कर्नाटक में हिजाब पर फिर उपजा विवाद
कुछ दिन पूर्व मुस्लिम बहुल इलाके में एक समारोह में बोलते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने यह घोषणा की कि स्कूलों में मुस्लिम छात्राओं पर कक्षा में हिजाब पहन कर आने पर पाबन्दी को हटाया जा रहा है। इसके लिए अधिकारियों को निर्देश दे दिए गए हैं कि वे इस संबंध में सरकारी अधिसूचना शीघ्र जारी कर दें। अगले दिन उनकी यह खबर अखबारों की सुर्खियों में थी। इसको लेकर राजनीतिक तथा सामाजिक हलकों में तीव्र प्रतिक्रिया हुई। शाम होते-होते मुख्यमंत्री की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि इस बारे में अभी कोई निर्णय नहीं किया गया है। अभी इस मुद्दे पर विचार-विमर्श जारी है।
सबसे अधिक कड़ी प्रतिक्रिया मुख्य विपक्षी दल बीजेपी की ओर से आई। लगभग दो साल पहले जब राज्य में बीजेपी की सरकार थी तब एक आदेश जारी किया गया था कि स्कूल के छात्र और छात्राएं कक्षा निर्धारित यूनिफार्म ही पहनकर आएं न कि अन्य कोई वस्त्र। तब तटवर्तीय इलाके में कुछ मुस्लिम छात्राओं ने इसका विरोध कर कक्षा में हिजाब पहनकर आने के लिए धरना दिया। इसी बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने कहा कि हिजाब पहनना इस्लाम का एक जरूरी अंग हैं। अगर उन्हें हिजाब पहनने की इजाजत नहीं दी जाती तो यह उनके मूलभूत अधिकारों का हनन होगा। कुछ स्कूलों में छात्राओं ने अपनी कक्षाओं का वहिष्कार तक करना शुरू कर दिया। इसी दौरान वार्षिक परीक्षाओं का दौर शुरू हो गया। हिजाब पहनने की इजाजत नहीं होने के चलते छात्राओं के कई अभिवावकों ने उन्हें परीक्षा में नहीं बैठने के लिए कहा। दूसरी ओर बीजेपी के नजदीक समझे जाने वाले छात्र संगठनों ने ऐलान कर दिया कि अगर मुस्लिम छात्राओं को हिजाब पहनने की इजाजत दी गई तो वे कक्षा में भगवे रंग का गमछा पहनकर आएंगे। कुछ स्कूलों में तो इसको लेकर हिन्दू और मुस्लिम् छात्र एक दूसरे से टकराने तक को आ गए। उन दिनों जो फोटो सबसे अधिक वायरल हुई वह मुस्कान नाम की एक मुस्लिम छात्रा की थी। बाद में यही पिक्चर हिजाब को लेकर मुस्लिम समुदाय के विरोध के रूप में उनके आन्दोलन का चेहरा बन गई। इसी बीच कुछ मुस्लिम संगठनों ने कर्नाटक हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर हिजाब पर प्रतिबंध लगाने वाली सरकारी अधिसूचना को स्थगित करने की गुहार लगाई। याचिक दायर करने वालों का दावा था कि हिजाब मुस्लिम महिलाओं की वेशभूषा का अभिन्न अंग है। इसे पहनने पर रोक लगाना संवैधानिक अधिकारों का हनन है। लेकिन कोर्ट ने अधिसूचना पर रोक लगाने से इंकार कर दिया। बाद में इस मुद्दे पर कोर्ट में लम्बी बहस के बाद माननीय जजों ने फैसला सुनाया, जिसमें कहा गया कि हिजाब इस्लाम का अंग नहीं है। इन संगठनों ने इस फैसले को सर्वोच्च न्यायलय में चुनौती दी जहां अभी इस पर सुनवाई लंबित है। जिस समय हिजाब पहनने पर प्रतिबन्ध लगाया गया उस समय राज्य में कांग्रेस प्रमुख विपक्षी दल था। तब इस पार्टी के नेताओं ने बीजेपी सरकार के इस निर्णय की निंदा की थी। इन नेताओं ने कहा था कि अगर निकट भविष्य उनकी पार्टी की सरकार बनती है तो यह निर्णय वापस कर लिया जाएगा।
बताया जाता है कि सिद्धारमैया ने अपनी पार्टी के किसी भी बड़े नेता से विचार-विमर्श किए बिना ही हिजाब पर प्रतिबन्ध हटाए जाने की घोषणा कर दी थी। सबसे अधिक रोष उप मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने व्यक्त किया। शिवकुमार राज्य कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष भी है। जब सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री बनाया गया था उनको साफतौर पर कहा गया था कि वे सरकार के सभी निर्णय शिवकुमार से विचार- विमर्श करके ही करेंगे। ऐसा माना है कि शिवकुमार और पार्टी कई अन्य बड़े नेताओं की राय है कि इस मुद्दे को लोकसभा के चुनाव होने तक ठन्डे बस्ते में रहने दिया जाए। अगर हिजाब पहनने पर लगे प्रतिबन्ध को हटाया जाता है बीजेपी इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना लेगी जिसका नुकसान कांग्रेस पार्टी को ही होगा।
पार्टी की नेताओं का कहना है कि पार्टी आलाकमान का भी यह मत है कि इस मामले पर फिलहाल चुप्पी रखी जाए। बीजेपी के हाथ कोई भी ऐसा मुद्दा नहीं दिया जाना चाहिए, जिससे पार्टी को लोकसभा चुनावों में फायदा हो। पिछले लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने कुल 28 सीटों में से 26 पर जीत दर्ज की थी। बीजेपी इस जीत को दोहराने की कोशिश में है। राज्य कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी आलाकमान का विश्वास दिलाया है कि वे लोकसभा चुनावों में पार्टी का परचम लहराएंगे।
-लोकपाल सेठी
(ये लेखक के अपने विचार हैं)