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Pithoragarh News : पिथौरागढ़ के शिक्षक चंद्रशेखर जोशी की दोस्ती चीन के इंजीनियर से हो गई. चीन से उनके दोस्त ने तीन पैकेज में ऐसा गिफ्ट भेजा कि पूरा गांव उसका मुरीद हो गया. एक झलक पाने के लिए बेताब हो उठा. गिफ्ट…और पढ़ें

पिथौरागढ़ के दुर्गम स्कूल में हुए अद्भुत प्रयोग से हर कोई हैरान, चीन से आई रोबोटिक एआई टीचर…

हाइलाइट्स

  • चन्द्रशेखर जोशी ने पिथौरागढ़ स्कूल में एआई टीचर बनाई.
  • चीन के इंजीनियर मित्र ने रोबोटिक टीचर बनाने में मदद की.
  • एआई टीचर ने गांव के लोगों का दिल जीत लिया.

पिथौरागढ़. नेपाल बॉर्डर से सटे जाजर चिंगरी स्कूल में एक टीचर की पहल क्रांति ला रही है. यहां स्कूली बच्चों को अब एआई टीचर पढ़ा रही है. उत्तराखंड ही नहीं बल्कि ये देश का पहला ऐसा सरकारी स्कूल है, जहां स्टूडेट्स को एआई टीचर पढ़ा रही है. खुद के प्रयासों से टीचर चन्द्रशेखर जोशी ने प्राइमरी स्कूल में वो कर दिखाया है, जिसकी कल्पना भी शायद ही किसी ने की हो. अमेरिका और यूरोप के स्कूल में नही बल्कि पिथौरागढ़ के दुर्गम स्कूल में हुए अद्भुत प्रयोग से हर कोई हैरान है. मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर नेपाल बॉर्डर पर जाजर चिंगरी प्राइमरी स्कूल है.

यहां आसानी से आज भी जरूरी चीजें नहीं मिल पाती हैं लेकिन नए विचारों को अमल में लाने के लिए चर्चित टीचर चन्द्रशेखर जोशी ने यहां वो कर दिखाया है, जिससे हर कोई हैरान है. जाजर चिंगरी के स्कूल में एआई टीचर बच्चों को पढ़ा रही है. एआई टीचर को ईको नाम दिया गया है. जोशी ने खुद के प्रयासों से एआई टीचर को बनाया है. एआई टीचर हर सवाल का चुटकी में जवाब दे रही है. एआई टीचर को तैयार करने में चन्द्रशेखर जोशी ने करीब 4 लाख रुपये खर्च किए हैं. जोशी का कहना है कि इससे जहां बच्चे आधुनिक तकनीक से रूबरू होंगे. वहीं जिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी है, वहां भी बच्चों को आधुनिक शिक्षा इसकी मदद से दी जा सकती है.

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चाइना में मौजूद इंजीनियर मित्र ने की मदद
रोबोटिक टीचर से पढ़ाई का विचार चन्द्रशेखर को चाइना में रहने वाले एक दोस्त की मदद से मिला. इंजीनियर दोस्त ने तीन पैकेज में रोबोट को पिथौरागढ़ डिलीवर किया है. बाद में व्हाट्सएप के जरिए इंजीनियर मित्र ने इसे तैयार करने में चन्द्रशेखर की पूरी मदद की. नेपाल बॉर्डर के करीब जिस स्कूल में ये एआई टीचर मौजूद है. वहां आज भी फाइव जी सिग्नल नहीं है. बावजूद इसके स्कूल में फोर जी सिग्नल की मदद से एआई टीचर बच्चों को पढ़ा रही है.

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इंटरनेट सिग्लन कमजोर होने के कारण एआई टीचर स्कूल के बारमदे में ही बच्चों को पढ़ाती है. मात्र चार लाख रुपये में एआई टीचर तैयार कर चन्द्रशेखर वो कर दिखाया है, जो अभी तक देश के किसी भी सरकारी स्कूल में नही हुआ है. ये अद्भुत प्रयोग शिक्षा के क्षेत्र में बड़ी क्रांति ला सकता है. बस जरूरत इस बात है कि सरकार और नीति-निर्माता इस पहल से कुछ सीखें. एआई टीचर उन स्कूलों के लिए मददगार साबित हो सकता है, जहां शिक्षकों की कमी से छात्रों को भविष्य खराब हो रहा है.

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टीचर की हुई चीन के इंजीनियर से दोस्ती, भेजा ऐसा गिफ्ट, मुरीद हो गया पूरा गांव

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