. राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के प्रावधानों के तहत सभी छात्र-छात्राओं को भारतीय ज्ञान परम्परा का आधार और ज्ञान प्रणाली का अध्ययन भी कराया जाना है. इसके लिए पाठ्यक्रम और पाठ्य पुस्तकें भी विकसित की जा रही हैं. गीता और रामायण को भी इसमें शामिल किया गया है.
