नारायणी शिला मंदिर: श्राद्ध तर्पण के लिए प्रसिद्ध है यह मंदिर, यहां मिलता है पुरखों को मोक्ष!


रिपोर्ट, ओम प्रयास

हरिद्वार. देश-विदेश में हरिद्वार को धर्म नगरी के रूप में जाना जाता है जहां हर साल तीज-त्योहारों पर होने वाले गंगा स्नान में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु आते हैं. हरिद्वार में कई धार्मिक स्थल ऐसे हैं जिनका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में किया गया है. वहीं हरिद्वार में श्राद्ध करने का भी विशेष महत्व है. हरिद्वार में स्थित प्राचीन नारायणी शिला मंदिर कई हजार साल पुराना बताया जाता है, जहां पर पिंडदान करने और श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां श्राद्ध तर्पण करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. हरिद्वार नारायणी शिला का वर्णन कई धार्मिक ग्रंथों में है.

हरिद्वार में स्थित नारायण शिला मंदिर में श्राद्ध करने और पिंडदान करने से मोक्ष की प्राप्ति होने की मान्यता है. नारायणी शिला मंदिर के मुख्य पुजारी मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि नारायणी शिला का कई धार्मिक ग्रंथों में वर्णन किया गया है. अपने पितरों के निमित श्रद्धा पूर्वक किए गए कार्य को श्राद्ध कहते हैं. पितृ श्राद्ध करने के लिए ब्रह्मकपाली, नारायणी शिला और गया महत्वपूर्ण स्थान बताए जाते है जिनमें श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया जाता है.

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श्लिा के दर्शन से होते हैं पाप नष्‍ट
नारायणी शिला मंदिर का प्राचीन धार्मिक ग्रंथों में विशेष रूप से वर्णन किया गया है. यहां श्राद्ध करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है. पंडित मनोज कुमार त्रिपाठी बताते हैं कि नारायणी शिला के दर्शन मात्र से व्यक्ति के सारे पाप नष्ट हो जाते हैं. वे बताते हैं कि स्कंद पुराण के केदार खंड में स्पष्ट वर्णन है कि नारायणी शिला में पितरों के निमित श्रद्धा पूर्वक किए गए श्राद्ध से 100 पितृ कुल, मातृ कुल और अपना मोक्ष कर लेता है. मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि हरिद्वार नारायणी शिला मंदिर में भगवान का कंठ से लेकर नाभि तक का हिस्सा यहां स्थित है जिसका वर्णन वायु पुराण में है.

भगवान करते हैं वास

पंडित मनोज त्रिपाठी बताते हैं कि हरिद्वार नारायणी शिला में भगवान का कंठ से लेकर नाभि तक का हिस्सा होने के कारण इसके हृदय स्थान में लक्ष्मी वास करती है जिससे श्रद्धालु जो भी मांगता है वह भगवान को सुनाई देता है और वह श्रद्धालुओं के मन की इच्छा को पूरा कर देते हैे. ऐसी बहुत सी मान्यताएं हैं कहा जाता है कि इस स्थान पर भगवान स्वयं वास करते हैं जिस कारण यहां श्राद्ध करने से मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.

क्‍या कहते हैंं श्रद्धालु
दिल्ली से अपने पितरों का श्राद्ध करने आईं श्रद्धालु प्रियंका सिंह ने बताया कि वह नारायणी शिला में पूर्वजों और पिंड दान के लिए आईं हैं. नारायणी शिला मंदिर की बहुत मान्यता है. यहां पितरों के श्राद्ध करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. वहीं राजौरी जम्मू से आए दूसरे श्रद्धालु मनोज गुप्ता ने बताया कि नारायणी शिला की काफी मान्यता है. यहां आकर श्राद्ध करने और पिंड दान करने से पूर्वजों को शांति मिलती है और बच्चों को आशीर्वाद मिलता है. इसी कामना को लेकर वह अपने परिवार के साथ नारायणी शिला में आए हैं.

(NOTE: इस खबर में दी गई सभी जानकारियां और तथ्य मान्यताओं के आधार पर हैं. NEWS18 LOCAL किसी भी तथ्य की पुष्टि नहीं करता है.)

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