कोटा। प्रारंभिक शिक्षा में विद्यार्थियों के लिए दिन के भोजन के रूप में मिड डे मील योजना चालाई जाती है। जिसमें कक्षा 1 से 8वीं तक के विद्यार्थियों को दिन के भोजन के अलावा मिल्क पाउडर से ना दूध दिया जाता है। कोटा में वर्तमान में एक से 8वीं तक के 1 लाख 11 हजार से ज्यादा विद्यार्थी पंजीकृत हैं। जिनमें से केवल 60 से 70 फीसदी विद्यार्थी ही मिड डे मील योजना का लाभ ले पा रहे हैं। बाकि विद्यार्थी या तो विद्यालय नहीं आ रहे हैं या वो विद्यालयों में खाना नहीं खा रहे हैं। ऐसे में इतनी बड़ी योजना का लाभ सभी विद्यार्थियों को नहीं मिल पा रहा है।
मई में हुई संख्या में कम
समग्र शिक्षा विभाग की मई में आयोजित हुई जिला स्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान प्रारंभिक शिक्षा विभाग की ओर से प्रस्तुत आंकडों के अनुसार कोटा में प्रारंभिक शिक्षा विभाग में 1 लाख 11 हजार 901 विद्यार्थी नामांकित थे। जिनमें से केवल 50 हजार 620 विद्यार्थियों ने ही मिड डे मील योजना का लाभ लिया। हालांकि उस समय विद्यालयों में अवकाश का दौर था। लेकिन मौजूदा समय में भी 1 लाख विद्यार्थियों में से हर रोज 80 से 85 हजार विद्यार्थी मिड डे मील योजना के तहत भोजन कर रहे हैं।
दूध पीने वालों की संख्या भी कम
मिड डे मील के अलावा सरकारी विद्यालयों में पाउडर का दूध पीने वालों की संख्या भी कम है। सूत्रों के अनुसार जिले के सभी विद्यालयों के मिलाकर केवल 50 से 60 हजार बच्चे ही पाउडर से बने दूध को पी रहे हैं। इसमें सबसे बड़ा कारण पाउडर वाले दूध को लेकर बनी भ्रांतियां हैं जो अभिभावकों सहित बच्चों में भी दूध को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा कर रही हैं। वहीं जिले के अधिकतर बच्चे ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं ेऐसे में उनके घर गाय भैंस होने से वो भी पाउडर वाला दूध नहीं पी रहे हैं।
सटीक जानकारी के लिए बनाया सम्सा पोर्टल
मिड डे मील योजना के तहत वर्तमान में लाभांवित होने वाले विद्यार्थियों की संख्या हर हफ्ते अपडेट की जाती है। जिसमें संस्था प्रधानों द्वारा विभाग को एसएमस के जरीए जानकारी भेजनी होती है जिसमें समय भी खर्च होता है और कई बार जानकरी भी सटीक नहीं होती है। इसी से बचने के लिए विभाग ने अब सम्सा पोर्टल बनाया है जहां हर दिन की जानकारी अपडेट रहेगी।
इनका कहना है
मई में अवकाश के दिने होने के चलते लाभांवित विद्यार्थियों की संख्या कम हो सकती है। वर्तमान में लगभग समस्त विद्यालयों के सभी विद्यार्थी मिड डे मील ले रहे हैं। इसकी सटीक मोनिटरिंग के लिए विभाग की ओर से सम्सा पोर्टल भी बनाया गया है जिसमें हर दिन के स्टोक और लाभांवितों की संख्या मिलेगी।
– यतीश विजयवर्गीय, प्रारंभिक जिला शिक्षा अधिकारी, कोटा
