छात्रा ने कोर्ट में दायर की थी याचिका
छात्रा ने अपनी माता के माध्यम से कोर्ट में याचिका दायर की, जिसके बाद सुनवाई हुई और कोर्ट ने छात्रा को परीक्षा में बैठने की अनुमति दी। न्यायमूर्ति सी हरिशंकर ने सीबीएसई को फटकार लगाते हुए कहा, “यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है।” साथ ही कोर्ट ने कहा कि CBSE से ये अपेक्षा की जाती है कि वे भविष्य में छात्रों के अधिकार को लेकर सर्तक रहे।
कोर्ट ने छात्रा के साथ व्यवहार को बताया अमानवीय
न्यायमूर्ति हरिशंकर ने कहा कि छात्रा को पहले से ही एडमिट कार्ड जारी कर दिया गया था और जब वो परीक्षा देने आई तो उसे परीक्षा हॉल के बाहर खड़ा कर दिया गया। यह एक अमानवीय व्यवहार है। वहीं छात्रा के हित में फैसला लेते हुए कोर्ट ने कहा कि छात्रा को उस दिन की परीक्षा के लिए समय दिया जाएगा, जिस दिन वो हॉल के बाहर खड़ी थी। अन्य सभी छात्रों की तरह समान समय दिया जाएगा। साथ ही कोर्ट ने कहा कि यदि ऐसे मामले के तहत कोई और भी छात्र है, तो उसे भी परीक्षा देने के लिए समय दिया जाए।
