ऊधम सिंह नगर जिले में पिछले 15 महीनों में  168 बच्चों में दिल में छेद के मामले आए सामने, तीन की मौत 


वेद प्रकाश/ऊधम सिंह नगर: पिछले कुछ सालों में तापमान में हुए बदलाव और खानपान में हुए परिवर्तन के कारण, आजकल कम उम्र में दिल से जुड़ी बीमारियों के मामले आम हो गए हैं. खासकर, 0 से 18 साल के बच्चों के दिल में छेद के मामले में वृद्धि दिखाई दे रही है. इस चुनौती के सामने देखते हुए, केंद्र सरकार ने आरबीएसके अभियान की टीम को तैयार किया है, जो स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जाकर बच्चों की जांच करती है. उन बच्चों को भी निरिक्षण किया जाता है जिनमें लक्षण पाए जाते हैं, और उन्हें केंद्र सरकार की ओर से उपचार और चिकित्सा प्रक्रियाएँ प्रदान की जाती हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों की जानें बचाई जा सकें.

उधम सिंह नगर जिले में आरबीएसके की टीम ने पिछले 15 महीनों में आंगनबाड़ी केंद्रों में 125 बच्चों और स्कूलों में 43 बच्चों की जाँच और इलाज की प्रक्रिया शुरू की है. हालांकि, इस दौरान तीन बच्चों को उपचार के लिए परिजनों ने अन्य स्थान पर ले जाने का फैसला किया, और दुखदरूप से, इन तीनों बच्चों की इलाज के दौरान मौत हो गई.

ऊधम सिंह नगर जिले के सीएमओ डॉ मनोज कुमार शर्मा ने व्यक्त किया कि “दिल में छेद” का अर्थ होता है कि ह्रदय के ऊपरी दो कक्षों के बीच की दीवार में छेद हो जाता है, जिससे रक्त अनावश्यक रूप से एक चेंबर से दूसरे चेंबर में पहुंचता है. इससे दिल की सही प्रक्रिया में असमर्थता आती है, और इसलिए दिल में छेद होना एक गंभीर समस्या है. अगर इस समस्या से पीड़ित व्यक्ति का समय पर उपचार नहीं होता है, तो उन्हें ऑपरेशन की भी आवश्यकता पड़ सकती है. बड़े स्तर पर, यदि स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है, तो पीड़ित व्यक्ति की जान भी खतरे में हो सकती है.

उन्होंने बताया कि कई बच्चों के हृदय में जन्मजात छेद होते हैं, और जागरूकता की कमी के कारण समय पर इलाज नहीं हो पाता. इसके परिणामस्वरूप, समय पर उपचार नहीं मिलने की स्थिति में, पीड़ित मरीज को बड़ी मुश्किलें आ सकती हैं, और इसके बिना विचार किए उनके जीवन को खतरे में डाल सकता है.

ये लक्षण दिखें तो जल्द कराएं जांच 
बच्चों में अगर यह 7 लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो जल्द ही सरकारी अस्पताल पहुंचकर जांच कराएं.
1: बच्चों के शरीर का पीला होना और होठों के आसपास नीला पड़ना.
2: बच्चों का वजन धीमी गति से बढ़ना.
3: बच्चों को बार-बार फेफड़ों का संक्रमण होना.
4: बच्चों को अचानक से तेज पसीना आना और खेलते ही थकावट महसूस होना.
5: बच्चों के शरीर का तापमान हमेशा ज्यादा रहता है, और कई बार गर्मी में भी कंपकंपी आने लगती है.
6: मिल्कफीड के समय बच्चों का रोना और सांस लेने में दिक्कत महसूस होना.
7: बच्चों की बोलते समय सास फूलना और शिशु का असहज होना.

सीएमओ डॉक्टर मनोज कुमार शर्मा ने बताया कि बच्चों में अगर इस तरह के लक्षण देखने को मिल रहे हैं, तो इसकी जांच तुरंत कराएं. इसकी जांच सीएसची या जिला अस्पताल में करानी चाहिए, ताकि बच्चे का समय से इलाज हो जाए.

Tags: Health, Latest hindi news, Local18, Udhamsinghnagar News, Uttrakhand ki news